क्या एक हाईकोर्ट जज और एक पूर्व फाइटर पायलट के बीच कोई समानता हो सकती है? पहली नजर में जवाब 'नहीं' होगा जोकि स्वाभाविक भी है. लेकिन गोवा में दोनों ने एक ऐसी चुनौती स्वीकार की, जिसे पूरा करना आम लोगों के बस की बात नहीं है. 'आयरनमैन 70.3 की फिनिश लाइन पर दोनों की कहानी एक जैसी दिखी, जहां पद या पेशा नहीं, सिर्फ सहनशक्ति मायने रखती है.
दरअसल, कोच्चि के रहने वाले कैप्टन विनोद ऑगस्टीन ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान उनके लिए सबसे यादगार पलों में से एक जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस के साथ साइकिलिंग करना रहा. ऑगस्टीन के मुताबिक, हाईकोर्ट जज का खेल के प्रति समर्पण और दृढ़ संकल्प उन्हें बेहद प्रेरणादायक लगा.
उन्होंने कहा कि यह अनुभव इस बात का प्रमाण था कि उम्र या पेशे की व्यस्तता असाधारण व्यक्तिगत लक्ष्यों की राह में बाधा नहीं बनती. हालांकि चुनौती पूरी होने के बाद जज आगे निकल गए और फिर उनसे मुलाकात नहीं हो सकी.
बेटे से मिली प्रेरणा, अप्रैल से शुरू की तैयारी
जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की आयरनमैन यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं रही. दो साल पहले उनके बेटे ने इसी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली. उन्होंने अप्रैल में प्रशिक्षण शुरू किया. शुरुआती दिनों में वह लगातार 50 मीटर तक भी नहीं तैर पाते थे. वर्षों तक प्रतिदिन 16 से 18 घंटे काम करने की वजह से फिटनेस प्रभावित हुई थी. इसके अलावा मेनिस्कस इंजरी और मांसपेशियों में आई चोटों ने भी उनकी तैयारी में कई बार रुकावट डाली.
जेलीफिश के डंक और थकान के बावजूद पूरी की रेस
1 नवंबर को गोवा के मिरामार में आयोजित प्रतियोगिता में करीब 1,650 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. जस्टिस थॉमस ने तैराकी के दौरान जेलीफिश के डंक झेले, कठिन साइकिलिंग चढ़ाइयों का सामना किया और फिर हाफ मैराथन भी पूरी की. इन तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 8 घंटे, 46 मिनट और 44 सेकंड में रेस पूरी कर फिनिश लाइन पार की.
न्यायिक फैसलों के कारण भी रहे सुर्खियों में
जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस इससे पहले अपने कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों को लेकर भी चर्चाओं में रहे हैं. उनके फैसलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े ECIR मामलों, स्कूल पाठ्यक्रम में POCSO जागरूकता को शामिल करने के निर्देश और गोल्ड स्मगलिंग मामले से संबंधित याचिकाओं पर दिए गए आदेश प्रमुख रहे हैं.
क्या है 'आयरनमैन 70.3?
आयरनमैन 70.3 दुनिया की सबसे कठिन एंड्योरेंस प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है. इसमें प्रतिभागियों को लगातार 1.9 किलोमीटर तैरना, 90 किलोमीटर साइकिल चलाना और 21.1 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होती है. 1978 में हवाई से शुरू हुई यह प्रतियोगिता आज वैश्विक स्तर पर एक बड़े एंड्योरेंस आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसमें विभिन्न पेशों और आयु वर्ग के लोग हिस्सा लेते हैं.
तैराकी आसान, लेकिन दौड़ बनी सबसे बड़ी चुनौती
ऑगस्टीन एक सर्टिफाइड डाइवमास्टर भी हैं, इसलिए उनके लिए तैराकी अपेक्षाकृत आसान रही. 90 किलोमीटर की साइकिलिंग भी उनके अनुसार सहज रही, लेकिन गोवा की गर्मी में हाफ मैराथन दौड़ना सबसे कठिन अनुभव साबित हुआ. उन्होंने कहा कि दौड़ के दौरान थकी हुई टांगों और बार-बार आने वाली चढ़ाई ने मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति की असली परीक्षा ली.
राजनेता और सैनिक भी बने चुनौती का हिस्सा
आयरनमैन 70.3 में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया. इनमें बीजेपी नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई भी शामिल थे, जिन्होंने चुनौती पूरी की. ऑगस्टीन ने बताया कि सशस्त्र बलों से जुड़ी कई महिलाओं ने भी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिनमें से कुछ पोडियम पर भी पहुंचीं.
कैप्टन विनोद ऑगस्टीन के लिए आयरनमैन मेडल जीतना ही सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं थी. उनके अनुसार सबसे खास अनुभव अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से मिलना, उनकी कहानियां सुनना और यह जानना था कि उन्हें अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने की प्रेरणा कहां से मिलती है. उनका मानना है कि आयरनमैन की फिनिश लाइन पर किसी का पद, पेशा या पहचान मायने नहीं रखती. वहां केवल एक चीज की कीमत होती है, और वह है सहनशक्ति.
यह भी पढ़ें- 'मैं कड़ी मेहनत क्यों करूं?' लंबे इंतजार से टूटा सरफराज का सब्र, खुलकर बयां किया दर्द
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं