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TCS धर्मांतरण केस की आरोपी निदा खान को क्‍यों नहीं मिलनी चाहिए जमानत? पुलिस ने कोर्ट में बताई ये वजह

TCS Conversion Case: नासिक के टीसीएस धर्मांतरण मामले में निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. एसआईटी जांच में पता चला कि निदा खान ने पीड़िता को जबरन इस्लाम अपनाने के लिए दबाव डाला और मोबाइल में धार्मिक ऐप डाले.

TCS धर्मांतरण केस की आरोपी निदा खान को क्‍यों नहीं मिलनी चाहिए जमानत? पुलिस ने कोर्ट में बताई ये वजह
निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित
नासिक:

Nida Khan Bail Plea: नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) धर्मांतरण मामले में आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. एसआईटी जांच में निदा खान और मामले के अन्‍य आरोपियों के खिलाफ कई चौंकानेवाली बातें सामने आई हैं. निदा खान, पीड़िता को अपने घर ले जाती थी और उसे जबरदस्‍ती नमाज पढ़ना और हिजाब पहनना सिखाती थी. पुलिस को इस मामले में 'मालेगांव पार्टी' के बारे में भी आरोपी से पूछताछ करनी है, जिसके जरिए आरोपी पीड़िता का नाम बदलने के लिए इस्तेमाल करने वाले थे. निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कई ऐसे सवाल पुलिस ने उठाए, जिसकी वजह से बेल याचिका पर फैसला फिलहाल कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया है. मामले की अगली सुनवाई 2 मई को है. 

धमकी, यौन शोषण, धर्म परिवर्तन का प्रयास 
  

पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि आरोपियों में से एक ने उसका यौन उत्पीड़न किया, अपनी शादी की बात छिपाई और कार्यस्थल पर उसके धर्म का अपमान किया, साथ ही उस पर इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला. ऐसे में कोर्ट ने माना कि मामला गंभीर है, आरोपी नंबर 1 ने शादी का झांसा देकर पीड़िता का यौन शोषण किया. आरोपी नंबर 2 ने कार्यस्थल पर पीड़िता को धमकाया कि उसके और दानिश शेख के संबंधों के बारे में वह उसके घर बता देगा, और इस तरह शारीरिक सुख की मांग कर मोलेस्टेशन किया. साथ ही, पीड़िता की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर उसे डरा-धमकाकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया गया.

निदा के मोबाइल की जांच को बताया जरूरी 

निदा खान ने पीड़िता को धर्म परिवर्तन के लिए 'बुर्का' और मुस्लिम धर्म से संबंधित एक पुस्तक (मुहम्मद पैगंबर का पवित्र जीवन) दी थी, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है. आरोपी निदा खान ने धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से पीड़िता के मोबाइल में इस्लामिक ऐप डाले थे और उसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम और रील्स के माध्यम से धार्मिक शिक्षा से जुड़े लिंक भेजे थे. इस संबंध में आरोपी का मोबाइल जब्त करना और जांच करना जरूरी है. आरोपी निदा खान पीड़िता को अपने घर ले जाकर नमाज पढ़ना, हिजाब और बुर्का पहनना सिखाती थी. पुलिस को इस बारे में और अधिक जांच करनी है कि उसे ये वीडियो और सामग्री कहां से मिली.

क्‍या आरोपियों को मिली कोई आर्थिक मदद, जांच जरूरी 

पुलिस को यह पता लगाना है कि आरोपियों को यह अपराध करने के लिए क्या किसी ने आर्थिक सहायता या मदद दी थी, और अपराध दर्ज होने के बाद उन्हें किसने शरण दी. कंपनी से ट्रांसफर होने के बाद भी क्या निदा खान अन्य आरोपियों के संपर्क में थी, इसकी भी जांच होनी बाकी है.

SC Act की धाराएं भी लगीं 

इस मामले के सभी आरोपियों को पता था कि पीड़िता अनुसूचित जाति (SC) से है, फिर भी यह अपराध किया गया. इसलिए इस मामले में 'अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' (Atrocities Act) की धाराएं लगाई गई हैं.

कौन है 'मालेगांव पार्टी', जानना चाहती है पुलिस

आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता के शैक्षणिक और अन्य महत्वपूर्ण कागजात अपने कब्जे में ले लिए थे. आरोपी इसे किसी 'मालेगांव पार्टी' के माध्यम से पीड़िता का नाम बदलने के लिए इस्तेमाल करने वाले थे. पुलिस को इस 'मालेगांव पार्टी' के बारे में आरोपी से पूछताछ करनी है. आरोपी नंबर 1 (दानिश शेख) और आरोपी नंबर 2 (तौसिफ) पीड़िता को नौकरी के बहाने मलेशिया में 'इमरान' नाम के व्यक्ति के पास भेजने वाले थे. पुलिस को इस इमरान और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच करनी है.

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जमानत मिली, तो अन्य पीड़ित डर के मारे सामने नहीं आएंगे

पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने इस पीड़िता की तरह अन्य लड़कियों के साथ भी इसी तरह के अपराध किए होंगे, जिसकी जांच जरूरी है. पीड़िता के हिम्मत दिखाने के बाद, उसी कंपनी की 7 महिलाओं और 1 पुरुष ने आगे आकर आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. अब तक कुल 8 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. यदि आरोपी को जमानत मिली, तो अन्य पीड़ित डर के मारे सामने नहीं आएंगे. मामले की जांच अभी जारी है और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान (B.N.S.S. धारा 183 के तहत) दर्ज करना बाकी है. जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को डरा-धमका सकते हैं.

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