शिक्षा विभाग में तबादला परिवेदनाओं के निस्तारण को लेकर जारी दो आदेशों पर सवाल खड़े हो गए हैं. माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 13 अगस्त को जारी किए गए दोनों आदेशों में शिक्षकों को 12 अगस्त तक अनिवार्य रूप से कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं. आदेश में तारीखों के इस विरोधाभास से संबंधित शिक्षक असमंजस में हैं. कई प्रभावित शिक्षकों ने मामले को लेकर कोर्ट का रुख किया है.
13 अगस्त को आया आदेश
मामले के अनुसार, व्याख्याता (हिन्दी) के परिवेदना निस्तारण एवं स्थानांतरण से संबंधित आदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार के डिजिटल हस्ताक्षर से 13 अगस्त को दोपहर 12:47 बजे जारी हुआ. आदेश के बिंदु संख्या चार में संबंधित कार्मिकों को 12 अगस्त 2026 तक अनिवार्य रूप से कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं. शिक्षकों का सवाल है कि जब आदेश 13 अगस्त को जारी हुआ, तो उससे एक दिन पहले 12 अगस्त तक कार्यग्रहण करना कैसे संभव है.
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दो आदेश, दोनों में एक जैसी गफलत
शिक्षा विभाग की ओर से जारी दो अलग-अलग आदेशों में कुल 162 व्याख्याताओं के तबादले किए गए हैं. पहले आदेश में 124 व्याख्याताओं के स्थानांतरण हैं, जिसे 13 अगस्त को दोपहर 12:47 बजे जारी किया गया. दूसरे आदेश में 38 व्याख्याताओं के तबादले किए गए, और यह आदेश 13 अगस्त को शाम 4:39 बजे जारी हुआ. खास बात यह है कि दोनों आदेशों में ही शिक्षकों को 12 अगस्त तक कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं.
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस आदेश में हुई इस गफलत के बाद तबादलों में बैकडोर से स्थानांतरण किए जाने का आरोप लगा रही है. इससे पहले भी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर दुर्भावना से ट्रांसफरों में पक्षपात का आरोप लगा चुके हैं.
शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
शिक्षक संगठनों ने आदेश पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों को आदेश जारी करने से पहले उसकी तारीख और अन्य बिंदुओं की अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी है. फिलहाल इन आदेशों में हुई गलती के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
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