रविवार को एशियाई खेलों में भारतीय स्क्वैश स्टार अनाहत सिंह और उनके साथी खिलाड़ी अभय सिंह को अपने-अपने मलेशियाई प्रतिद्वंद्वियों से हार का सामना करना पड़ा और दोनों को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. अभय पुरुषों के सिंगल्स फ़ाइनल में ईन यो एनजी के खेल के स्तर और निरंतरता का मुकाबला नहीं कर सके और सीधे गेम में 9-11, 5-11, 5-11 से हार गए. 18 साल की अनाहत के साथ भी ऐसा ही हुआ, जिन्हें महिलाओं के सिंगल्स फ़ाइनल में मलेशिया की शिवसंगरी सुब्रमण्यम ने आसानी से हरा दिया. 17वीं रैंकिंग वाली भारतीय खिलाड़ी दुनिया की पांचवें नंबर की खिलाड़ी से 4-11, 4-11, 7-11 से हार गईं.
यो और शिवसंगरी दोनों ही एशियाई खेलों में अपना गोल्ड मेडल बचाने के साथ-साथ 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में इस खेल के डेब्यू के लिए क्वालिफ़ाई करने वाले पहले दो स्क्वैश खिलाड़ी बन गए.
वर्ल्ड जूनियर टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय अनाहत, शनिवार को जापान की दुनिया की छठे नंबर की खिलाड़ी सतोमी वातानाबे के खिलाफ़ की गई वापसी जैसा प्रदर्शन इस बार नहीं कर सकीं.
अनाहत और सतोमी के बीच हुए सेमीफ़ाइनल को बारीकी से देखने के बाद, शिवसंगरी एक साफ़ योजना के साथ उतरीं और उसे बखूबी अंजाम दिया. मलेशियाई खिलाड़ी ने अनाहत को लगातार विनर्स (अंक दिलाने वाले शॉट) नहीं लगाने दिए और इसके बजाय लगातार हमले करके उन पर दबाव बनाए रखा.
इससे पहले, 26वीं रैंकिंग वाले अभय, दुनिया के 18वें नंबर के खिलाड़ी यो को कड़ी चुनौती नहीं दे सके, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना गोल्ड मेडल बचाया. मलेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ़ अभय की यह आठवीं हार थी. भारत के टीम इवेंट्स में भी मेडल जीतने की उम्मीद है. असल में, पुरुष टीम मौजूदा चैंपियन के तौर पर इस प्रतियोगिता में उतर रही है.
भले ही अनाहत और अभय गोल्ड जीतकर इतिहास नहीं रच पाए, लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ ऐसा कारनामा किया, जो इससे पहले नहीं हुआ था. सिर्फ 18 साल की उम्र में, अनाहत एशियाई खेलों के सिंगल्स फाइनल में पहुंचने और सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं. ऐसा करके, उन्होंने भारतीय स्क्वैश की दिग्गज खिलाड़ियों दीपिका पल्लीकल और जोशना चिनप्पा की उपलब्धियों को पीछे छोड़ दिया है. इन दोनों ने पहले महिला सिंगल्स मुक़ाबले में ब्रॉन्ज़ मेडल जीते थे.
वहीं, अभय सिंह एशियाई खेलों के पुरुष सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय पुरुष स्क्वैश खिलाड़ी बन गए हैं. उन्होंने सौरव घोषाल की उपलब्धि को दोहराया है. उनके शानदार प्रदर्शन ने भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी हासिल की है, क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ है जब देश के खिलाड़ी एक ही एशियाई खेलों के संस्करण में पुरुष और महिला दोनों स्क्वैश फ़ाइनल में पहुंचे है.
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