अलवर शहर की सबसे पॉश कॉलोनियों में शुमार शांतिकुंज इन दिनों दहशत के साये में है. नाम भले ही शांतिकुंज हो, लेकिन एक मकान में कैद हुए CCTV फुटेज ने पूरी कॉलोनी की शांति छीन ली है. अलवर-दिल्ली रेलवे ट्रैक से सटी इस कॉलोनी में 22 जुलाई की मध्य रात्रि करीब 2 बजे आधा दर्जन संदिग्धों की गतिविधियां कैमरे में कैद हुई हैं. इनकी चाल-ढाल, पहनावा और मूवमेंट ने करीब 25 साल पहले आतंक मचाने वाले कच्छा-बनियान धारी गैंग, जिसे पुलिस रिकॉर्ड में पारदी गैंग के नाम से जाना जाता है, उसकी याद ताजा कर दी है.
एक घंटे तक कॉलोनी में घूमते रहे
स्थानीय लोगों का दावा है कि संदिग्ध करीब एक घंटे तक कॉलोनी में घूमते रहे, कई मकानों की रेकी की और वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे. हालांकि, एक महिला की सतर्कता से उनकी योजना विफल हो गई, और वे अंधेरे का फायदा उठाकर रेलवे ट्रैक पार कर फरार हो गए.
सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध लोग
22 जुलाई की रात करीब 2 बजे एक मकान की महिला पानी पीने के लिए उठी. इसी दौरान उसे बाहर कुछ लोगों की आहट सुनाई दी. पहले तो उसने इसे सामान्य समझा, लेकिन लौटते समय उसने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी. परिजनों ने तुरंत CCTV कैमरे खंगाले तो स्क्रीन पर आधा दर्जन संदिग्ध कॉलोनी में घूमते दिखाई दिए. घरों में ताक-झांक करते साफ दिखे. इसके बाद परिवार ने शोर मचाया तो आसपास के लोग बाहर निकल आए.
मकानों के बाहर से कुंडी लगा दी थी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गैंग एक मकान में घुसने की तैयारी कर चुका था. वारदात से पहले उन्होंने आसपास के मकानों की बाहर से कुंडी लगा दी थी, जिससे कोई बाहर न निकल सके. जाग हो जाने से उनकी योजना नाकाम हो गई. बाद में पड़ोसियों ने बाहर से लगी कुंडियां खोली.
कम कपड़े और चेहरे लगा रखे थे मास्क
जिन लोगों के घर में लगे सीसीटीवी में ये गैंग हुए, उनका कहना है कि संदिग्धों की बॉडी लैंग्वेज देखकर ऐसा लग रहा था कि उन्होंने अपने कपड़ों में हथियार छिपा रखे थे. सभी ने शरीर पर कम कपड़े, चेहरे पर मास्क और ऐसा पहनावा था, जिससे पहचान करना मुश्किल हो. लोगों का मानना है कि पकड़े जाने या विरोध होने पर वे हथियारों का इस्तेमाल भी कर सकते थे.
घने जंगलों में गायब हो जाते हैं
शांतिकुंज कॉलोनी अलवर-दिल्ली रेलवे लाइन के बिल्कुल पास स्थित है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराधी वारदात के बाद आसानी से रेलवे ट्रैक पार कर दूसरी ओर के घने जंगलों में गायब हो जाते हैं. यही वजह है कि उनका पीछा करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
कॉलोनीवासियों का दावा है कि यह गैंग एक ही रात नहीं, बल्कि लगातार 2 दिनों तक इलाके की रेकी करती रही. रात में अलग-अलग गलियों में घूमकर मकानों का जायजा लिया गया, इससे स्पष्ट है कि वारदात सुनियोजित तरीके से की जानी थी.
3 महीनों में 3 बार चोरी का प्रयास
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले 3 महीनों में कॉलोनी में 3 बार चोरी और चोरी के प्रयास की घटनाएं हो चुकी हैं. कई मकानों की जालियां तोड़ी गईं. एक कर्नल के मकान को निशाना बनाया गया, जबकि एक ई-मित्र संचालक के यहां भी अपराध हुआ. लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में भय का माहौल है.
पुलिस की गश्ती पर उठाए सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संदिग्ध करीब एक घंटे तक पॉश कॉलोनी में घूमते रहे, तो पुलिस की गश्त कहां थी? लोगों का कहना है कि कॉलोनी में निजी गार्ड तैनात हैं, लेकिन अकेला गार्ड ऐसे गैंग का सामना नहीं कर सकता. यदि प्रभावी गश्त होती तो इतने लंबे समय तक संदिग्ध खुलेआम नहीं घूम पाते. क्या दूसरे राज्य की गैंग है?
स्थानीय लोगों का मानना है कि संदिग्धों की भाषा, चाल-ढाल और काम करने का तरीका अलवर का नहीं लगता. आशंका जताई जा रही है कि यह किसी दूसरे राज्य से आने वाली संगठित गैंग हो सकती है, जो रेकी कर योजनाबद्ध तरीके से वारदात करती है.
CCTV वायरल होने पर पुलिस एक्टिव
घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस की चिंता भी बढ़ा दी है. लोगों का कहना है कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की गश्त में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन वे लगातार और प्रभावी गश्त की मांग कर रहे हैं.
गश्त बढ़ाई, कई टीमें तैनात
अलवर शहर के डीएसपी अंगद शर्मा ने बताया कि रात के समय संदिग्ध लोगों के कुछ वीडियो सामने आए हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये लोग पहले रेकी करते हैं, फिर वारदात को अंजाम देते हैं. विशेष रूप से रेलवे ट्रैक के आसपास स्थित पॉश कॉलोनियां इनके निशाने पर रहती हैं. उन्होंने बताया कि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है.पैदल, बाइक और जीप से अलग-अलग टीमें इलाके में लगातार निगरानी कर रही हैं. मेले के दौरान भी इस तरह का गैंग सक्रिय हो जाता है.
डीएसपी ने बताया कि कई बार ऐसे लोग गुब्बारे बेचने वाले, कबाड़ी या फेरी वाले बनकर भी कॉलोनियों में रेकी करते हैं. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति, अपरिचित भाषा बोलने वाला या बिना कारण कॉलोनियों में घूमता दिखाई दे तो तत्काल पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना दें.
अब सबसे बड़ा सवाल
शहर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली कॉलोनी में यदि आधा दर्जन संदिग्ध एक घंटे तक बेखौफ घूम सकते हैं, मकानों की रेकी कर सकते हैं, और वारदात की तैयारी कर सकते हैं, तो यह सिर्फ शांतिकुंज ही नहीं बल्कि पूरे अलवर शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है. फिलहाल पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है, लेकिन कॉलोनीवासी चाहते हैं कि इस गैंग को जल्द गिरफ्तार कर शहर में सुरक्षा का भरोसा दोबारा कायम किया जाए.
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