महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित गुरुद्वारा परिसर में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हमले की कोशिश के दौरान बड़ी सुरक्षा चूक टल गई. घटना के वक्त महाराष्ट्र पुलिस की सुरक्षा टीम में शामिल पुलिस इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ केंद्रे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हमलावर को काबू कर लिया और संभावित बड़े हादसे को टाल दिया. इस घटना के बाद बादल परिवार ने भी संतोष वैजनाथ का धन्यवाद व्यक्त किया.
जानकारी के अनुसार सुखबीर सिंह बादल 12 अगस्त को शाम करीब 4:45 बजे नांदेड़ पहुंचे थे. 13 अगस्त को उनके कार्यक्रम में मालटेकड़ी, हीरा घाट और माता साहिब गुरुद्वारे के दर्शन शामिल थे. उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी एक एएसपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में संभाली जा रही थी. सुरक्षा व्यवस्था में पंजाब पुलिस के जवानों के साथ महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी और कर्मी भी तैनात थे.
शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की कोशिश को नाकाम बनाने वाले पुलिस इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ केंद्रे की पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अस्पताल में मुलाकात की. हरसिमरत कौर ने इंस्पेक्टर केंद्रे के अदम्य साहस को सलाम करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया.
महज 30 सेकंड में कार्रवाई की
दोपहर करीब 1:45 बजे, जब सुखबीर सिंह बादल गुरुद्वारे से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति कपड़े में छिपाकर लाई गई कृपाण के साथ उनकी ओर बढ़ा. स्थिति को भांपते हुए पुलिस इंस्पेक्टर संतोष केंद्रे ने महज 30 सेकंड में कार्रवाई की और हमलावर को बादल तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लिया.
घटना के बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हिरासत में लिए जाने के दौरान उसने धार्मिक नारे भी लगाए. इस घटना के समय सुखबीर सिंह बादल श्रद्धालुओं से मुलाकात कर परिसर से बाहर निकल रहे थे. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पुलिस की तत्परता के कारण संभावित गंभीर हमला टल गया. एहतियात के तौर पर बादल को नांदेड़ के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया.
संतोष वैजनाथ की हो रही है तारीफ
घटना के बाद महाराष्ट्र पुलिस की सुरक्षा टीम, विशेष रूप से इंस्पेक्टर संतोष वैजनाथ केंद्रे की भूमिका की सराहना की जा रही है. बादल परिवार ने भी उनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त किया है. संतोष वैजनाथ केंद्रे का महाराष्ट्र पुलिस में लंबा अनुभव रहा है. उन्होंने वर्ष 2001 में कांस्टेबल के रूप में सेवा शुरू की थी और वर्तमान में पुलिस इंस्पेक्टर पद पर कार्यरत हैं. उनकी त्वरित सूझबूझ और बहादुरी ने इस संवेदनशील मौके पर संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई.
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