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गौमाता 'राधा मैया' के लिए अब बनवा रहे आलीशान महल; गाय के कान में परेशानी बताते ही हो जाती है दूर

नरेंद्र कुमार भावुक होकर बताते हैं कि 'राधा मैया' के चार बछड़े हुए. उनका कहना है कि जब भी जीवन में कोई परेशानी आती है, वे 'राधा मैया' के कान में अपनी बात कह देते हैं, उससे छुटकारा म‍िल जाता है. 

गौमाता 'राधा मैया' के लिए अब बनवा रहे आलीशान महल; गाय के कान में परेशानी बताते ही हो जाती है दूर
गाय को राधा मैया के नाम से बुलाते हैं.
NDTV Reporter

राजस्थान के जालौर जिले के रानीवाड़ा क्षेत्र के धानोल गांव में एक ऐसा घर है, जहां गौमाता सिर्फ पशु नहीं, बल्कि परिवार की सबसे सम्मानित सदस्य हैं. यहां रहने वाले नरेंद्र कुमार ने गौसेवा को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया. वर्षों पहले गोधाम पथमेड़ा से घर लाई गई 'राधा मैया' आज भी उनके परिवार के जीवन का केंद्र हैं. 

माता-पिता की प्रेरणा से गौसेवा

नरेंद्र कुमार बताते हैं कि उनके माता-पिता ने बचपन से ही गौसेवा के संस्कार दिए. इसी प्रेरणा से उन्होंने गोधाम पथमेड़ा से 'राधा मैया' को अपने घर लाकर परिवार का सदस्य बना लिया. सुबह-शाम पूजा, आरती और सेवा उनके परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन गई. उनका कहना है कि राधा मैया को कभी पशु नहीं माना गया, बल्कि घर की मां की तरह सम्मान दिया गया. परिवार के हर सुख-दुख में सबसे पहले 'राधा मैया' के दर्शन किए जाते हैं. 

सेवा के साथ बदली किस्मत

नरेंद्र कुमार का मानना है कि गौसेवा ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए. उन्होंने बताया कि 'राधा मैया' की सेवा करते-करते उन्हें व्यापार में सफलता मिली. मुंबई में एक बड़ी निजी कंपनी स्थापित हुई, और उनके सभी भाइयों का कारोबार भी आगे बढ़ा. वे इस सफलता का श्रेय अपनी मेहनत के साथ-साथ गौमाता के आशीर्वाद को भी देते हैं. यह उनका व्यक्तिगत विश्वास है. 

राधा मैया के लिए राधा महल बन रहा है.

राधा मैया के लिए राधा महल बन रहा है. NDTV 

'राधा महल' गौमाता के लिए विशेष आवास

जब परिवार ने अपना नया और भव्य मकान बनाया तो नरेंद्र कुमार के मन में एक विचार आया कि जिस गौमाता को उन्होंने परिवार का सदस्य माना है, उनके लिए भी सम्मानजनक और सुविधाजनक आवास होना चाहिए. इसी सोच के साथ उन्होंने 'राधा महल' का निर्माण शुरू कराया. अब यह महल लगभग तैयार है. 

राधा महल में गौमाता के लिए विशेष व्यवस्थाएं

  • विशाल और साफ-सुथरा आवास
  • एयर कूलिंग/एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था 
  • पंखे और बेहतर वेंटिलेशन
  • भजन एवं आध्यात्मिक वातावरण
  • चारे और देखभाल की विशेष व्यवस्था
  • संत-महात्माओं के लिए अलग पूजा कक्ष
  • दर्शनार्थियों के बैठने और भोजन की अलग व्यवस्था

नरेंद्र कुमार का कहना है कि जो भी श्रद्धालु 'राधा मैया' के दर्शन करने आए, उसे भी सम्मानपूर्वक बैठने और प्रसाद ग्रहण करने की सुविधा मिले, इसी उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है. 

मां-बेटे जैसा अटूट रिश्ता

परिवार के लोगों का कहना है कि नरेंद्र कुमार और 'राधा मैया' का रिश्ता किसी पशुपालक और गाय का नहीं, बल्कि मां और बेटे जैसा था. यही कारण है कि 'राधा मैया' के सम्मान में बनाया जा रहा 'राधा महल' केवल एक गौशाला नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और समर्पण का प्रतीक है. 

राधा महन बनने के बाद इस तरह से दिखाई देगा. (NDTV)

राधा महल बनने के बाद इस तरह से दिखाई देगा. (NDTV)

समाज के लिए प्रेरणा

ऐसे समय में जब गौसेवा की चर्चा अक्सर केवल नारों तक सीमित रह जाती है, धानोल गांव में नरेंद्र कुमार का यह प्रयास सेवा, संवेदना और समर्पण का एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करता है.  उनका मानना है कि यदि हर परिवार एक गौमाता की जिम्मेदारी उठाए और उसकी सेवा करे, तो यह भारतीय संस्कृति और पशु संरक्षण दोनों के लिए सकारात्मक कदम होगा. 

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