Top Maoist Leaders Still Active: प्रतिबंधित माओवादी संगठन के महासचिव देवजी के आत्मसमर्पण के बाद एक बार यह चर्चा तेज हो गई है कि देश में अब कितने बड़े माओवादी कैडर बचे हैं. माओवादी (नक्सलियों) के खात्मे के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन के बीच यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो गया है. बड़े नामों के मारे जाने या सरेंडर करने के बाद बचे नक्सली उनके खात्मे में जुटे जवानों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए कितनी बड़ी चुनौती हैं, इसे लेकर भी चर्चा हो रही है.
इंटेलिजेंस इनपुट के मुताबिक, झारखंड में करीब 70 नक्सली बचे हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में 90 से 100 के बीच सक्रिय माओवादी मौजूद बताए जा रहे हैं. ओडिशा में इनकी संख्या 25 से 30 के बीच आंकी गई है. वहीं तेलंगाना में एक बटालियन के रूप में लगभग 60 माओवादी सक्रिय हो सकते हैं, इसके साथ ही तेलंगाना स्टेट कमेटी में करीब 20 माओवादी कार्यरत होने की संभावना जताई जा रही है.
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गणपति और संतोष झारखंड में सक्रिय
सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के अनुसार, माओवादी संगठन में अब गिने-चुने बड़े कैडर ही शेष रह गए हैं. इनमें मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति शामिल है, जो केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो का सदस्य बताया जाता है. गणपति पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित है. इसके अलावा पुसुनूरी नरहरि उर्फ संतोष पर 20 लाख रुपये का इनाम घोषित है. ये झारखंड में सक्रिय हैं और केंद्रीय समिति का सदस्य बताया जाता है.
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पापा राव पर 25 लाख, मीशिर बेसरा पर एक करोड़ का इनाम
राज्य स्तर पर सक्रिय दामोदर को सैन्य मामलों का प्रभारी माना जाता है, उस पर भी 20 लाख रुपये का इनाम है. रूपी नामक नक्सली पर 4 लाख रुपये का इनाम घोषित है, जो एरिया कमेटी कैडर बताई जाती है. इसके अलावा पापा राव को डीकेएसजेडसी (DKSZC) का सदस्य बताया जाता है, जिस पर 25 लाख का इनाम घोषित है. झारखंड में सक्रिय मीशिर बेसरा को सबसे खतरनाक नक्सलियों में गिना जाता है और उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है.
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देश जल्द माओवाद मुक्त होगा
सुरक्षा एजेंसियों और विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलियों का संगठन काफी हद तक टूट चुका है. शीर्ष नेतृत्व के कई बड़े नेता या तो मारे गए है या फिर उन्होंने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया है. इससे माओवादी संगठन लगातार कमजोर हो रहा है. अब वो दिन दूर नहीं जब देश माओवाद मुक्त होगा.
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