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This Article is From Aug 04, 2025

मनरेगा कार्यों में मिली भारी अनियमितताएं, रोकना पड़ा पश्चिम बंगाल का फंड: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 2019 से 2022 के बीच केंद्र की टीमों ने पश्चिम बंगाल के 19 जिलों में जांच की, जिसमें मनरेगा के कार्यों में भारी अनियमितताएं पाई गईं.

मनरेगा कार्यों में मिली भारी अनियमितताएं, रोकना पड़ा पश्चिम बंगाल का फंड: शिवराज सिंह चौहान
  • केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में मनरेगा के कार्यान्वयन में भारी अनियमितताओं के चलते फंड रिलीज रोक दिया है..
  • शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 2019 से 2022 तक केंद्रीय टीमों ने बंगाल के 19 जिलों में मनरेगा कामों की जांच की.
  • प्रधानमंत्री आवास योजना में भी अपात्र परिवारों को चयनित करने और नियमों की अनदेखी करने की शिकायतें मिली हैं.
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नई दिल्‍ली :

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के कार्यान्वयन पर फिर गंभीर सवाल उठाया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को दिल्‍ली में जारी एक बयान में कहा कि मनरेगा के कार्यों में भारी अनियमितताएं पाई गईं हैं और इसी के कारण ग्रामीण विकास मंत्रालय को पश्चिम बंगाल के फंड रिलीज को रोकना पड़ा है. 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में बुरी तरह विफल रही है. 2019 से 2022 के बीच केंद्र की टीमों ने पश्चिम बंगाल के 19 जिलों में जांच की, जिसमें मनरेगा के कार्यों में भारी अनियमितताएं पाई गईं. इनमें कार्यस्थल पर वास्तविक कार्य न होना, नियम विरुद्ध कामों को हिस्सों में तोड़ना, धन की हेराफेरी जैसी गंभीर बातें उजागर हुईं. इसी के चलते ग्रामीण विकास मंत्रालय को मनरेगा अधिनियम की धारा 27 के तहत करना रोकना पड़ा है." 

PM आवास योजना पर भी उठ रहे सवाल

ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यान्वयन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. शिवराज सिंह के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना के मामले में भी उन्हें शिकायतें मिलीं कि राज्य सरकार ने अपात्र परिवारों का चयन किया, पात्रों को हटाया और योजना का नाम बदलकर नियमों की अनदेखी की. यह सारी शिकायतें राष्ट्रीय और केंद्रीय मॉनिटरिंग टीमों द्वारा सही पाई गईं हैं. 

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इस शिकायतों में राज्य सरकार की लापरवाही प्रमाणित होती है.

सुधार के लिए कदम नहीं उठाया: चौहान

साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा, "बार-बार अनुरोध के बावजूद पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने सुधार या पारदर्शिता के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. दुर्भाग्यवश, पश्चिम बंगाल सरकार विश्वास, जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर पूरी तरह विफल साबित हुई है". 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014-15 से अब तक ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा पश्चिम बंगाल को 1.10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि विभिन्न योजनाओं के जरिए दी गई है. 

केंद्र ने इन योजनाओं में दी बंगाल को राशि 

इसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 16,505 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत 25,798 करोड़ रुपए, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना और RSETI के तहत 274 करोड़ रुपए, मनरेगा (2014-15 से 2022 तक) 54,465 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) में 3,881 करोड़ रुपए और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत 8,389 करोड़ रुपए सीधे पश्चिम बंगाल के गरीबों और जरूरतमंदों तक पहुंचाए गए हैं. 

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