विज्ञापन

रायपुर का 'साइबर एक्सपर्ट' निकला ठग: जांच करने आया और उड़ाया 30 करोड़, पुलिस कांस्टेबल के साथ मिलकर रची साजिश

30 करोड़ के क्रिप्टो फ्रॉड में रायपुर के सॉफ्टवेर इंजीनियर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. इस मामले में पुलिस कांस्टेबल की भी भूमिका बताई जा रही है. आइए जानते हैं पूरा मामला आखिर क्या है?

रायपुर का 'साइबर एक्सपर्ट' निकला ठग: जांच करने आया और उड़ाया 30 करोड़, पुलिस कांस्टेबल के साथ मिलकर रची साजिश

Chhattisgarh News: देश के बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटालों में से एक GainBitcoin मामले में इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर के रहने वाले सॉफ्टवेयर डेवलपर गौरव हरीश मेहता को गिरफ्तार किया है. आरोपी को 16 जनवरी को गिरफ्तार कर एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 24 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

ईओडब्ल्यू ने इस मामले में एमआरए मार्ग पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस के मुताबिक यह मामला करीब ₹30 करोड़ के क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड से जुड़ा हुआ है, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल की भूमिका भी सामने आई है.

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता पेशे से वकील  रविंद्रनाथ प्रभाकर पाटिल ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2016-17 के दौरान निवेशकों को मोटे मुनाफे का लालच देकर GainBitcoin नाम की मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम में पैसा लगवाया गया. इस स्कीम के जरिए बड़े पैमाने पर ठगी की गई. इस घोटाले से जुड़े केस पहले ही साल 2018 में पुणे के दत्तवाड़ी और निगड़ी पुलिस थानों में दर्ज किए जा चुके हैं. उस समय पुणे पुलिस ने क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की तकनीकी जांच के लिए एक ऑडिट फर्म को फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया था.

फॉरेंसिक जांच के दौरान गड़बड़ी का आरोप

जांच के दौरान कई क्रिप्टो हार्डवेयर वॉलेट और डिजिटल एसेट्स जब्त किए गए थे. बाद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक दूसरी फॉरेंसिक ऑडिट फर्म को भी जांच सौंपी गई, जिसमें आरोपी गौरव मेहता बतौर साइबर एक्सपर्ट शामिल था. पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान गौरव मेहता ने जब्त किए गए क्रिप्टो वॉलेट्स तक अपनी तकनीकी पहुंच का गलत इस्तेमाल किया. जांच में उसके TRONSCAN क्रिप्टो वॉलेट से करीब 90 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹30 करोड़) के लेनदेन सामने आए. इस रकम के स्रोत को लेकर आरोपी कोई ठोस जवाब नहीं दे सका.

छापेमारी और डिजिटल सबूत

ईओडब्ल्यू ने मुंबई के फोर्ट इलाके में आरोपी के ऑफिस, रायपुर स्थित घर और कार्यस्थल के अलावा, सह-आरोपियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की. इस दौरान बड़ी मात्रा में लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन, राउटर और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए.पुलिस को शक है कि इन्हीं उपकरणों के जरिए क्रिप्टो एसेट्स को अलग-अलग वॉलेट्स और एक्सचेंजों में ट्रांसफर कर छिपाया गया. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अपनी डिजिटल पहचान छुपाने के लिए VPN और अन्य तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया.

पुलिस कांस्टेबल की भी भूमिका

जांच में पुणे में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल की भूमिका भी सामने आई है. पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में कई लोग शामिल हो सकते हैं और आपस में मिलीभगत कर निवेशकों के पैसे को इधर-उधर किया गया.

क्यों जरूरी है पुलिस कस्टडी?

ईओडब्ल्यू का कहना है कि मामला बेहद तकनीकी और जटिल है. अभी कई अहम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं. 30 करोड़ के क्रिप्टो एसेट्स आखिर कहां गए,गायब हार्डवेयर वॉलेट्स कहां हैं,इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल हैं?

ये भी पढ़ें रायपुर, भिलाई और कोरबा में खराब वायु गुणवत्ता पर NGT सख्त, राज्य स्तरीय ग्रैप जैसी व्यवस्था के निर्देश

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Chhattisgarh News, Raipur News, Raipur Police
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com