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लवलीना ने लगाया 'गोल्डन पंच', खत्म किया 12 साल का इंतजार, मैरी कॉम के बाद ऐसा करने वालीं दूसरी भारतीय

एशियन गेम्स 2026 में लवलीना बोरगोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने करियर का पहला एशियाई खेल स्वर्ण पदक जीता है.

लवलीना ने लगाया 'गोल्डन पंच', खत्म किया 12 साल का इंतजार, मैरी कॉम के बाद ऐसा करने वालीं दूसरी भारतीय
लवलीना ने अपने जन्मदिन पर एशियाड का अपना पहला गोल्ड जीता है

देश की सबसे कामयाब बॉक्सर्स में से एक, लवलीना बोरगोहेन ने शुक्रवार को 75kg कैटेगरी के फ़ाइनल में चीन की ज़ियी बाओ को हराकर एशियाई खेलों में महिलाओं की बॉक्सिंग में भारत के 12 साल के गोल्ड मेडल के इंतजार को खत्म किया और खुद को जन्मदिन का शानदार तोहफा दिया. ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली लवलीना ने बाओ को 5-0 के सर्वसम्मत फ़ैसले से हराया और पिछले एशियाई खेलों में जीते सिल्वर मेडल को गोल्ड में बदल दिया. इस जीत के साथ, लवलीना दिग्गज एमसी मैरी कॉम के बाद एशियाई खेलों में बॉक्सिंग गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बन गईं. मणिपुर की मैरी कॉम ने इंचियोन में 2014 एशियाई खेलों में फ्लाईवेट (51kg) का ख़िताब जीता था.

लवलीना ने अपनी लंबाई का पूरा फायदा उठाया, जबकि बाओ ने लगातार दूरी कम करने और भारतीय बॉक्सर को खेलने के लिए जगह न देने की कोशिश की. इस रणनीति की वजह से मुकाबला उलझा हुआ रहा, जिसमें बाओ बार-बार क्लिनच (प्रतिद्वंद्वी को पकड़ने) का सहारा लेती रहीं. अपनी आम रणनीति से हटकर, लवलीना ने आक्रामक शुरुआत की और तुरंत कुछ पंच मारे, लेकिन बाओ ने भी अपने जवाबी हमलों से कड़ा मुकाबला किया.

चीनी बॉक्सर ने कुछ कॉम्बिनेशन पंच मारे, लेकिन लवलीना ने राउंड के आखिर में कुछ साफ और जोरदार पंच मारकर राउंड 3-2 से अपने नाम किया. पीछे चल रही बाओ दूसरे राउंड में आक्रामक होकर उतरीं और दूरी कम करने की कोशिश की, जबकि लवलीना ने उन्हें दूर रखने और अपने पंच के लिए जगह बनाने की कोशिश की. भारतीय बॉक्सर ने राउंड के आखिर में अपनी रेंज पा ली और कई साफ पंच मारकर जजों के स्कोरकार्ड पर 4-1 से बढ़त बना ली.

आखिरी राउंड में भी यही पैटर्न जारी रहा, जिसमें बाओ ने बहुत सारे पंच मारे लेकिन साफ़ तौर पर कनेक्ट करने में संघर्ष करती रहीं. लवलीना डिफेंस में मजबूत रहीं और जवाबी हमले के लिए सही मौकों का इंतजार करती रहीं. बढ़त बनाने के बाद, लवलीना ने आखिरी पलों में रफ़्तार कम कर दी और बिना वजह उलझने से बचीं, बाओ को दूर रखा और मुक़ाबला अपने नाम किया. 

पिछले टूर्नामेंट में, लवलीना फाइनल में एक और चीनी बॉक्सर, ली कियान से हार गई थीं और उन्हें सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा था. इस बार, उन्होंने पक्का किया कि वैसा नतीजा दोबारा न हो. भारतीय बॉक्सरों ने आइची-नागोया में छह मेडल पक्के करके पिछले टूर्नामेंट के मुकाबले अपना प्रदर्शन बेहतर कर लिया है.

प्रिया घांघस (60kg), कपिल पोखरिया (90kg) और नरेंद्र बेरवाल (+90kg) ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीते, जबकि परवीन हुड्डा (65kg) और अंकुश पंघाल (80kg) आज बाद में गोल्ड मेडल के लिए मुकाबला करेंगे. एशियन गेम्स में भारत का अब तक का सबसे अच्छा बॉक्सिंग प्रदर्शन ग्वांगझू 2010 टूर्नामेंट में रहा था, जब भारतीय दल ने नौ मेडल जीते थे -- दो गोल्ड, तीन सिल्वर और चार ब्रॉन्ज़. महाद्वीपीय इवेंट में यह शानदार प्रदर्शन, पिछले महीने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय बॉक्सरों के रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन के बाद आया है.

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