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6 बार जेल जाकर सीखा पुल‍िस का बर्ताव, बाहर आया तो फर्जी अध‍िकारी बन अपराध‍ियों से करने लगा वसूली

खुद को कभी इंजीनियर, कभी नर्सिंग ऑफिसर, कभी यूनिवर्सिटी से जुड़ा व्यक्ति और कभी पुलिसकर्मी बताकर लोगों से ठगी करता था. 

6 बार जेल जाकर सीखा पुल‍िस का बर्ताव, बाहर आया तो फर्जी अध‍िकारी बन अपराध‍ियों से करने लगा वसूली
लोगों से वसूली करने वाला फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार.
NDTV Reporter

फर्जी पुल‍िस अध‍िकारी बनकर लोगों से वसूली करने वाले को पुल‍िस ने ग‍िरफ्तार कर ल‍िया. आरोपी अलग–अलग पहचान बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था, और उनके काम करवाने के नाम पर रकम वसूलता था. पुलिस के अनुसार, जयपुर के ब्रह्मपुरी निवासी अरुण शर्मा के कई नाम और पहचान हैं.  अरुण शर्मा उर्फ आलू उर्फ दातार सिंह स्पेशल वाला उर्फ सुनील शर्मा उर्फ इंजीनियर सुनील मीणा उर्फ विजय शर्मा अलग–अलग नामों से लोगों से संपर्क करता और खुद को प्रभावशाली पद पर बता कर उनसे पैसे ऐंठता था. वह सीएसटी का दातार सिंह बनकर शहर के सटोरियों और अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों से बंधी वसूलता था. कोर्ट ने उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया.  

बैंक खातों की चल रही जांच 

पुलिस उसके बैंक खातों, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है. शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम अपने खाते में लेने के बजाय पत्नी मोनिका शर्मा के बैंक खाते में मंगवाता था. पुलिस खाते के लेन–देन और अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है. आरोपी की गिरफ्तारी में थाना स्पेशल के ओम डोबर, कानसिंह और दामोदर सारण की अहम भूमिका रही. थानाधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि अरुण को अलग–अलग थानों की पुलिस अब तक 6 बार गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. 

पुलिस की तरह व्यवहार करने लगा   

जेल में रहकर आरोपी ने पुलिस की कार्यप्रणाली, अधिकारियों के बात करने के तरीके और कार्रवाई की प्रक्रिया को करीब से समझ लिया. बाहर आने के बाद उसने इन्हीं तौर–तरीकों की नकल कर पुलिसकर्मी की तरह व्यवहार करना शुरू किया और खुद को सीएसटी, डीएसटी/स्पेशल स्टाफ का सदस्य बताकर लोगों को धमकाने लगा. 

गलत काम करने वालों से वसूली 

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जो सट्टे या अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल थे. वह खुद को सीएसटी या डीएसटी का पुलिसकर्मी बताकर कार्रवाई और जेल भेजने की धमकी देता, मामला दर्ज कराने की बात कहकर उन्हें डरा–धमकाकर रकम वसूलता था. अवैध गतिविधियों में शामिल होने के कारण पीड़ित लोग बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से भी बचते रहे. 

दो दर्जन से अधिक वारदात कबूल की

जांच के दौरान आरोपी ने जयपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्र में दो दर्जन से ज्यादा वारदात कबूल की हैं, इनमें पुलिस ने 21 जुलाई को ललित गहलोत की शिकायत पर दर्ज केस में 2.50 लाख और 1.50 लाख की ठगी, पुलिसकर्मी बनकर 1.21 लाख, GST स्टाफ बनकर 90 हजार और आरटीयू में नंबर बढ़ाने के नाम पर 62 हजार और 34 हजार रुपये की ठगी का खुलासा किया है. इन मामलों में मुहाना थाने में केस दर्ज किया गया है. 

छात्रों को नौकरी दिलाने का झांसा देता  

पुलिस के अनुसार, आरोपी सिर्फ फर्जी पुलिसकर्मी बनकर ही नहीं, बल्कि खुद को आरटीयू का प्रोफेसर, नर्सिंग ऑफिसर और इंजीनियर बताकर भी लोगों से ठगी करता था. वह फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर छात्रों से संपर्क करता और उन्हें नौकरी लगाने तथा आरटीयू में नंबर बढ़वाने का झांसा देकर रकम लेता था. सोशल मीडिया पर बनाए गए इन फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल वह लगातार ठगी की वारदातों में कर रहा था. 

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