Shubman Gill Press Conference on IND vs SL 1st Test: भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज 15 अगस्त से होने जा रहा है. शुभमन गिल की कप्तानी में टीम इंडिया इस सीरीज में दमदार प्रदर्शन करने के इरादे से उतरेगी. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से भी यह टेस्ट सीरीज टीम इंडिया के लिए काफी अहम है. श्रीलंका के खिलाफ सीरीज को मिलाकर भारत को मौजूदा चक्र में कुल 9 टेस्ट खेलने हैं, जिसमें उसे 7 में हर हाल में जीत चाहिए होगी. टेस्ट सीरीज के आगाज से पहले कप्तान शुभमन गिल ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान टीम की तैयारी और खिलाड़ियों की चोट के साथ साथ गेंदबाजी कॉम्बिनेशन पर भी बात की है.
जसप्रीत बुमराह यहां नहीं हैं, लेकिन...
जसप्रीत बुमराह यहां नहीं हैं, लेकिन यह किसी और के लिए आगे आने का मौका है. यह सब खेल की गति को समझने के बारे में है. उनके साथ लगातार बातचीत हो रही है. खिलाड़ियों की चोट पर शुभमन गिल ने कहा कि दुर्भाग्य से, साई सुदर्शन में उतनी सुधार नहीं हुई जितनी हम चाहते थे, क्योंकि टेस्ट मैचों में हम जोखिम नहीं ले सकते, लेकिन हमें अपनी 15 खिलाड़ियों की टीम पर भरोसा है.
नए खिलाड़ियों को लंबा मौका
नए खिलाड़ियों को लंबा मौका देने की बात पर कप्तान गिल ने कहा है कि 'खिलाड़ी खुद-ब-खुद बेहतर होंगे. हमें उन्हें समय देने की जरूरत है, कुछ खिलाड़ियों को थोड़ा समय चाहिए होता है. शुभमन गिल ने आगे कहा, 'अपने देश के लिए 600वें टेस्ट मैच में कप्तानी करना सम्मान की बात है और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ऐसा करना और भी बड़े सम्मान की बात है.
गुरनूर बरार को लेकर गिल ने कहा...
गुरनूर बरार शानदार हैं क्योंकि वह अच्छी रफ़्तार से पुरानी गेंद पर भी उछाल हासिल कर सकते हैं, लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा भी हाल के दिनों में अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं, जैसा कि हमने वॉर्म-अप मैच में देखा है. इसलिए यह तय करना मुश्किल है.
इससे पहले लगातार मिली इन नाकामियों और इसके बाद सहयोगी स्टाफ के दो सहायक कोच तथा एक क्षेत्ररक्षण कोच के जाने से गंभीर और टीम के लिए तत्काल नई ऊर्जा के संचार की जरूरत महसूस होने लगी है. इसका यह मतलब नहीं है कि अगर श्रीलंका में भारत जीत हासिल नहीं कर पाता है तो गंभीर को तुरंत हटा दिया जाएगा लेकिन लाल गेंद के क्रिकेट में आगे की रणनीति को लेकर सत्ता के गलियारों में निश्चित रूप से चर्चा तेज होगी.
हालांकि गॉल में खोई प्रतिष्ठा वापस हासिल करना किसी भी मेहमान टीम के लिए आसान काम नहीं है. अक्सर यहां पहुंचकर सपने टूटते रहे हैं. अगर यह बात महज अतिशयोक्ति लगे तो आंकड़े पर्याप्त हैं. श्रीलंका ने 1998 से यहां खेले गए 49 टेस्ट में से 27 में जीत दर्ज की है. उसकी इस बादशाहत में चतुर स्पिनरों की बड़ी भूमिका रही है.
मुथैया मुरलीधरन और रंगना हेराथ के स्वर्णिम दौर से श्रीलंका काफी आगे निकल चुका है लेकिन उसके पास अब भी प्रभात जयसूर्या और रमेश मेंडिस जैसे स्पिनर हैं, जिन्होंने गॉल को अपना किला बना रखा है. यह स्थिति मौजूदा भारतीय टीम के लिए अनुकूल नहीं है जिसके बल्लेबाज हाल के समय में मिचेल सैंटनर और साइमन हार्मर जैसे स्पिनरों के खिलाफ बुरी तरह संघर्ष करते नजर आए हैं. हालांकि, मौजूदा टीम में उस भारतीय टीम की झलक दिखती है जो 2017 में पिछली बार टेस्ट श्रृंखला खेलने श्रीलंका आई थी.
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