मध्यप्रदेश में राहुल गांधी की यात्रा, कांग्रेस की मंदिरों के रास्ते पर चलकर विधानसभा चुनाव पर नजर

मध्यप्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने दो ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए और पूजन किया

मध्यप्रदेश में राहुल गांधी की यात्रा, कांग्रेस की मंदिरों के रास्ते पर चलकर विधानसभा चुनाव पर नजर

राहुल गांधी ने उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में पूजन किया.

भोपाल:

मध्यप्रदेश में पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने पूरे देश में मंदिरों की यात्रा की. जानकारों ने कहा है कि इसने कांग्रेस और गांधी परिवार को हिंदू विरोधी के रूप में पेश करने की बीजेपी की क्षमता कुंद कर दी है. पिछली चुनावी किताब से भारत जोड़ो यात्रा के आयोजकों ने एक पन्ना मंदिर यात्रा का निकाल लिया, तभी भारत जोड़ो यात्रा के मार्गों की योजना इस तरह से बनाई गई थी कि राहुल ने मध्यप्रदेश में दो-दो ज्योर्तिलिंगों के दर्शन किए, पूजा-अर्चना की.

गत 25 नवंबर को राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा, उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और बेटे रेहान वाड्रा ने शाम को नर्मदा आरती में भाग लिया और खंडवा में नर्मदा नदी के तट पर नर्मदा पूजन किया. उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ भी थे. 

ओंकारेश्वर वह तीर्थ है जहां आदि शंकराचार्य को अपना गुरु मिला था. सभी ने नर्मदा के तट पर प्रसिद्ध ओंकारेश्वर मंदिर में भी पूजा की. ओंकार पहाड़ी पर स्थित ये मंदिर भगवान शिव के 12 'ज्योतिर्लिंगों' में से एक है.

ओंकारेश्वर में बीजेपी की सरकार शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा बना रही है. वहां 2141 करोड़ की लागत से एक संग्रहालय, एक अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान भी बनेगा.

वैसे राहुल गांधी की यात्रा में बुरहानपुर में दरगाह-ए-हकीमी की यात्रा जो दाऊदी बोहरा मुसलमानों की है और गुरुद्वारा बड़ी संगत साहिब भी शामिल था. लेकिन मध्य प्रदेश में यात्रा के प्रवेश में दो दिन की देरी के बाद इस कार्यक्रम को बदलना पड़ा.

ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के चार दिन बाद. सफेद धोती और लाल अंगवस्त्रम पहने, रुद्राक्ष पहने राहुल गांधी ने कमलनाथ के साथ महाकाल मंदिर में पूजा-अर्चना की. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अक्टूबर में ही महाकाल लोक का लोकार्पण किया था. पूजा-अर्चना के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने तपस्या और तपस्वी का मुद्दा उठाकर बीजेपी पर हमला बोला.

राहुल गांधी ने कहा, ''शिव, कृष्ण, राम की 'तपस्या' का कोई सानी नहीं है और भारत 'तपस्वियों' की भूमि है. हिंदू धर्म सभी 'तपस्वियों' का सम्मान करता है, हम तपस्वी की पूजा करते हैं. यह दो व्यक्ति, जो दिन रात पीएम की तपस्या करते हैं, जो सरकार से जो चाहते हैं, पा रहे हैं, भाजपा वाले हाथ जोड़कर भगवान की पूजा करते हैं, लेकिन किसानों, श्रमिकों, छोटे और मध्यम व्यापारियों सहित असली तपस्वियों के भविष्य को बर्बाद कर देते हैं.''

हालांकि मंदिर चलो कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की "कथा वाचक" प्रदीप मिश्रा से मुलाकात के दौरान एक वायरल वीडियो पर राहुल के उस बयान से जोड़कर बीजेपी सवाल पूछ रही है जिसमें वे कह रहे थे कि यात्रा से सब स्वेच्छा से जुड़ा है और इससे नई ऊर्जा का संचार हो रहा है.

प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा, कमलनाथ जी की जुबान से राहुल गांधी जी का जनजाति और धार्मिक पाखंड का पता चला. राहुल जी कहीं आपके इवेंट से बुजुर्गों को नुकसान ना हो जाए.

महाकाल मंदिर जाने से पहले राहुल गांधी जैन मुनि स्वामी प्रज्ञा सागरजी महाराज के आश्रम भी गए और वहां 30 मिनट बिताए. अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने एक 'कीर्ति स्तंभ' का उद्घाटन किया और प्रज्ञा सागरजी महाराज का आशीर्वाद भी लिया.

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सन 2018 में बीजेपी मध्य प्रदेश में चुनाव हार गई. बीजेपी के पतन के पीछे के कारण प्रमुख रूप से कृषि संकट और भ्रष्टाचार थे. लेकिन कांग्रेस ने बीजेपी के तुरुप के पत्ते, यानी हिंदुत्व का काट खोज निकाला. कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि शायद अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में मंदिर दौड़ फिर उन्हें सत्ता दिलाने में मदद करे.

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