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अमेरिका का मिडटर्म चुनाव

ट्रंप की अग्निपरीक्षा

Abstract sculptural render

3 नवंबर को अमेरिकी नागरिक मिडटर्म चुनावों में वोट डालेंगे, जिससे वाशिंगटन में सत्ता का संतुलन बदल सकता है.

A journey from summit to sky

नवंबर के पहले हफ्ते में जब 50 राज्यों के वोटर वोट डालने के लिए कतार में खड़े होंगे, तो डोनाल्ड ट्रंप का नाम बैलेट पेपर पर नहीं होगा.

लेकिन फोकस में ट्रंप ही होंगे. अपने दूसरे कार्यकाल में, देश के भीतर यह उनकी पहली बड़ी परीक्षा है.

मतदाता यह तय करेंगे कि कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों पर किस पार्टी का कंट्रोल होगा.

ये चुनाव क्या हैं?

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अमेरिकी संसद में दो सदन होते हैं - हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट. दोनों मिलकर अमेरिका के लिए कानून बनाते हैं. इसे भारत की लोकसभा और राज्यसभा से समझ सकते हैं.

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हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स 'निचला सदन' है, जिसमें 435 मेंबर यानी सांसद होते हैं. ये सदस्य 50 राज्यों में जनसंख्या के आधार पर बंटे होते हैं. इनका कार्यकाल 2 साल का होता है. हर मिडटर्म चुनाव में इन सभी सीटों के लिए सांसद चुना जाता है.

सीनेट 'उच्च सदन' की भूमिका निभाती है, जिसमें 100 सदस्य होते हैं- हर राज्य से 2 सीनेटर. इनका कार्यकाल 6 साल का होता है. चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं, इसलिए हर 2 साल में सीनेट के कम से कम एक-तिहाई सदस्यों के लिए चुनाव होता है.

इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होने हैं.

इनमें वे दो खास चुनाव शामिल हैं जो जेडी वेंस और मार्को रुबियो के ट्रंप सरकार में शामिल होने के बाद खाली हुईं सीटों के लिए कराए जा रहे हैं.

साथ में 36 राज्यों के लिए गवर्नर भी चुने जाएंगे.

चूंकि ये चुनाव राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं, इसलिए इन्हें 'मिडटर्म' या मध्य-अवधि चुनाव कहा जाता है. अमेरिका के वोटर राष्ट्रपति की ताकत बदल सकते हैं.

किसी बिल को कानून बनने के लिए दोनों सदनों से पारित होना जरूरी है. किसी एक सदन पर कंट्रोल होने से भी किसी पार्टी को इतनी वास्तविक शक्ति मिल जाती है कि वह दूसरे पक्ष के एजेंडे को रोक सके.
Studio team collaborating around a table

अमेरिकी कांग्रेस को कौन कंट्रोल करता है?

फिलहाल दोनों सदनों पर ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा है, लेकिन बहुत मामूली अंतर से.

वर्तमान में सीनेट में 53 रिपब्लिकन, 45 डेमोक्रेट और डेमोक्रेट्स के साथ जुड़े 2 निर्दलीय सदस्य हैं.

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है.

ट्रंप के लिए मिडटर्म चुनाव क्यों मायने रखते हैं

अगर रिपब्लिकन दोनों सदनों पर अपना कब्जा बनाए रखते हैं, तो ट्रंप प्रशासन के लिए कानून पास करना आसान हो जाएगा.

अगर डेमोक्रेट्स 'हाउस' जीत जाते हैं, तो वे ट्रंप के कानूनों को रोक सकते हैं और सरकार की जांच करने वाली समितियों पर कंट्रोल पा सकते हैं.

इतिहास ट्रंप के खिलाफ है.

पिछले 150 वर्षों में हुए 39 मिडटर्म चुनावों में से 36 बार, सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी को 'हाउस' में नुकसान उठाना पड़ा है.

ट्रंप के अपने आंकड़े भी उन पर दबाव बढ़ा रहे हैं. उनकी रेटिंग लगातार गिरी है, और ईरान के साथ तनाव के बाद इसमें और भी गिरावट आई है.

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अमेरिकी लोगों के लिए अहम मुद्दे क्या हैं?

ज्यादातर वोटरों के लिए 'रहने का खर्च' सबसे बड़ी चिंता है.

इसमें फ्यूल का एक बड़ा हिस्सा है. अभी अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर औसत कीमत 4.33 डॉलर प्रति गैलन है, जबकि फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने से पहले यह 3 डॉलर से कम थी.

टैरिफ, नौकरियां, स्वास्थ्य और इमिग्रेशन भी इस लिस्ट में शामिल हैं.

ओपिनियन पोल क्या बताते हैं?

ज्यादातर अनुमानों में डेमोक्रेट्स को बढ़त हासिल है, और वे एक नेशनल सर्वे में 9 प्रतिशत अंकों से आगे चल रहे हैं.

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हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स को स्पष्ट बहुमत मिलने की उम्मीद है.

चुनाव में शामिल 35 सीनेट सीटों में से, विश्लेषकों का अनुमान है कि डेमोक्रेट्स 17 सीटें जीत सकते हैं. इससे 100 सीटों वाली सीनेट में उनकी कुल संख्या मौजूदा 47 से बढ़कर 51 हो जाएगी, जिससे उन्हें बहुमत मिल जाएगा.

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भारत की नजर क्यों है?

अमेरिका के संसद पर कंट्रोल में बदलाव आने से भारत को लेकर अमेरिकी नीति में बदलाव आए, यह जरूरी नहीं है. इनमें से ज्यादातर नीतियां सीधे तौर पर ट्रंप द्वारा तय की जाती हैं.

बिजनेस इसका एक उदाहरण है. अमेरिकी कांग्रेस के पास टैक्स और विदेशी व्यापार को लेकर संवैधानिक अधिकार हैं, लेकिन राष्ट्रपति के पास भी व्यापक शक्तियां होती हैं.

लेकिन, वाशिंगटन में राजनीतिक विभाजन और गहरा होने से, बहसों की दिशा भले न बदले, लेकिन उनका लहजा जरूर बदल सकता है.

दोनों ही पार्टियों की तरफ से कई भारतीय-अमेरिकी भी चुनावी मैदान में हैं. ओहियो में, रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी, जो पहले राष्ट्रपति बनना चाहते थे, अगर जीत जाते हैं, तो वे उस राज्य के पहले भारतीय-अमेरिकी गवर्नर बन जाएंगे.

रिजल्ट कब आएंगे?

3 नवंबर को मतदान होगा. इसके तुरंत बाद वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी, लेकिन रात तक नतीजे साफ नहीं हो पाएंगे.

कुछ चुनावों के नतीजे जल्दी आ सकते हैं, जबकि कुछ में फैसला आने में कई दिन लग सकते हैं, क्योंकि अधिकारियों को डाक से आए वोटों (पोस्टल बैलेट) की गिनती करनी होगी.

वहीं, कड़े मुकाबले की स्थिति में दोबारा गिनती हो सकती है या कानूनी चुनौतियां सामने आ सकती हैं.

स्टोरी: आशुतोष सिंह

डेवलपर: प्रियंक द्विवेदी

फोटो: AFP