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This Article is From Jan 10, 2026

फडणवीस-शिंदे को फंसाने की साजिश! ठाणे केस की SIT जांच में हुआ ये बड़ा खुलासा

SIT रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि ठाणे केस की जांच में फडणवीस और शिंदे को झूठे केस में फंसाने की साजिश हुई.

फडणवीस-शिंदे को फंसाने की साजिश! ठाणे केस की SIT जांच में हुआ ये बड़ा खुलासा
  • वर्ष 2016 के ठाणे नगर पुलिस थाने के मामले में SIT ने फडणवीस और एकनाथ शिंदे को फंसाने की साजिश का खुलासा किया
  • SIT ने तत्कालीन पुलिस महानिदेशक, उपायुक्त और सहायक आयुक्त सरदार पाटिल के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है
  • इस मामले में संजय पांडे ने 2017 में चार्जशीट वाले मामले की पुनः जांच के आदेश दिए
मुंबई:

ठाणे नगर पुलिस थाने में वर्ष 2016 में दर्ज एक पुराने मामले की दोबारा जांच से जुड़ा चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि तत्कालीन विपक्ष के नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को एक झूठे मामले में फंसाने की कथित साजिश रची गई थी. SIT ने इस मामले में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे, तत्कालीन उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटिल और सहायक आयुक्त सरदार पाटिल के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की है.

फडणवीस-शिंदे को फंसाने की साजिश, SIT की रिपोर्ट

यह विस्तृत रिपोर्ट राज्य की पूर्व पुलिस महानिदेशक रश्मी शुक्ला ने अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक पांच दिन पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को सौंपी थी. रिपोर्ट के अनुसार, महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल के दौरान फडणवीस को कानूनी रूप से उलझाने के प्रयास तेज हुए. संजय पांडे के मुंबई पुलिस आयुक्त और बाद में डीजीपी पद पर आने के बाद इन प्रयासों को और गति मिली. SIT की जांच में यह भी सामने आया है कि ठाणे और मुंबई के साइबर पुलिस थानों में दर्ज कुछ मामलों में फडणवीस को आरोपी बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों पर कथित तौर पर दबाव बनाया गया.

संजय पांडे समेत अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश

वर्ष 2016 में ठाणे नगर पुलिस थाने में श्यामसुंदर अग्रवाल के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया था, जो बिल्डर संजय पुनमिया और अग्रवाल के बीच साझेदारी विवाद से जुड़ा था. इस मामले में 2017 में चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी, इसके बावजूद संजय पांडे ने मामले की पुनः जांच के आदेश दिए. इसी दौरान संजय पुनमिया ने आरोप लगाया कि 2021 से जून 2024 के बीच पुराने केस की दोबारा जांच के नाम पर उनका उत्पीड़न किया गया और उनसे कथित तौर पर जबरन वसूली (Extortion) की मांग की गई. इस शिकायत के आधार पर संजय पांडे सहित सात लोगों के खिलाफ जबरन वसूली का मामला दर्ज किया गया है.

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जबरन वसूली के आरोप और फॉरेंसिक सबूतों की पुष्टि

इस पूरे घटनाक्रम को विधान परिषद सदस्य प्रविण दरेकर ने विधानमंडल में उठाया था. इसके बाद सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया. SIT ने अपनी रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी रश्मी शुक्ला को सौंपी, जिसे आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संजय पुनमिया द्वारा प्रस्तुत ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कलिना स्थित फॉरेंसिक लैब में कराई गई. जांच में ठाणे पुलिस के सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त सरदार पाटिल, पूर्व नगर रचनाकार दिलीप घेवारे और संजय पुनमिया के बीच हुई बातचीत की पुष्टि हुई है. कथित बातचीत में सरदार पाटिल यह कहते सुनाई देते हैं कि संजय पांडे ने उनसे और पुलिस निरीक्षक मनोहर पाटील से पूछा था कि फडणवीस और शिंदे को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया.

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गवाहों पर दबाव और सबूतों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप

SIT का निष्कर्ष है कि ठाणे नगर के इस मामले में फडणवीस और शिंदे को गिरफ्तार कराने के लिए संजय पांडे द्वारा भारी दबाव बनाया गया. इसके अलावा 5 मई 2021 से 21 मई 2021 के बीच सरदार पाटील द्वारा उपयोग में लाई गई सरकारी गाड़ी की लॉगबुक के कुछ पन्ने गायब पाए गए, जिसे सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश माना गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटील और सहायक आयुक्त सरदार पाटील ने गवाहों पर दबाव डालकर बयान बदलवाने और नाम जोड़ने का प्रयास किया. कोपरी पुलिस थाने में दर्ज एक अन्य मामले में अधिकार क्षेत्र न होने के बावजूद पूछताछ करने, धमकाने और बयान बदलवाने के आरोप भी सामने आए.

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