शिवराज चौहान ने दो दिनों तक अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ एक-एक कर चर्चा की.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो दिनों तक अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ एक-एक कर चर्चा की, मंत्रियों से उनके विभागों का रोडमैप जाना, ये भी बताया कि उनके विभागों की प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए. उधर कांग्रेस-बीजेपी में एक दूसरे के नेताओं को अपने पाले में करने की होड़ मची हुई है. सारी तैयारी राज्य में उपचुनावों के मद्देनजर मानी जा रही है. शिवराज सरकार के पूर्व मंत्री के एल अग्रवाल कांग्रेस में शामिल हो गए तो वहीं, मांधाता से कांग्रेस विधायक नारायण पटेल बीजेपी में आ गए. प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा, "पटेल साहब ने पुन: कहा जो 22 को इस्तीफा दिया था उसे स्वीकार करें, मैं राजी खुशी स्वेच्छा से विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे रहा हूं. मध्यप्रदेश में कांग्रेस को 15 दिन के अंदर यह तीसरा बड़ा झटका है. इससे पहले बड़ामलहरा कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी, नेपानगर विधायक सुमित्रा कासडेकर और अब नारायण पटेल ने पार्टी छोड़ दी.
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कांग्रेस के विधायक का आरोप था कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ उन्हें वक्त नहीं देते थे. शायद इससे सबके लेते हुए शिवराज सिंह चौहान हर मंत्री से वनटूवन चर्चा कर रहे हैं. हालांकि कांग्रेस कह रही है इससे फर्क नहीं पड़ता, बीजेपी को लगता है ये मास्टरस्ट्रोक है.
पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने कहा, "ये उनका नाटक है, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व अध्यक्ष एनपी प्रजापति की याचिका पर नोटिस दिया है. मैं मानता हूं खरीदी सरकार में जनता को न्याय नहीं मिलेगा. जिन-जिन की मीटिंग हो रही है वो पहले अपनी कोरोना की जांच करा लें."
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उधर शिवराज सरकार में परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा, "मैं पहली बार देख रहा हूं, वन-टू-वन में सीएम विभाग के बारे में सुझाव क्या है इनपर चर्चा करते हैं." मध्यप्रदेश की 230 सीटों वाली विधानसभा में अब 27 सीटें खाली हो गईं हैं.
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कांग्रेस के 25 विधायकों के इस्तीफे के बाद अब उसके पास 89 विधायक हैं. वहीं बीजेपी के पास 107 विधायक हैं. बीजेपी को पूर्ण बहुमत के लिए अब सिर्फ 9 विधायकों की जरूरत है. बसपा के पास -2, सपा के पास -1 और विधानसभा में 4 निर्दलीय विधायक हैं.
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