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महाराष्‍ट्र: RBI अधिकारी बनकर नोट बनाने का दिखाया डेमो, फिर व्‍यापारी को लगा दिया लाखों का चूना

आरोपियों ने आरबीआई अधिकारी बनकर के 500 रुपये के नोट बनाने का डेमो दिखाया और व्‍यापारी का विश्‍वास जीत लिया. इसके बाद सीक्रेट डील के नाम पर लाखों रुपये ठग लिए.

महाराष्‍ट्र: RBI अधिकारी बनकर नोट बनाने का दिखाया डेमो, फिर व्‍यापारी को लगा दिया लाखों का चूना
प्रतीकात्‍मक फोटो
  • मुंबई के माटुंगा इलाके में आरोपियों ने खुद को आरबीआई अधिकारी बताकर एक व्यापारी को ठग लिया.
  • आरोपियों ने काले कागज और केमिकल से 500 रुपये का नकली नोट बनाने का नाटक कर अक्षय का भरोसा जीता.
  • आरोपियों ने बैंक में नकली नोट जमा कराकर उसे असली साबित करने का दिखावा किया और रकम ऐंठी.
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मुंबई:

मुंबई के माटुंगा इलाके से ठगी का एक मामला सामने आया है. यह मामला बेहद चौंकाने वाला है, जिसमें आरोपियों ने खुद को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताकर एक व्यापारी को झांसा दिया और उससे लाखों रुपये ठग लिए. आरोपियों ने काले कागज और केमिकल से असली नोट बनाने का नाटक किया और फिर व्‍यापारी का भरोसा जीत लिया. इसके बाद व्‍यापारी से मोटी रकम ऐंठ ली.

माटुंगा पुलिस के मुताबिक, पीड़ित अक्षय गजानन खाडे (32) पुणे के हडपसर इलाके के रहने वाले हैं और शेयर मार्केट से जुड़ा काम करते हैं. अक्षय बचपन से दिव्यांग हैं. पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने उनकी इसी स्थिति और भरोसे का फायदा उठाया.

500 रुपये का नोट बनाने का डेमो

जांच में सामने आया है कि अक्षय की पहचान साल 2017 में अरविंद बबन लांबे नाम के व्यक्ति से हुई थी. नवंबर 2024 में अरविंद ने फेसबुक के जरिए दोबारा संपर्क किया और खुद को आरबीआई में काम करने वाला बताते हुए एक “सीक्रेट डील” का लालच दिया. इसके बाद 27 नवंबर 2024 को अक्षय को दादर पूर्व के एक होटल में बुलाया गया, जहां अरविंद लांबे, विकास शिंदे और एक अन्य व्यक्ति ने काले कागज को केमिकल में डालकर 500 रुपये के नोट बनाने का डेमो दिखाया.

बैंक में नोट जमा कराकर जीता विश्‍वास

अक्षय को शक हुआ तो आरोपियों ने दादर पश्चिम के एक बैंक में वही नोट जमा कराकर यह दिखाने की कोशिश की कि नोट पूरी तरह से असली है. इस नाटक के बाद नोट बनाने की सामग्री देने के नाम पर व्‍यापारी से पहले 1.50 लाख रुपये नकद लिए गए और इसके बाद 15 लाख रुपये देने पर 47 लाख रुपये बनाने का लालच दिया गया.

इस झांसे में आकर अक्षय ने दोस्तों से पैसे उधार लिए और दादर स्टेशन परिसर में 10 लाख रुपये नकद दिए. इसके अलावा 3.15 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए. रकम हाथ लगते ही आरोपी फोन उठाने से बचने लगे.

शक होने पर पुलिस को दी सूचना 

मई 2025 में एक आरोपी ने फिर संपर्क कर खुद को बैंक से जुड़े किसी मामले में फंसा होने की बात कही और 4 लाख रुपये और मांगने की कोशिश की. इस बार अक्षय को शक हुआ और उसने पुलिस को सूचना दी. नालासोपारा में पुलिस की मौजूदगी में हुई पूछताछ के दौरान आरोपी अरविंद लांबे ने ठगी की बात कबूल की और रकम लौटाने का लिखित आश्वासन भी दिया, लेकिन पैसे वापस नहीं किए.

अलग-अलग थानों में आई कई शिकायतें 

जांच के दौरान पीड़ित का बैंक खाता भी सील कर दिया गया. ठाणे और मुंबई के अलग-अलग पुलिस थानों में इस मामले से जुड़ी शिकायतें सामने आने के बाद अब माटुंगा पुलिस ठगी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को इसी तरह ठगा है. मामले की जांच फिलहाल जारी है.

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