पंचायतीराज चुनाव के परिणाम आने से पूर्व ही उदयपुर जिला परिषद में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. कुल 47 में से 38 वार्डों में मतदान संपन्न होने के बाद, भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी प्रत्याशियों को रविवार रात ही केवला तालाब स्थित एक निजी रिसॉर्ट में भेज दिया है.
हालांकि, इस बाड़ेबंदी को लेकर पार्टी के भीतर तीव्र अंतर्विरोध उभर आया है. स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं में चर्चा है कि जिला प्रमुख पद के एक प्रभावशाली दावेदार का इस पूरे प्रबंध पर सीधा नियंत्रण है. प्रत्याशियों की निगरानी के लिए उसी दावेदार की निजी सुरक्षा एजेंसी के हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों और बाउंसरों को तैनात किया गया है.
दीपावली पर्व से पहले ही प्रत्याशियों को नजरबंद किए जाने और एक व्यक्ति विशेष का एकाधिकार स्थापित होने से संगठन के कई वरिष्ठ नेता नाराज हैं. सूत्रों के अनुसार, प्रदेश संगठन के एक शीर्ष पदाधिकारी का संरक्षण प्राप्त होने के कारण स्थानीय स्तर पर खुलकर विरोध नहीं हो पा रहा है. इसी के चलते मामले की शिकायत जयपुर प्रदेश मुख्यालय से लेकर दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा दी गई है.
उल्लेखनीय है कि शेष 9 सीटों पर मतदान के बाद 20 नवंबर को मतगणना होगी. इसके पश्चात 25 नवंबर को जिला प्रमुख और 26 नवंबर को उप जिला प्रमुख का निर्वाचन निर्धारित है. नतीजों से करीब पखवाड़े भर पहले शुरू हुई इस बाड़ेबंदी ने संगठन के आंतरिक अनुशासन और गुटबाजी को सार्वजनिक पटल पर ला खड़ा किया है.
यह भी पढ़ें | सेठ ने हर कर्मचारी में बांटा 1 लाख कैश, दिवाली बोनस लेकर रो दिया स्टाफ, कहा- आप जैसा अमीर नहीं देखा
यह भी पढ़ें | राजस्थान पंचायत चुनाव: मंत्री के बेटे की निर्दलीय एंट्री से बढ़ी हलचल, कांग्रेस-बीजेपी के बीच RLP भी मैदान में
यह भी पढ़ें | जोधपुर में नहीं चला अशोक गहलोत का जादू, ओम बिरला के कोटा में कांग्रेस में पड़ी फूट, जयपुर में भी जीती बीजेपी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं