राजस्थान के झालावाड़ जिले में पिपलोदी गांव में एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने एक साल पहले पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. स्कूल भवन की छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि 27 बच्चे घायल हुए थे. उस दिन पूरे गांव में मातम था, हर आंख नम थी और हर दिल में एक ही सवाल था- क्या इन मासूमों का कसूर सिर्फ इतना था कि वे पढ़ने स्कूल गए थे? लेकिन एक साल बाद तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. दर्द अब भी है, अपनों की कमी आज भी खलती है, लेकिन जिंदगी ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है.
बिल्डिंग ढहने से 7 बच्चों की हुई थी मौत
पिपलोदी गांव में स्कूल की इमारत ढहने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी और 27 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए थे. कई बच्चों ने अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच लंबी लड़ाई लड़ी. उस हादसे ने केवल पीपलोदी ही नहीं, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. आज, एक साल बाद गांव का माहौल बदलता नजर आ रहा है. जो बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए थे, वे अब स्वस्थ होकर फिर से स्कूल पहुंच रहे हैं. हाथों में किताबें हैं, आंखों में सपने हैं और मन में आगे बढ़ने का जज्बा है. हादसे की यादें आज भी उन्हें भावुक कर देती हैं, लेकिन उन्होंने जिंदगी से हार नहीं मानी.
भामाशाह के घर में चल रहा स्कूल
फिलहाल गांव का सरकारी स्कूल एक भामाशाह के निजी भवन में संचालित हो रहा है. गांव के समाजसेवी मोर सिंह ने बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए अपना पूरा घर स्कूल को दे दिया और स्वयं खेत पर बने मकान में रहने लगे. ग्रामीण और बच्चे उनके इस त्याग को कभी नहीं भूल सकते. सभी उनका आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने शिक्षा को सबसे ऊपर रखा.

जल्द नया स्कूल भवन हो जाएगा तैयार
इधर, नए स्कूल भवन का निर्माण तेजी से चल रहा है. अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह भवन जल्द तैयार हो जाएगा और इसी शिक्षा सत्र में बच्चों को नए स्कूल की सौगात मिलने की उम्मीद है. नए भवन में बेहतर कक्षाएं, सुरक्षित वातावरण और आधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे बच्चों की पढ़ाई और बेहतर हो सकेगी. हादसे के बाद प्रशासन, समाजसेवियों और भामाशाहों ने बच्चों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराईं.
पढ़ाई की सामग्री, आवश्यक संसाधन और अन्य सहयोग मिलने से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है. अब पढ़ाई के प्रति उनका उत्साह पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है. इन बच्चों के सपने भी अब पहले से कहीं बड़े हो गए हैं. कोई भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहता है, कोई इंजीनियर बनने का सपना देख रहा है, किसी की इच्छा शिक्षक बनने की है तो कोई वैज्ञानिक बनकर देश का नाम रोशन करना चाहता है. हर सुबह ये बच्चे नई उम्मीदों के साथ स्कूल पहुंचते हैं और पूरी लगन से पढ़ाई करते हैं.

स्कूल में पहले से बढ़ा नामांकन- अधिकारी
ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी राजेंद्र कुमार मेहरा ने ने कहा कि स्कूल में पहले से नामांकन बढ़ा है. हालांकि, हादसे के बाद बच्चों के माता-पिता में डर था, पर हम लोगों ने, प्रशासन और शिक्षा विभाग ने गांव वालों से मिलकर उनका साहस बढ़ाया. पहले स्कूल में बच्चों का नामांकन 72 था, फिर 73-74 हो गया. एक बैच निकल गया. अभी 75 बच्चों का नामांकन है. सभी के सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं. उसका रिजल्ट भी दिख रहा है. बच्चे बड़े उत्साहित हैं और पहले का डर उनक मन से निकल गया है. बच्चे अब नए स्कूल भवन की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
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