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केमिस्ट्री की क्लासरूम से बीजेपी के वॉर रूम तक: अमित मालवीय की जगह लेने वाले कौन हैं दीपक म्हस्के?

अमित मालवीय साल 2015 से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल के प्रमुख (राष्ट्रीय संयोजक) रहे हैं. लेकिन बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने नई टीम में उन्हें पद से मुक्त कर दिया है.

केमिस्ट्री की क्लासरूम से बीजेपी के वॉर रूम तक: अमित मालवीय की जगह लेने वाले कौन हैं दीपक म्हस्के?
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ नए बीजेपी आईटी सेल चीफ दीपक महस्के.
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  • भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी नई टीम में आईटी सेल का नेतृत्व दीपक महस्के को सौंपा है.
  • अमित मालवीय ने लगभग ग्यारह साल तक बीजेपी आईटी सेल के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर काम किया है.
  • दीपक महस्के छत्तीसगढ़ के बीजेपी नेता हैं.

भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया नेटवर्क और डिजिटल मैसेजिंग मशीन को लेकर एक बहुत बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है. पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से बीजेपी के ऑनलाइन मैसेज, नैरेटिव और तीखे राजनीतिक हमलों की कमान संभालने वाले अमित मालवीय की जगह अब दीपक म्हस्के को पार्टी का नया राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में छत्तीसगढ़ के इस नेता की एंट्री ऐसे समय में हुई है, जब देश की राजनीति और सोशल मीडिया एक-दूसरे में पूरी तरह से रच-बस चुके हैं.

अमित मालवीय जहां हर दिन सोशल मीडिया पर राजनीतिक वार-पलटवार और तीखी बयानबाजी के लिए जाने जाते थे, वहीं दीपक म्हस्के की पहचान बीजेपी के भीतर डेटा एनालिसिस, वोटर ट्रेंड्स और पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाने वाले लीडर के रूप में रही है. 

बीजेपी नेताओं का मानना है कि म्हस्के ने टीवी डिबेट्स या सोशल मीडिया की सुर्खियों से दूर रहकर डेटा एनालिटिक्स और कैंपेन मैनेजमेंट की बारीकियों पर काम करके अपनी यह खास जगह बनाई है.

प्रोफेसर से लेकर ऑर्गेनिक फार्मिंग तक का सफर

दीपक म्हस्के मूल रूप से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से ताल्लुक रखते हैं और बीजेपी के वरिष्ठ नेतृत्व के करीब माने जाते हैं. उनका करियर काफी अनोखा और दिलचस्प रहा है. उनके पास केमिस्ट्री में मास्टर डिग्री (M.Sc), सीमेंट टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का प्रशिक्षण है. राजनीति में फुल टाइम आने से पहले वह कॉलेज स्तर पर केमिस्ट्री पढ़ाया करते थे.

इसके बाद उनकी दिलचस्पी बागवानी, ऑर्गेनिक फार्मिंग और कृषि से जुड़ी गतिविधियों में बढ़ी, जिसमें उन्होंने करीब तीन दशकों तक काम किया.

2009 से संभाल रहे बीजेपी का टेक और डेटा नेटवर्क

बीजेपी के आईटी और सोशल मीडिया तंत्र में उनकी भूमिका आज की नहीं है, बल्कि वह साल 2009 से ही इससे जुड़े हुए हैं. इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख और प्रवक्ता के रूप में जिम्मेदारी निभाई है. साथ ही उन्होंने कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में चुनावी रणनीति और डेटा आधारित प्रचार को धार देने का काम किया.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने ऐसे बेनिफिशियरी डेटाबेस और डेटा-आधारित आउटरीच मॉडल तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है, जो आज के समय में बीजेपी के आधुनिक चुनाव अभियानों की रीढ़ बन चुके हैं.

प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव

पार्टी संगठन के अलावा दीपक म्हस्के को प्रशासनिक काम-काज का भी अच्छा-खासा अनुभव है. वर्तमान में वह राज्य मंत्री के दर्जे के साथ छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इसके अलावा वह इससे पहले इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

आक्रामक हमलों से ज्यादा डेटा और लॉजिक पर जोर

दीपक म्हस्के की इस नई जिम्मेदारी को पार्टी के भीतर सोशल मीडिया रणनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी ने अब आक्रामक तीखे हमलों के बजाय संगठन और डेटा-संचालित सोशल मीडिया मॉडल पर फोकस करने का संकेत दिया है. 

सीधे शब्दों में कहें तो पार्टी ने इस पद पर किसी आक्रामक योद्धा के बजाय एक शांत रणनीतिकार को बिठाया है. पद संभालने के तुरंत बाद दीपक म्हस्के ने साफ कर दिया कि उनकी सबसे पहली प्राथमिकताओं में फर्जी खबरों और भ्रामक जानकारी से निपटना शामिल है.

रायपुर में अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिकताएं पूरी तरह स्पष्ट हैं. हमारा लक्ष्य जनता की सेवा के लिए चुनाव जीतना है और पूरी टीम सोशल मीडिया के माध्यम से इसके लिए पूरे मन से काम करेगी."

उन्होंने आगे कहा कि 'दुष्प्रचार' या प्रोपेगैंडा से भले ही कुछ देर के लिए भ्रम फैलाया जा सके, लेकिन लगातार संवाद और तर्कपूर्ण जवाबों के जरिए ही लोगों के मन से गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है.

नितिन नवीन की अगुवाई में बीजेपी के इस संगठनात्मक पुनर्गठन को एक मील का पत्थर माना जा रहा है. यह फैसला संकेत देता है कि आने वाले समय में बीजेपी सोशल मीडिया पर केवल तीखी बयानबाजी या शोर-शराबे के बजाय डेटा, मजबूत संगठन और तार्किक संचार को प्राथमिकता देगी. अब देखना यह होगा कि दीपक म्हस्के पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बनाने वाले मास्टरमाइंड बने रहते हैं या फिर अमित मालवीय की तरह राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रखर राजनीतिक वक्ता के रूप में उभरते हैं.

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