- एनसीपी ने मुंबई BMC चुनाव 2026 के लिए “आपली मुंबई – सर्वांसाठी मुंबई” नामक घोषणापत्र जारी किया है
- घोषणापत्र में मुंबई के शहरी विकास, सामाजिक न्याय और पारदर्शी शासन को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव रखा गया है
- जल आपूर्ति, कचरा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण जैसे शहरी संकटों को हल करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है
मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 को लेकर अजित पवार की एनसीपी ने अपना महत्वाकांक्षी घोषणापत्र जारी कर दिया है. “आपली मुंबई –सर्वांसाठी मुंबई” के विजन के साथ पेश यह दस्तावेज़ केवल चुनावी वादों की सूची नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य को लेकर एक वैकल्पिक राजनीतिक-प्रशासनिक मॉडल पेश करता है. एनसीपी ने इस घोषणापत्र के ज़रिए खुद को शहरी विकास, सामाजिक न्याय और पारदर्शी शासन की पक्षधर पार्टी के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है.
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विश्वस्तरीय मुंबई का दावा, जमीनी हकीकत पर फोकस
घोषणापत्र का केंद्रीय दावा है कि मुंबई को विश्वस्तरीय शहर बनाते हुए भी उसकी आत्मा,गरीब, मध्यम वर्ग और मेहनतकश आबादी को केंद्र में रखा जाएगा. बीते वर्षों में जहां शहरी राजनीति अक्सर “इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाम नागरिक सुविधा” की बहस में उलझी रही है, वहीं एनसीपी का घोषणापत्र दोनों को साथ लेकर चलने की बात करता है.
जनजागृतीचा अलार्म वाजणार, जनजागृती घडणार… मतदार राजा आता 'घड्याळ' निवडणार!#घड्याळाचा१अलार्म pic.twitter.com/OUyzZFcih4
— Ajit Pawar (@AjitPawarSpeaks) January 7, 2026
बुनियादी ढांचा: विकास या चुनावी महत्वाकांक्षा?
500 किलोमीटर नई सड़कों, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, AI आधारित सिग्नल और नए आर्थिक हब का वादा सीधे तौर पर मुंबई की सबसे बड़ी समस्या, ट्रैफिक और अव्यवस्थित विकास को संबोधित करता है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एजेंडा तभी विश्वसनीय होगा जब इसके लिए वित्तीय स्रोत और समयबद्ध योजना स्पष्ट हो. फिर भी, आंतरिक सड़कों को जोड़ने और ट्रैफिक जाम पर नियंत्रण का वादा नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानी से सीधा जुड़ता है.
पानी, कचरा और बाढ़: शहरी संकटों पर सीधा वार
जल आपूर्ति, ठोस कचरा प्रबंधन और ड्रेनेज सिस्टम पर घोषणापत्र का विशेष फोकस एनसीपी को अन्य दलों से अलग करता है. झुग्गी-बस्तियों और चॉलों में मुफ्त पानी, 24×7 जल आपूर्ति और ‘Zero Waste Policy' जैसे वादे शहरी गरीबों को सीधा संदेश देते हैं. वहीं, बाढ़ नियंत्रण और नदी पुनर्जीवन अभियान हाल के वर्षों में मुंबई में आई आपदाओं की पृष्ठभूमि में राजनीतिक रूप से बेहद प्रासंगिक हैं.
स्वास्थ्य और शिक्षा: ‘वेलफेयर पॉलिटिक्स' की वापसी
हर वार्ड में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मुफ्त मेडिकल जांच, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और छात्रों के लिए हेल्थ कार्ड—ये सभी वादे एनसीपी की कल्याणकारी राजनीति को दर्शाते हैं. इसी तरह, मनपा स्कूलों के डिजिटलीकरण, मुफ्त आहार, करियर गाइडेंस और कौशल विकास पाठ्यक्रम पार्टी को मध्यम वर्ग और निम्न-आय वर्ग के परिवारों में स्वीकार्यता दिलाने का प्रयास हैं.
पर्यावरण और जलवायु: भविष्य की राजनीति की झलक
‘ग्रीन सिटी', 10 लाख पेड़, इलेक्ट्रिक बसें, एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग और ‘Climate Resilient Mumbai' योजना यह संकेत देती है कि एनसीपी शहरी चुनावों में पर्यावरण को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में स्थापित करना चाहती है. यह युवा और शिक्षित मतदाताओं को आकर्षित करने की रणनीति भी मानी जा रही है.
आवास, महिला सुरक्षा और रोजगार: निर्णायक वोट बैंक पर नजर
1 लाख नए घर, SRA योजनाओं का तेज क्रियान्वयन और 700 वर्गफुट तक संपत्ति कर माफी जैसे वादे झुग्गीवासियों और निम्न-मध्यम वर्ग को सीधे साधते हैं. महिला सुरक्षा, वर्किंग वुमन हॉस्टल और महिला उद्यमिता पर जोर महिला मतदाताओं को केंद्र में रखता है, जबकि स्किल डेवलपमेंट सेंटर, स्टार्टअप और जॉब फेयर युवाओं को जोड़ने की कोशिश हैं.
सुशासन और पारदर्शिता
ई-गवर्नेंस, सोशल ऑडिट, वार्ड कमेटियां और भ्रष्टाचार-मुक्त मनपा प्रशासन की बात कर एनसीपी ने मौजूदा सत्ता पर अप्रत्यक्ष हमला बोला है. यह घोषणापत्र प्रशासनिक जवाबदेही को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करता है.
एनसीपी का बीएमसी चुनाव 2026 घोषणापत्र व्यापक, समावेशी और भविष्य-उन्मुख दिखाई देता है. यह दस्तावेज़ मुंबई की लगभग हर बड़ी समस्या,ट्रैफिक, पानी, बाढ़, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण को छूता है. हालांकि, असली सवाल यही है कि क्या यह घोषणापत्र केवल राजनीतिक घोषणा बनकर रह जाएगा या सत्ता में आने पर ठोस क्रियान्वयन के साथ मुंबई की तस्वीर बदलेगा. चुनावी मैदान में यह घोषणापत्र निश्चित रूप से एनसीपी को एक वैकल्पिक शहरी विजन देने वाली पार्टी के रूप में पेश करता है, अब फैसला मुंबईकरों के हाथ में है.
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