राजस्थान का झालावाड़ जिला वर्षों से अपनी बेहतरीन संतरा उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखता है, लेकिन अब यह जिला एक और कृषि उत्पाद के कारण तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है. झालावाड़ की उपजाऊ काली मिट्टी, भरपूर जल संसाधन और किसानों की आधुनिक खेती ने यहां के धान को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा दिया है. खासतौर पर बासमती धान की बढ़ती विदेशी मांग ने जिले के किसानों के लिए आय के नए रास्ते खोल दिए हैं.
बड़े पैमाने पर होती है धान की खेती
झालावाड़ में हर साल बड़े क्षेत्रफल में धान की खेती की जाती है. अच्छी बारिश, अनुकूल जलवायु और पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के कारण यहां धान की उत्कृष्ट गुणवत्ता प्राप्त होती है. पिछले कुछ सालों में किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती को अपनाया है, जिससे उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है.
बढ़ा बासमती का रकबा
भवानीमंडी, खानपुर, अकलेरा, झालरापाटन और आसपास के सिंचित क्षेत्रों में बासमती धान की खेती लगातार बढ़ रही है. इन क्षेत्रों में नहरों, तालाबों और भूजल आधारित सिंचाई की उपलब्धता किसानों को धान जैसी अधिक पानी वाली फसल उगाने में मदद करती है. बेहतर उत्पादन और निर्यात की संभावनाओं को देखते हुए अब कई किसान पारंपरिक फसलों की जगह बासमती धान को प्राथमिकता देने लगे हैं.
इन किस्मों की हो रही खेती
झालावाड़ में बासमती और गैर-बासमती दोनों प्रकार की धान की खेती की जाती है. प्रमुख किस्मों में पूसा बासमती-1121, पूसा बासमती-1509, पूसा बासमती-1718, सुगंधा तथा विभिन्न हाइब्रिड धान की किस्में शामिल हैं. इनमें पूसा बासमती-1121 लंबे दाने और बेहतरीन खुशबू के कारण सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली किस्म मानी जाती है, जबकि पूसा बासमती-1509 जल्दी तैयार होने और अच्छी पैदावार के कारण किसानों की पसंद बनी हुई है. पूसा बासमती-1718 रोग प्रतिरोधक क्षमता और उच्च गुणवत्ता के लिए जानी जाती है.
स्थानीय मंडियों से विदेशी बाजारों तक
झालावाड़ में तैयार धान सबसे पहले स्थानीय कृषि उपज मंडियों में पहुंचता है. यहां से राइस मिलों और बड़े व्यापारिक केंद्रों के माध्यम से इसकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की जाती है. इसके बाद तैयार चावल देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरान, इराक, यूरोप, अफ्रीका और अन्य एशियाई देशों तक निर्यात किया जाता है. भारतीय बासमती चावल की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका लाभ झालावाड़ के किसानों को भी मिलने लगा है.
किसानों को मिला बेहतर भाव
विदेशों में बासमती और प्रीमियम चावल की मांग बढ़ने का सीधा असर मंडियों में दिखाई दिया है. साल 2025 की तुलना में वर्ष 2026 की शुरुआत में बासमती धान के औसत भाव लगभग ₹2,839 प्रति क्विंटल से बढ़कर ₹3,360 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए. यानी किसानों को करीब ₹500 से ₹550 प्रति क्विंटल अधिक कीमत मिलने लगी. अच्छी गुणवत्ता वाली एक्सपोर्ट ग्रेड बासमती धान को कई मंडियों में ₹3,500 से ₹4,000 प्रति क्विंटल तक के भाव भी मिले.
आधुनिक खेती कर रहे किसान
निर्यातकों और राइस मिलों के बीच खरीद बढ़ने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिला है. बेहतर गुणवत्ता वाली फसल उगाने वाले किसानों को पहले की तुलना में अधिक दाम मिलने लगे हैं. इसके चलते जिले में बासमती धान का रकबा भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है और किसान आधुनिक खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बन सकती है पहचान
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि झालावाड़ जिले में पानी प्रचुर मात्रा में है यदि गुणवत्ता, ब्रांडिंग और निर्यात पर विशेष ध्यान दिया जाए तो आने वाले वर्षों में झालावाड़ का धान भी संतरे की तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान बना सकता है. इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी.
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