भारतीय स्क्वैश स्टार अनाहत सिंह ने एशियाई गेम्स 2026 में शानदार परफॉर्मेंस हुए जापान की सातोमी वातानाबे को हराया और महिला सिंगल्स के फाइनल में जगह बनाई, फाइनल में जगह बनाने से अनाहत ने कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है. 18 साल की अनाहत ने 0-2 से पिछड़ने के बाद जबरदस्त वापसी की और एक रोमांचक सेमीफाइनल मुक़ाबले में दुनिया की छठे नंबर की जापानी खिलाड़ी को 3-2 से हराया. दुनिया में 17वें नंबर की भारतीय खिलाड़ी शुरुआती दो गेम करीबी अंतर से हार ग, वातानाबे ने अपने वेरिएशन, पेस में बदलाव और शार्प एंगल का असरदार इस्तेमाल करके अनाहत पर दबाव बनाया और उन्हें 9-11, 11-13 से हराया.
मुश्किल हालात में भी अनाहत ने तीसरे गेम में कमाल का संयम दिखाया, 8-10 से पिछड़ने और दो गेम पॉइंट बचाने के बाद, उन्होंने वापसी करते हुए गेम 12-10 से जीता और मुक़ाबले में अपनी उम्मीदें बनाए रखीं. इसके बाद मैच का रुख़ पूरी तरह अनाहत के पक्ष में हो गया, उन्होंने चौथे गेम में दबदबा बनाया और इसे 11-6 से जीतकर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया, जिससे मैच फ़ैसले वाले गेम तक पहुंच गया.
डिसाइडर में अनाहत ने अपना आक्रामक खेल जारी रखा और वातानाबे को मात देते हुए गेम 11-3 से जीता और एक यादगार वापसी वाली जीत हासिल की. इस जीत के साथ अनाहत महिला सिंगल्स के फ़ाइनल में पहुंच गईं, जहां वह गोल्ड मेडल के लिए मुक़ाबला करेंगी.
पीवी सिंधू से हुईं थीं प्रेरित
2008 में जन्मी अनाहत ऐसे परिवार से हैं जहां खेल उनके खून में है. उनके पिता गुरशरण सिंह और मां तानी वढेरा फील्ड हॉकी खेलते थे, जबकि उनके चाचा टेनिस खेलते थे. अनाहत ने सबसे पहले बैडमिंटन खेलना शुरू किया था, क्योंकि वह कोर्ट पर पीवी सिंधु के शानदार प्रदर्शन से प्रेरित थीं. हालांकि, उन्हें असल में स्क्वॉश में ही अपनी असली जगह मिली.
अनाहत ने शुरुआत में बस ऐसे ही स्क्वॉश खेलना शुरू किया था, लेकिन कुछ टूर्नामेंट के बाद उन्हें यह खेल बहुत पसंद आने लगा और उन्होंने इसे प्रोफेशनल तौर पर खेलने का फैसला किया. सिर्फ़ 14 साल की उम्र में, अनाहत सिंह ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की एथलीट बनकर वैश्वित स्तर पर अपनी पहचान बनाई.
2019 में मिली पहली बड़ी कामयाबी
अनाहत को बड़ी कामयाबी 2019 में मिली थी, तब उन्होंने ब्रिटिश जूनियर ओपन अंडर-11 का खिताब जीता था, साथ ही यूरोपियन, डच और स्कॉटिश जूनियर ओपन के खिताब भी अपने नाम किए थे. 2021 में भी उनका शानदार सफ़र जारी रहा और उन्होंने फ़ाइनल में मिस्र की जायदा मारेई को हराकर US जूनियर ओपन का खिताब जीता. 2022 तक, अनाहत ने अपनी तेज़ी से बढ़ती उपलब्धियों की लिस्ट में एशियन जूनियर चैंपियनशिप अंडर-15 की ट्रॉफी के साथ-साथ जर्मन और डच जूनियर ओपन के खिताब भी शामिल कर लिए.
2025 में, अनाहत को पीएसए अवार्ड्स में यंग प्लेयर ऑफ द ईयर और चैलेंजर प्लेयर ऑफ द ईयर नामित किया गया था. इसके बाद उन्होंने विश्व कप में स्वर्ण पदक, एशियाई चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक और विश्व जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता. जबकि रविवार को खिताब जीतने के बाद उन्होंने मिस्र के 15 साल के प्रभुत्व को समाप्त कर दिया.
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