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होर्मुज स्ट्रेट से 20% क्रूड ऑयल आता है... बाकी 80% कहां से आता है? वो समुद्री रास्ते, जहां से आ सकता है तेल

ईरान में जंग भड़कने के बाद होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है और इसका असर दुनियाभर में पड़ रहा है. ऐसे में जानते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट के अलावा और कौन-कौन समुद्री रास्ते हैं जहां से कच्चे तेल की सप्लाई होती है.

होर्मुज स्ट्रेट से 20% क्रूड ऑयल आता है... बाकी 80% कहां से आता है? वो समुद्री रास्ते, जहां से आ सकता है तेल
होर्मुज स्ट्रेट. (AI Generated Image)
  • इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया, जिससे तेल परिवहन प्रभावित हुआ है
  • होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कच्चे तेल की लगभग 20% मात्रा गुजरती है, जो वैश्विक तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण है
  • होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की कीमतें बढ़कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बैरल के 92 डॉलर तक पहुंच गई हैं
नई दिल्ली:

इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर जो हमला किया था, उसका खामियाजा अब पूरी दुनिया भुगत रही है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. वहां से अगर कोई जहाज गुजरने की कोशिश कर भी रहा है तो उस पर ईरान हमला कर रहा है. बुधवार को ईरान ने तीन जहाजों पर हमला किया. ये वही रास्ता है, जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है. 

कच्चे तेल के लिए होर्मुज स्ट्रेट कितना मायने रखता है, इसे इस बात से समझ लीजिए कि जंग शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमत 30% तक बढ़ गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.

भारत में भी इसका असर दिखने लगा है. देश के अलग-अलग हिस्सों से LPG की किल्लत की खबरें आ रही हैं. फिलहाल पेट्रोल-डीजल को लेकर तो कोई संकट नहीं है. लेकिन अगर जंग लंबी खिंचती है तो शायद इस पर भी असर पड़े. हालांकि, सरकार का कहना है कि भारत की क्रूड ऑयल सप्लाई सुरक्षित है और दूसरे रूट से आ रहा है.

यूएस एनर्जी इन्फोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के मुताबिक, दुनिया का लगभग 76% कच्चा तेल और 13% गैस समुद्री रास्तों से दुनियाभर में जाती है. EIA का डेटा बताता है कि 2025 की पहली छमाही यानी जनवरी से जून के बीच हर दिन 10.44 करोड़ बैरल कच्चा तेल दुनियाभर में गया. इसमें से लगभग 8 करोड़ बैरल समुद्री रास्तों के जरिए पहुंचा.

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होर्मुज स्ट्रेट से कितना आया-गया?

ओमान और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह इतना गहरा और चौड़ा है कि दुनिया के कच्चे तेल के बड़े-बड़े टैंकर यहां से आ सकते हैं. यह दुनिया के सबसे जरूर ऑयल चेकपॉइंट में से एक है.

होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी मात्रा में तेल जाता है. 2025 की पहली छमाही में यहां से हर दिन 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरा है. दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की जो खपत होती है, उसका 20% यहीं से आता है. 

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अगर ये स्ट्रेट बंद हो जाए तो विकल्प मौजूद हैं लेकिन यहां से उतना तेल नहीं जा सकता. सऊदी अरब की सबसे बड़ी कंपनी सऊदी अरामको की ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अबू धाबी पाइपलाइन कच्चे तेल की सप्लाई जारी रख सकती है. लेकिन यहां से हर दिन 45-50 लाख बैरल तेल ही जा सकता है. 2027 तक UAE ने एक और पाइपलाइन बनाने की योजना बनाई है, जहां से हर दिन 15 लाख बैरल तेल ले जाया जा सकता है.

होर्मुज से होकर जाने वाला 89% कच्चा तेल एशियाई बाजारों में जाता है. जबकि चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया तक 74% कच्चा तेल पहुंचता है. यही कारण है कि होर्मुज के बंद होने का सबसे ज्यादा असर एशियाई देशों पर ही पड़ता है. 

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और कहां-कहां से हो सकती है सप्लाई?

ये पहली बार नहीं है जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. ऐसा कई बार देखने को मिलता है कि ईरान के साथ कोई तनाव होता है तो वह इसे बंद कर देता है. होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 20% कच्चा तेल सप्लाई होता है और बाकी के तेल के दूसरे समुद्री रास्ते मौजूद हैं.

  • मलक्का स्ट्रेट: ये दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री चेकपॉइंट है. यहां से हर दिन 2.32 करोड़ बैरल तेल सप्लाई होता है. यानी, दुनिया का 29.1% कच्चा तेल यहीं से गुजरता है. यह मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच का सबसे संकरा रास्ता है. अगर ये बंद हो जाए तो सुंडा स्ट्रेट और लोम्बोक स्ट्रेट से सप्लाई हो सकती है लेकिन ये दोनों रास्ते बहुत लंबे हैं.
  • स्वेज नहर, SUMED पाइपलाइन, और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट: इन तीनों रूट से दुनिया का लगभग 11% कच्चा तेल सप्लाई होता है. स्वेज नहर और SUMED पाइपलाइन मिस्र में हैं और लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती हैं. बाब अल-मंडेब स्ट्रेट, हॉर्न ऑफ अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के बीच है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. 2025 की पहली छमाही में स्वेज नहर और SUMED पाइपलाइन से हर दिन 49 लाख बैरल कच्चा तेल सप्लाई हुई. वहीं, बाब अल-मंडेब स्ट्रेट से 42 लाख बैरल कच्चा तेल निकला.
  • डेनिश स्ट्रेट: यह बाल्टिक सागर को नॉर्थ सागर से जोड़ते हैं. यूक्रेन युद्ध से पहले तक डेनिश स्ट्रेट रूस के समुद्री रास्ते से यूरोप में तेल एक्सपोर्ट करने का एक जरूरी रास्ता था. डेनिश स्ट्रेट से लगभग हर दिन 49 लाख बैरल कच्चा तेल यहां से गया, जो ग्लोबल ट्रेड का 6% है. 2023 में डेनिश स्ट्रेट के जरिए भारत को रूस का तेल एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा क्योंकि मिडिल ईस्ट के बजाय भारत ने रूसी तेल ज्यादा खरीदा.
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  • टर्किश स्ट्रेट: यह एशिया को यूरोप से अलग करता है. टर्किश स्ट्रेट में बोस्पोरस और डार्डानेल्स वॉटरवे शामिल हैं. बोस्पोरस वॉटरवे ब्लैक सी को मरमारा सी से जोड़ता है. डार्डानेल्स वॉटरवे मरमारा सी को एजियन और मेडिटेरेनियन सी से जोड़ता है. दोनों वॉटरवे तुर्किये में हैं और रूस और कैस्पियन सागर से एशिया, वेस्टर्न यूरोप और सदर्न यूरोप को तेल सप्लाई करते हैं. यहां से हर दिन लगभग 37 लाख बैरल कच्चा तेल निकला. यह ग्लोबल ट्रेड का 5% है.
  • पनामा कैनल: यह प्रशांत महासागर को कैरेबियन सागर और अटलांटिक महासागर से जोड़ती है. यह नहर 50 मील लंबी है. यहां से हर दिन लगभग 23 लाख बैरल तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई होती है, जो ग्लोबल ट्रेड का सिर्फ 3% है. यह पतली नहर है, इसलिए यहां से छोटे जहाज ही गुजर सकते हैं.
  • केप ऑफ गुड होप: यह कोई चेकपॉइंट नहीं है लेकिन दुनियाभर में तेल टैंकर और LNG शिपमेंट के लिए एक बड़ा ग्लोबल ट्रेड रूट और एक अहम ट्रांजिट पॉइंट है. 2025 की पहली छमाही से यहां से हर दिन लगभग 91 लाख बैरल कच्चा तेल गया, जो ग्लोबल ट्रेड का 11% है. यह केप पश्चिम की ओर जाने वाले उन जहाजों के लिए एक दूसरा समुद्री रास्ता है जो अदन की खाड़ी, बाब अल-मंडेब स्ट्रेट और स्वेज नहर को बायपास करना चाहते हैं.

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भारत के पास कितना है रिजर्व?

होर्मुज स्ट्रेट से जो कच्चा तेल सप्लाई होता है, उसमें से 74% चीन, जापान, भारत और साउथ कोरिया आता है. भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना भारत के लिए चिंता की बात है. हालांकि, सरकार का कहना है कि दूसरे रूट्स से कच्चा तेल आ रहा है. 

भारत दुनिया के 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल आयात करता है. हर देश अपने यहां कच्चे तेल का रिजर्व रखता है. भारत के पास भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास 7 से 8 हफ्तों का रिजर्व है. यानी अगर जंग लंबी चलती है और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई पर असर पड़ता है तो भारत 7 से 8 हफ्तों तक तो हालात संभाल लेगा लेकिन उसके बाद चीजें बिगड़ सकती हैं. न्यूज एजेंसी ANI ने एक सरकारी रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि भारत के पास 25 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम रिजर्व है. 

दुनियाभर में आने वाले कच्चे तेल को मैंगलोर, पादुर और विशाखापट्टनम में जमीन के नीचे बने स्ट्रैटजिक रिजर्व में रखा जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, और भी रिजर्व जमीन के ऊपर बने टैंकों, पाइपलाइनों और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क के अंदर जहाजों में भी रखे जाते हैं.

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