आज के दौर में जहां जमीन, पैसे और छोटी-छोटी बातों को लेकर सगे भाइयों में विवाद और बंटवारा आम बात हो गई है, वहीं भरतपुर के हलैना से करीब 4 किमी दूर गांव रमासपुर में मुरारी चौधरी का परिवार आज भी संयुक्त परिवार की सबसे बड़ी मिसाल बना हुआ है. पांच भाई उनकी पत्नी और बच्चे सहित परिवार में 55 लोग एक साथ रहते हैं. एक ही चूल्हे में इनका खाना बनता है.
पांचों बहन देवरानी-जेठानी
इस परिवार की सबसे खास बात ये है कि 5 सगे भाई, जो पांच सगी बहनों के पति हैं. करौली जिले के एक ही गांव की पांच सगी बहनें, रमासपुर के पांच सगे भाइयों की जीवन संगिनी हैं. मतलब पांचों भाइयों की शादी भी एक ही घर में हुआ है. सभी एक दूसरे के साथ मिलजुलकर रहते हैं.
एक ही चूल्हे पर बनता है खाना
परिवार के मुखिया मुरारी चौधरी बताते हैं कि उनके पिता के 5 बेटे और एक बेटी है. पांचों भाई आज भी एक ही छत के नीचे, एक ही चूल्हे पर बने खाने को साथ खाते हैं. पूरे परिवार में कुल 55 सदस्य हैं. सबसे बड़ी बात, परिवार में किसी भी तरह का घमंड हीं है.
सरकार की तरह बांटे हैं काम
सबसे बड़े भाई की पत्नी ग्राम पंचायत गोविंदपुरा की सरपंच हैं, लेकिन पद का जरा भी घमंड नहीं. वे खुद कृषि और पशुपालन का काम देखती हैं. बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के दौर में इस परिवार ने सरकार की तरह काम बांट रखे हैं. किसी के पास वित्त विभाग, तो किसी के पास शिक्षा, कृषि और पशुपालन की जिम्मेदरी है.
ये परिवार आज के समाज के लिए एक आईना है, जहां लोग एकल परिवार में भी खुश नहीं हैं, वहीं 55 लोगों का ये परिवार प्रेम और एकता से रहकर यह साबित कर रहा है कि अगर मन में प्रेम हो तो आज भी कलियुग में सतयुग लाया जा सकता है.
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