शनिवार को भारतीय गोल्फर प्रणवी उर्स ने भारतीय खेलों के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया. मैसूर की रहने वाली 23 वर्षीय प्रणवी एशियाई खेलों में व्यक्तिगत गोल्फ गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और साथ ही महिला टीम इवेंट में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने में भी मदद की. IGPL की एक प्रमुख स्टार बन चुकीं प्रणवी की यह शानदार उपलब्धि 2025 IGPL इनविटेशनल मुंबई में हासिल हुई, जहां वह पुरुष गोल्फरों के खिलाफ प्रोफेशनल ओपन-फील्ड टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. IGPL, NDTV के साथ गोल्फ प्रो-एम टूर्नामेंट के लिए भी पार्टनर है. इस टूर्नामेंट में प्रणवी के मंगेतर करनदीप कोचर भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं.
प्रणवी की कामयाबी पर क्या बोले करनदीप
NDTV Am Green IGPL गोल्फ प्रो-एम सीजन 2 के दौरान एक खास इंटरव्यू में, कोचर ने अपनी पार्टनर की ऐतिहासिक कामयाबी के बारे में बात की. उन्होंने कहा,"मैं पूरे समय बहुत घबराहट वाली स्थिति में था. मुझे लगता है कि वह भी सच में नर्वस थी. वह पूरे दिन और पूरी रात, असल में पिछली रात भी, बहुत नर्वस थी. लेकिन यह बहुत शानदार दिन है. और जिस तरह से उसने एक वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ी के खिलाफ खेलते हुए अपना संयम बनाए रखा."
करनदीप ने आगे कहा,"मुझे लगता है कि वह बहुत मेहनती लड़की है, और वह समझती है कि उसके खेल को किस चीज़ की ज़रूरत है. वह जानती है कि सबसे ऊंचे लेवल पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए किसी खास इवेंट से पहले उसे कितनी तैयारी करनी होगी. इसलिए, मुझे लगता है कि वह इस चीज़ को बहुत अच्छे से संभालती है. जिस तरह से वह अपने प्रैक्टिस सेशन, वर्कआउट, फिजियोथेरेपी सेशन और यहां तक कि अपने मेंटल कोच के साथ सेशन को मैनेज करती है... जिस तरह से वह यह सब संभालती है, मुझे लगता है कि उसने इसका फ़ॉर्मूला समझ लिया है."
क्या बनाता है प्रणवी को सबसे अलग
इसके बाद कोचर ने बताया कि प्रणवी को क्या चीज़ सबसे अलग बनाती है. उन्होंने कहा,"मेरे हिसाब से वह बहुत शांत स्वभाव की हैं. और जब ऐसे मौके आते हैं - क्योंकि ऐसे मौके ज़िंदगी में शायद ही कभी मिलते हैं, जैसे एशियन गेम्स के फ़ाइनल राउंड में लीड करना - तो तीसरे होल पर ट्रिपल बोगी के बाद भी उन्होंने जिस तरह का संयम दिखाया, वह वाकई कमाल का था. दुनिया की नंबर 6 खिलाड़ी के ख़िलाफ़ उन्होंने जिस तरह से वापसी की, वह देखना अद्भुत था. NDTV AM Green IGPL में हम सभी को उन पर बहुत गर्व है. मुझे लगता है कि पूरे देश को उन पर गर्व है."
बता दें, प्रणवी ने कड़े मुक़ाबले वाले फ़ाइनल राउंड में अपना संयम बनाए रखा और कुल 15-अंडर 265 के स्कोर के साथ फ़िनिश किया. उन्होंने चीन की यिन रुओनिंग और सिंगापुर की शैनन टैन को एक स्ट्रोक से पीछे छोड़ा. प्रणवी फ़ाइनल राउंड में तीन-शॉट की ओवरनाइट लीड के साथ उतरी थीं, लेकिन तीसरे होल पर ट्रिपल बोगी के कारण उन्हें शुरुआती झटका लगा. उन्होंने तीन बर्डी के साथ वापसी की और गोल्ड की दौड़ में बने रहने के लिए अपना संयम फिर से हासिल किया.
आख़िरी दो होलों पर बढ़ते दबाव के बीच, प्रणवी ने अहम 'पार पुट' लगाए और 18वें होल को भी 'पार' के साथ पूरा किया, जिससे उनका स्कोर 15-अंडर बना रहा. यिन और टैन भी 14-अंडर पर रहीं, जिससे भारतीय खिलाड़ी लीडरबोर्ड में सबसे ऊपर रहीं. यह गोल्ड मेडल एशियन गेम्स में भारत का पहला महिला व्यक्तिगत गोल्फ़ गोल्ड है और 2002 में शिव कपूर की पुरुष व्यक्तिगत जीत के बाद से इन गेम्स में देश का पहला गोल्फ़ गोल्ड है. प्रणवी के प्रदर्शन ने अदिति अशोक और दीक्षा डागर के साथ भारत की महिला टीम को सिल्वर मेडल दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई.
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