- महाराष्ट्र के 358 तालुकों में से 265 तालुका सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं और राहत उपाय शुरू किए गए हैं.
- जालना जिले के अंबड तालुका का गलहाट बांध पूरी तरह सूख गया है जिससे आसपास के 20 गांवों में पानी की किल्लत है.
- सूखा प्रबंधन नियम 2016 के तहत ट्रिगर-1 योजना लागू की गई है जो बारिश में 25 प्रतिशत से अधिक कमी पर शुरू होती है
महाराष्ट्र के 358 तालुकों में से 265 सूखे की जद में है. बीते शनिवार को सरकार ने राज्य के 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया था. महाराष्ट्र में सूखा कितना भयानक है, इसकी बानगी जालना से सामने आई है. जालना जिले के अंबड तालुका की जीवनरेखा माने जाने वाले मध्यम सिंचाई प्रोजेक्ट, गलहाटी बांध में पानी पूरी तरह सूख गया है. ड्रोन फुटेज में सूखे का भयावह मंजर नजर आता है. जहां कभी पानी की लहरें उठती थीं, वहां अब बांध सूखी मिट्टी, धूल और गहरी, चौड़ी दरारों में बदल गया है.
जालना में सूखे का भयावह ड्रोन मंजर
प्रोजेक्ट के सूखने से आस-पास के 20 गांवों में पानी की भारी किल्लत हो गई है. इलाके के कुओं और बोरवेल का जलस्तर बिल्कुल नीचे चला गया है. महिलाएं और छोटे बच्चे पीने के पानी का सिर्फ एक बर्तन लाने के लिए मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं. सिद्धेश शेलके ने महाराष्ट्र के जालना से सूखे के इस भयावह मंजर को ड्रोन में कैद किया है.
राज्य के 358 में से 265 तालुका सूखा प्रभावित घोषित
राज्य सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए राहत उपायों की घोषणा की, जिनमें फसल ऋण नियमों को आसान बनाने, भू-राजस्व में छूट और बिजली बिल में सब्सिडी शामिल है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिला कलेक्टरों को फसल के नुकसान का आकलन तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है और भरोसा दिलाया है कि सूखे की स्थिति में सरकार की राहत कोशिशों के केंद्र में किसान ही रहेंगे.
शुक्रवार देर रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, 32 जिलों में फैले 265 तालुका मे राज्य का 74 प्रतिशत हिस्सा आ गया है. उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि किसानों को दी जाने वाली वास्तविक आर्थिक सहायता का निर्णय जमीनी स्तर पर आकलन के बाद किया जाएगा.
सूखा प्रबंधन नियम का ट्रिगर-1 प्लान लागू
राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति घोषित करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए अपने ‘सूखा प्रबंधन नियम 2016' (2020 में अद्यतन) और ‘सूखा प्रबंधन संहिता' के तहत ‘ट्रिगर-1' कदम लागू किया है. ‘ट्रिगर-1' राज्य के सूखा प्रबंधन ढांचे का पहला चरण है. इसे तब लागू किया जाता है जब बारिश में 25 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी हो और 21 दिन तक लगातार सूखे (बिना बारिश वाला समय) का दौर रहे.
छत्रपति संभाजीनगर में सबसे खराब हालात
कृषि आयुक्त की एक रिपोर्ट में पाया गया कि जून से बारिश कम होने और अन्य कारणों से 32 जिलों के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात हैं. रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सूखे से प्रभावित तालुकाओं की संख्या सबसे ज्यादा (74) है; इसके बाद अमरावती (56), नासिक (49), नागपुर (39), पुणे (35) और ठाणे (12) का स्थान है.
महाराष्ट्र के इन इलाकों में भीषण सूखा
छत्रपति संभाजीनगर मंडल में जालना, बीड, लातूर, धाराशिव, नांदेड़, परभणी और हिंगोली जिले शामिल हैं, जबकि बुलढाणा, अमरावती, अकोला, वाशिम और यवतमाल जिले अमरावती मंडल के अंतर्गत आते हैं. नागपुर मंडल में वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और गढ़चिरौली शामिल हैं. नासिक, धुले, जलगांव, नंदुरबार और अहिल्यानगर जिलों में 49 तालुका और पुणे, सोलापुर, सांगली, सतारा और कोल्हापुर जिलों में 35 तालुका को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है.
सीएम ने राहत-बचाव के लिए अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश
मुख्यमंत्री कार्यालय ने फडणवीस के हवाले से कहा, “सूखे की स्थिति में हमारे राहत कार्यों के केंद्र में किसान, खेतिहर मजदूर और अन्य कामगार हैं. उन्हें राहत पहुंचाने के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी.” सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित तालुकों में फसल के नुकसान का आकलन शुरू करें और फसल की स्थिति का रिकॉर्ड रखने के लिए सर्वेक्षण वाले इलाकों की तस्वीरें तथा जीपीएस अवस्थिति के आंकड़े एकत्र करें. ये रिपोर्ट कृषि आयुक्त के जरिए सरकार को सौंपी जानी हैं.
रिपोर्टर - मोहसिन शेख, मराठवाड़ा
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