ILS Law College Fee Dispute: महाराष्ट्र की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी असर डालने वाला फैसला सामने आया है. पुणे के प्रतिष्ठित इंडियन लॉ सोसायटी (ILS) लॉ कॉलेज को छात्रों से अवैध रूप से वसूली गई अतिरिक्त फीस 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया गया है. यह कार्रवाई मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित विशेष जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कॉलेज ने कई शैक्षणिक वर्षों में बिना वैधानिक अनुमति के विभिन्न मदों में शुल्क वसूला. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने इसे छात्रों के आर्थिक शोषण का मामला बताते हुए सख्त रुख अपनाया है.
मुंबई हाईकोर्ट के निर्देश से शुरू हुई जांच
ILS लॉ कॉलेज के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मामला मुंबई उच्च न्यायालय तक पहुंचा. अदालत के निर्देश पर महाराष्ट्र उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने मार्च महीने में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया. इस समिति का नेतृत्व उच्च शिक्षा के संयुक्त निदेशक ने किया. समिति को कॉलेज द्वारा की गई फीस वसूली की प्रक्रिया, उसकी वैधता और विश्वविद्यालय की मंजूरी से जुड़े पहलुओं की जांच सौंपी गई.

ILS Law College Fee Dispute: लॉ कॉलेज में फीस विवाद
बिना मंजूरी वसूली गई फीस, कानून का उल्लंघन
जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि ILS लॉ कॉलेज ने शैक्षणिक वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2024-25 के दौरान छात्रों से कई मदों में फीस वसूली, जिसकी कोई पूर्व स्वीकृति सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से नहीं ली गई थी. यह सीधे तौर पर महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016 का उल्लंघन है, जिसके तहत किसी भी कॉलेज को फीस संरचना के लिए विश्वविद्यालय की मंजूरी अनिवार्य होती है.
एक छात्र से 17 मदों में वसूले गए एक लाख से अधिक रुपये
समिति की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला उदाहरण भी सामने आया. एक छात्र से ₹1,04,863 की राशि 17 विभिन्न मदों में वसूली गई, जिनमें से अधिकांश को “अनधिकृत” करार दिया गया. न तो इन शुल्कों का कोई स्पष्ट विवरण था और न ही इनके लिए नियामक अनुमति ली गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, फीस वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह गैर-पारदर्शी थी.
उच्च शिक्षा विभाग का सख्त निर्देश
जांच रिपोर्ट के आधार पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने पुणे स्थित कॉलेज को स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि वह प्रभावित छात्रों को अतिरिक्त वसूली गई पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए. ब्याज की गणना छात्रों द्वारा भुगतान की गई तारीख से की जाएगी. साथ ही कॉलेज को इस संबंध में एक अनुपालन रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी.
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