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रेपिस्ट को रोज 2 घंटे पढ़ाई, बुजुर्गों की सेवा और 3 घंटे पौधरोपण करना पड़ेगा, कोर्ट ने सुनाया फैसला

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में किशोर को 20 साल की सजा और 6 हजार रुपये जुर्माना लगाया. सजा के साथ सामाजिक और शैक्षणिक कार्य भी करना होगा. 

रेपिस्ट को रोज 2 घंटे पढ़ाई, बुजुर्गों की सेवा और 3 घंटे पौधरोपण करना पड़ेगा,  कोर्ट ने सुनाया फैसला
कोर्ट ने रेप के दोषी को 20 साल की सजा सुनाया.
फाइल फोटो

कोटा में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के करीब 2 साल पुराने मामले में पॉक्सो क्रम संख्या-2 न्यायालय ने बुधवार को फैसला सुनाया. अदालत ने आरोपी किशोर को 20 साल के कठोर कारावास और 6 हजार रुपए जुर्माना लगाया. आरोपी की उम्र घटना के समय 16 साल से अधिक थी, जिसके चलते किशोर न्यायालय ने मामले को वयस्क की तरह सुनवाई के लिए पॉक्सो कोर्ट भेजा था. 

दो साल बाद आया फैसला 

विशिष्ट लोक अभियोजक वीरेंद्र सिंह भाणावत ने बताया कि 24 सितंबर 2024 को शहर के एक पुलिस थाना क्षेत्र में रहने वाली नाबालिग बालिका को उसका नाबालिग दोस्त बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था. आरोपी ने बालिका के साथ तीन से चार दिन तक दुष्कर्म किया. बालिका की ओर से 25 सितंबर को मामला दर्ज कराया गया था.  पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को निरुद्ध कर किशोर सुधार गृह भेज दिया था.

वयस्क की तरह चला ट्रायल

मामले की शुरुआत में किशोर न्यायालय में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई चल रही थी. घटना के समय आरोपी की उम्र 17 साल से कम थी. हालांकि, किशोर न्यायालय ने उसकी उम्र 16 साल से अधिक होने के कारण मामले को वयस्क की तरह सुनवाई के लिए पॉक्सो क्रम संख्या-2 न्यायालय भेज दिया. पॉक्सो कोर्ट में 5 फरवरी 2025 से मामले की सुनवाई चल रही थी. बुधवार को न्यायाधीश पवन अग्रवाल ने आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. 

21 साल की उम्र तक सुधार गृह में रहेगा

विशिष्ट लोक अभियोजक के अनुसार, वर्तमान में आरोपी की उम्र 18 साल 19 दिन है.  उसे 21 साल की उम्र तक किशोर सुधार गृह में रखा जाएगा.  इसके बाद उसे केंद्रीय कारागार भेजा जाएगा. अदालत ने आरोपी के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए सजा के साथ विभिन्न गतिविधियों में शामिल करने के निर्देश भी दिए हैं.

बुजुर्गों की सेवा करनी होगी 

रोज 2 घंटे किसी तकनीकी या शैक्षणिक संस्थान में परामर्श और कौशल विकास से जुड़ा कार्य करना होगा. रोज 2 घंटे उपवन संरक्षक या इसी स्तर के कार्यालय में पौधारोपण अथवा अन्य कार्य करने होंगे. रोज 1 घंटा किसी आश्रय स्थल या अपने घर में सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बुजुर्गों या मानसिक रूप से कमजोर लोगों की सेवा करनी होगी. अदालत के निर्देश के अनुसार ये गतिविधियां आरोपी को 21 साल की उम्र तक करनी होंगी. 

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