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नागोया एशियाड 2026 का समापन, अगली मेजबानी के लिए दोहा को सौंपी गई मशाल

आइची-नागोया एशियाई खेल 4 अक्टूबर को भव्य समापन समारोह के साथ खत्म हुए. साल 2030 में होने वाले एशियाई खेलों की मेजबानी दोहा करेगा.

नागोया एशियाड 2026 का समापन, अगली मेजबानी के लिए दोहा को सौंपी गई मशाल
Asian Games 2026 Closing ceremony
IANS

दो सप्ताह से अधिक समय तक चली रोमांचक खेल प्रतिस्पर्धाओं के बाद आइची-नागोया एशियाई खेल रविवार यानी 4 अक्टूबर को भव्य समापन समारोह के साथ खत्म हुए. एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने 19 सितंबर को शुरू हुए इन खेलों के समापन की औपचारिक घोषणा की. साल 2030 में होने वाले एशियाई खेलों की मेजबानी दोहा करेगा. समापन समारोह के दौरान खेलों की मशाल कतर के प्रतिनिधियों को सौंप दी गई.

समापन समारोह में हजारों खिलाड़ी, अधिकारी और दर्शक शामिल हुए. 'वन एशिया' थीम पर आधारित समारोह में भारत की ओर से दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतने वाली निशानेबाज नीरू धांडा ने भारतीय दल की ध्वजवाहक की भूमिका निभाई.

भारत के पदकों की संख्या में बड़ी गिरावट

भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं को आइची-नागोया एशियाई खेलों में एक कड़वी वास्तविकता का सामना करना पड़ा जहां पिछले हांगझोउ खेलों में रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद एक और बड़ी छलांग की उम्मीद थी लेकिन अभियान पदकों की संख्या में बड़ी गिरावट के साथ समाप्त हुआ. भारत ने कुल पदक तालिका में अपना चौथा स्थान बरकरार रखा लेकिन इस बार उसके खाते में 85 पदक ही रह गए जिसमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं. यह पिछले एशियाई खेलों में हासिल किए गए 106 पदकों से 21 कम और स्वर्ण पदकों के मामले में सात कम है.

टॉप-4 देशों में किसने-कितने मेडल जीते

साल 2036 तक टॉप 10 और 2047 तक टॉप पांच खेल राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखने वाले भारत को ये आंकड़े याद दिलाते हैं कि शानदार प्रदर्शन करना एक बात है लेकिन लगातार प्रगति बनाए रखना कहीं अधिक कठिन चुनौती है. टॉप पर चीन का दबदबा कायम रहा. उसने 169 गोल्ड सहित कुल 341 पदक जीते. जापान 83 गोल्ड और कुल 269 पदकों के साथ दूसरे तथा दक्षिण कोरिया 39 गोल्ड और 150 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा.

भारत ने आखिरी दो दिन में बदला खेल

अगर अंतिम दो दिनों में भारत ने 11 स्वर्ण पदकों की शानदार झड़ी नहीं लगाई होती तो शीर्ष पांच में जगह बनाना भी मुश्किल होता. भारत के पदक अभियान में कमी का सबसे बड़ा कारण उसका दो पारंपरिक मजबूत खेलों निशानेबाजी और एथलेटिक्स का अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाना रहा. दोनों खेलों से काफी उम्मीदें थीं लेकिन हांगझोउ की तुलना में भारत को इस बार कम पदक मिले. इससे निरंतरता, दबाव से निपटने और तैयारी में मौजूद कमियां उजागर हुईं.

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(पीटीआई इनपुट के साथ)

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