हरियाणा के पुलिसकर्मी कि हत्या के बाद करीब 30 साल से कानून से बचता फिर रहा एक घोषित अपराधी आखिरकार दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया. आरोपी की पहचान राजिंदर बैरागी उर्फ राजिंदर सिंह यादव उर्फ "डॉ. झटका" के रूप में हुई है. वह हत्या, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और पुलिस हिरासत से फरार होने सहित कई गंभीर मामलों में वांछित था. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के मुंगावली से गिरफ्तार किया है.
पुराने मामलों की जांच से मिला सुराग
दिल्ली पुलिस लंबे समय से पुराने जघन्य मामलों में फरार अपराधियों की तलाश कर रही थी. इसी दौरान वर्ष 1997 में जनकपुरी थाने में दर्ज हत्या के प्रयास के दो मामलों की दोबारा जांच शुरू की गई. जांच में सामने आया कि इन मामलों का आरोपी राजिंदर वर्षों से फरार चल रहा है और अदालत उसे पहले ही घोषित अपराधी घोषित कर चुकी है. जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि आरोपी का संबंध सिर्फ दिल्ली के मामलों से नहीं बल्कि हरियाणा में हुई एक सनसनीखेज हत्या से भी है.
शादी समारोह में हुई थी पुलिसकर्मी की हत्या
पूछताछ में सामने आया कि 10 मई 1998 को सोनीपत जिले के सैयां खेड़ा गांव में एक शादी समारोह के दौरान राजिंदर का कुछ लोगों से विवाद हो गया था. इसके बाद वह अपने साथियों के साथ हथियार लेकर वापस लौटा और फायरिंग शुरू कर दी. इस गोलीबारी में हरियाणा पुलिस के जवान जय भगवान की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया. घटना के बाद उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था.
हथकड़ी समेत पुलिस हिरासत से हो गया था फरार
हत्या के मामले में गिरफ्तारी के बाद भी राजिंदर ज्यादा समय तक पुलिस की पकड़ में नहीं रहा. 14 फरवरी 1999 को जब उसे गाजियाबाद जेल से सोनीपत कोर्ट ले जाया जा रहा था तब वह गन्नौर रेलवे स्टेशन के पास पुलिस को चकमा देकर हथकड़ी समेत फरार हो गया. इसके बाद उसके खिलाफ एक और मामला दर्ज हुआ.
नाम बदला और नई जिंदगी शुरू कर दी
फरार होने के बाद आरोपी पहले महाराष्ट्र पहुंचा जहां उसने केंद्रीय विद्यालय में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में काम किया. बाद में वह मध्य प्रदेश के मुंगावली में बस गया और अपना नाम बदलकर राजेंद्र सिंह यादव रख लिया.
उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज बनवा लिए. वर्ष 2003 में उसने शादी भी कर ली. उसके दो बच्चे हैं. इलाके में वह बिना पंजीकरण के लोगों का इलाज करता था और "डॉ. झटका" के नाम से जाना जाता था. इसके अलावा वह प्रॉपर्टी डीलिंग और ठेकेदारी का काम भी करता था.
तकनीक और मुखबिर नेटवर्क से पहुंची पुलिस
दिल्ली पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने के लिए आधुनिक तकनीक और मुखबिर तंत्र दोनों का इस्तेमाल किया. लंबी निगरानी और पुख्ता जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने मध्य प्रदेश में छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कुल आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी दिखाती है कि अपराधी चाहे कितने भी साल तक पहचान बदलकर छिपा रहे लेकिन कानून से हमेशा नहीं बच सकता.
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