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2 करोड़ की रिश्वत लेते पकड़ा गया दलाल, SOG के ASP पर भी ACB का शिकंजा- उदयपुर जमीन घोटाले से कनेक्शन

राजस्थान ACB ने उदयपुर में 2 करोड़ की रिश्वत लेते बिचौलिए सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि यह रकम SOG के ASP मुकेश सोनी के लिए 272 भूखंड घोटाले में कार्रवाई रोकने के बदले ली जा रही थी.

2 करोड़ की रिश्वत लेते पकड़ा गया दलाल, SOG के ASP पर भी ACB का शिकंजा- उदयपुर जमीन घोटाले से कनेक्शन
उदयपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई (Photo: NDTV)
उदयपुर:

राजस्थान के उदयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी की टीम ने शनिवार को एक बिचौलिए सज्जन सिंह को दो करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया. एसीबी ने इस मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी उदयपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी को भी हिरासत में लिया है. एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने शनिवार देर रात जारी एक बयान में बताया कि आरोपी बिचौलिए की पहचान सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला के रूप में हुई है. उन्होंने बताया कि आरोपी सज्जन सिंह एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी के लिए यह रिश्वत राशि ले रहा था.

आरोपी दलाल सज्जन सिंह जैन ने उदयपुर के चर्चित 272 भूखंड घोटाला मामले में कार्रवाई नहीं किए जाने के बदले रिश्वत राशि मांगी गई थी. मामला सामने आते ही एएसपी मुकेश सोनी को बालोतरा स्थित उनके निवास स्थान से डिटेन किया गया.

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता ने बताया था कि उदयपुर नगर निगम के 272 भूखण्ड के बहुचर्चित मामले में पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों को दर्ज मुकदमों में राहत दिलाने और अन्य मामलों में आरोपी नहीं बनाने के बदले में दो करोड़ रुपये रिश्वत राशि की मांगी जा रही हैं. 

शिकायत में कहा गया कि रिश्वत राशि सज्जन सिंह दलाल के जरिए एएसपी मुकेशकुमार सोनी द्वारा की जा रही थी. एसीबी ने मामले को वेरिफाई किया और उसके बाद आरोपी सज्जनसिंह जैन उर्फ टाटला को दो करोड़ रुपये रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया. 

वहीं, मुकेश कुमार सोनी की भूमिका संदिग्ध होने से उनके निवास स्थान जिला बालोतरा से डिटेन किया गया. कार्रवाई एसीबी उदयपुर एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ के सुपरविजन में डीएसपी सोनू शेखावत द्वारा की गई.

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क्या है उदयपुर का जमीन घोटाला?

अर्बन इंप्रूवमें ट्रस्ट (उदयपुर विकास प्राधिकरण) से साल 2012 में नगर निगम को कुछ कॉलोनियां ट्रांसफर की गई थीं. इसमें ऐसे कई भूखंड शामिल थे, जो जो खाली पड़े थे. इसमें कई प्लॉट कॉर्नर के बेशकीमती प्लॉट थे. इन जमीनों पर लोगों ने कब्जा कर लिया. इसके बाद अधिकारियों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज बनाकर भूखण्डों के नामांतरण खुलवा लिए. यहीं नहीं कुछ लोगों ने बेच भी दिया. 

इसके बाद, सबसे पहले उदयपुर कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे को उठाया. उस वक्त 48 भूखंडों के पट्टों को निरस्त भी किया गया. फिर उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने भी इस मुद्दे को उठाया. विधानसभा में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई. अप्रैल 2022 से एसओजी इस मामले में जांच कर रही हैं.

पिछले महीने अगस्त में एसओजी ने इस मामले में पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उसके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया था. एसओजी इस मामले में अब तक 6 लोगों को गिरफ्तारी कर चुकी हैं.

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