अंबरनाथ नगर परिषद की राजनीति में सत्ता संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच चल रहा राजनीतिक टकराव और तीखा हो गया है. ताजा घटनाक्रम में शिवसेना ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के साथ गठबंधन कर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे भाजपा की सत्ता रणनीति को करारा झटका लगा है.
सबसे बड़ी पार्टी होकर भी सत्ता से दूर शिवसेना
हाल ही में हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनावों में एकनाथ शिंदे की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. इसके बावजूद भाजपा ने शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए असामान्य राजनीतिक कदम उठाए. भाजपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और बाद में एनसीपी के नगरसेवकों को भी साथ लेकर वैकल्पिक सत्ता समीकरण तैयार किया. इस गठबंधन का एकमात्र उद्देश्य शिवसेना को सत्ता से दूर रखना बताया जा रहा था. यह कदम स्थानीय राजनीति में काफी चर्चा का विषय बना और भाजपा पर वैचारिक समझौते के आरोप भी लगे.
कांग्रेस की सख्ती: 12 नगरसेवकों पर गिरी गाज
भाजपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया. पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीत दर्ज करने वाले 12 कांग्रेस नगरसेवकों के भाजपा समर्थित रुख को पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए कांग्रेस ने सभी 12 नगरसेवकों को निलंबित कर दिया.यह कार्रवाई कांग्रेस के लिए संगठनात्मक अनुशासन का संदेश थी, लेकिन इसी के साथ अंबरनाथ की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया.
रविंद्र चव्हाण की एंट्री और भाजपा में शामिल हुए निलंबित नगरसेवक
कांग्रेस से निलंबन के कुछ ही समय बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की मौजूदगी में सभी 12 निलंबित कांग्रेस नगरसेवकों को औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल कराया गया. भाजपा इसे अपनी राजनीतिक बढ़त मान रही थी और जल्द ही परिषद में सत्ता गठन की तैयारी शुरू कर दी गई थी.भाजपा को भरोसा था कि कांग्रेस से आए नगरसेवकों और एनसीपी के समर्थन से शिवसेना को निर्णायक रूप से सत्ता से बाहर रखा जाएगा.
शिवसेना का पलटवार: एनसीपी के 4 नगरसेवक भाजपा गठबंधन से अलग
जब भाजपा सत्ता गठन की योजना पर आगे बढ़ रही थी, तभी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने बड़ा राजनीतिक दांव खेल दिया. पहले भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा रहे एनसीपी (अजीत पवार गुट) के 4 नगरसेवकों ने अचानक शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान कर दिया.इस अप्रत्याशित कदम ने पूरे सत्ता समीकरण को पलट दिया और भाजपा को राजनीतिक रूप से बड़ा झटका लगा.
नया शक्ति समीकरण: शिवसेना बहुमत के पार
अंबरनाथ नगर परिषद – कुल सदस्य संख्या: 60
(59 नगरसेवक + 1 अध्यक्ष)
शिवसेना-एनसीपी गठबंधन:
शिवसेना – 27
एनसीपी (अजीत पवार) – 4
अपक्ष – 1
कुल – 32 (बहुमत से अधिक)
अन्य दल:
भाजपा – 14
कांग्रेस – 12
अपक्ष – 1
इन आंकड़ों के साथ शिवसेना-एनसीपी गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है और परिषद में सत्ता गठन का मजबूत दावा पेश किया है.
भाजपा बनाम शिवसेना: अंबरनाथ बना राजनीतिक रणक्षेत्र
अंबरनाथ नगर परिषद अब भाजपा और शिवसेना के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई का केंद्र बन चुकी है. भाजपा द्वारा कांग्रेस के साथ हाथ मिलाना और बाद में शिवसेना द्वारा एनसीपी के समर्थन से सत्ता समीकरण बदल देना. इन घटनाओं ने स्थानीय राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं.राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम आने वाले नगर निकाय चुनावों और महायुति के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों को भी उजागर करता है.
अब सभी की निगाहें आधिकारिक सत्ता गठन प्रक्रिया और अध्यक्ष पद के चुनाव पर टिकी हैं. वहीं भाजपा के लिए यह घटनाक्रम संगठनात्मक और रणनीतिक स्तर पर आत्ममंथन का विषय बन गया है, जबकि शिवसेना इसे अपनी राजनीतिक दृढ़ता और रणनीतिक जीत के रूप में पेश कर रही है.अंबरनाथ की यह लड़ाई साफ संकेत दे रही है कि महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में आने वाले दिनों में सियासी टकराव और तेज होने वाला है.
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