- नासिक के तपोवन क्षेत्र में कुंभ मेले की तैयारियों के लिए 1826 पेड़ों की कटाई पर NGT में सुनवाई होने जा रही है
- पर्यावरण प्रेमियों ने नासिक नगर निगम द्वारा की जा रही अंधाधुंध पेड़ों की कटाई के खिलाफ याचिका दायर की है
- प्रशासन का कहना है कि कुंभ मेले के लिए सड़क चौड़ीकरण जैसे विकास कार्यों के कारण पेड़ों की कटाई अनिवार्य है
नासिक के तपोवन में 1826 पेड़ों की कटाई के मामले में मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में अहम सुनवाई होने जा रही है. पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों की कटाई के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है. नासिक शहर में कुंभ मेले की तैयारियों के नाम पर हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ पर्यावरण प्रेमियों ने अब कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है.
नासिक नगर निगम द्वारा की जा रही पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने याचिका दायर की है. उनकी मांग है कि विकास के नाम पर हरियाली को नष्ट न किया जाए. तपोवन के बाद अब गंगापुर रोड इलाके में भी बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई है. सोमवार को इस मुद्दे पर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों के बीच तीखी झड़प और संघर्ष भी देखने को मिला था.
प्रशासन कह रहा-पेड़ काटना अनिवार्य
प्रशासन का तर्क है कि आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के लिए तपोवन समेत शहर के विभिन्न हिस्सों में पेड़ों को काटना अनिवार्य है. वहीं पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद है कि अदालत इस पर स्टे लगाएगी.
NGT ने पहले भी लगाई थी पेड़ों की कटाई पर रोक
दिसंबर 2025 में भी NGT ने बड़ा फैसला सुनाते हुए नासिक के तपोवन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के मामले में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी. तब भी कुंभ के लिए 1800 पेड़ों को काटे जाने का प्रस्ताव था. NGT ने अपने आदेश में कहा था कि तपोवन क्षेत्र में एक भी पेड़ नहीं काटा जाना चाहिए. इसके साथ ही, प्राधिकरण ने नासिक महापालिका को पेड़ों की कटाई से संबंधित पूरी रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया था.
कुंभ मेला 2027 के नाम पर काटे जा रहे 1800 से ज्यादा पेड़
बता दें कि नासिक के तपोवन क्षेत्र में कुंभ मेले सिंहस्थ 2027 के लिए 'साधुग्राम' बनाने की योजना है, जिसके लिए करीब 1800 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव था, जिनमें से कुछ 100 साल से अधिक पुराने बताए गए थे. इस मामले पर राजनीति भी तेज है. पर्यावरण प्रेमियों, कार्यकर्ताओं, और विपक्षी दलों जैसे उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की शिवसेना ने 'पेड़ों की हत्या' बताते हुए इसका विरोध भी किया था. मामला अब फिर एनजीटी के पास है, जिस पर सुनवाई होनी है.
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