मुंबई की भायखला जेल (फाइल फोटो).
- स्वाति साठे ने जेल के व्हाट्सऐप ग्रुप पर आरोपियों के लिए समर्थन मांगा था
- विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने तो स्वाति साठे को निलंबित करने की मांग की
- कोर्ट ने आरोपियों की पुलिस हिरासत 14 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी
मुंबई:
भायखला जेल हत्या विवाद की जांच में नया मोड़ आ गया है. व्हाट्सऐप ग्रुप पर आरोपी जेलकर्मियों के समर्थन की अपील जेल डीआईजी स्वाति साठे को मंहगी पड़ी. जेल प्रशासन ने अब जांच का जिम्मा डीआईजी से लेकर आईजी राजवर्धन सिन्हा को दे दिया है. हालांकि विवाद बढ़ता देखकर स्वाति साठे ने खुद ही जांच से हटाने की मांग की थी.
भायखला जेल में 23 जून को कैदी मंजुला शेट्टे की मौत हो गई थी. आरोप है कि जेलर सहित छह जेल कर्मियों ने दो अंडे और पांच पाव के लिए उसकी पीट - पीटकर हत्या कर दी. मुंबई क्राइम ब्रांच हत्या के सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.
हैरानी की बात है कि जेल डीआईजी स्वाति साठे जेल के व्हाट्सऐप ग्रुप पर उन्हीं के लिए समर्थन मांग रही थीं. जबकि मंजुला शेट्टे की हत्या और उसके बाद हुई जेल में हिंसा की विभागीय जांच की जिम्मेदारी उन्हीं पर है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी था. मीडिया में यह बात लीक होते ही दबाव बढ़ा.
ठाणे जेल के निलंबित अधीक्षक हीरालाल जाधव ने पत्र लिखकर स्वाति साठे को जांच से हटाने की मांग की जबकि विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने तो स्वाति साठे को निलंबित करने की मांग कर डाली. मौके की नजाकत देखकर खुद स्वाति साठे ने भी जांच से हटना मुनासिब समझा. और दोपहर होते-होते जांच डीआईजी से लेकर आईजी राजवर्धन सिन्हा को सौंप दी गई.
स्वाति साठे का विवादों से पुराना नाता है. इसके पहले भी अपने फैसलों और आचरण की वजह से वे विवादों में रहकर जांच का सामना कर चुकी हैं.
इस बीच भायखला जेल में कैदी मंजुला शेट्टे की हत्या की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने आरोपी छह जेल कर्मियों पर जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए उनकी पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग की जिसे अदालत ने मंजूर कर सभी को 14 जुलाई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया.
भायखला जेल में 23 जून को कैदी मंजुला शेट्टे की मौत हो गई थी. आरोप है कि जेलर सहित छह जेल कर्मियों ने दो अंडे और पांच पाव के लिए उसकी पीट - पीटकर हत्या कर दी. मुंबई क्राइम ब्रांच हत्या के सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.
हैरानी की बात है कि जेल डीआईजी स्वाति साठे जेल के व्हाट्सऐप ग्रुप पर उन्हीं के लिए समर्थन मांग रही थीं. जबकि मंजुला शेट्टे की हत्या और उसके बाद हुई जेल में हिंसा की विभागीय जांच की जिम्मेदारी उन्हीं पर है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी था. मीडिया में यह बात लीक होते ही दबाव बढ़ा.
ठाणे जेल के निलंबित अधीक्षक हीरालाल जाधव ने पत्र लिखकर स्वाति साठे को जांच से हटाने की मांग की जबकि विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने तो स्वाति साठे को निलंबित करने की मांग कर डाली. मौके की नजाकत देखकर खुद स्वाति साठे ने भी जांच से हटना मुनासिब समझा. और दोपहर होते-होते जांच डीआईजी से लेकर आईजी राजवर्धन सिन्हा को सौंप दी गई.
स्वाति साठे का विवादों से पुराना नाता है. इसके पहले भी अपने फैसलों और आचरण की वजह से वे विवादों में रहकर जांच का सामना कर चुकी हैं.
इस बीच भायखला जेल में कैदी मंजुला शेट्टे की हत्या की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने आरोपी छह जेल कर्मियों पर जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए उनकी पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग की जिसे अदालत ने मंजूर कर सभी को 14 जुलाई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया.
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