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3 साल, 11 अनशन, 2 महामोर्चे: कैसे मनोज जरांगे ने हिलाई महाराष्ट्र की सियासत?

जरांगे के आंदोलन के आगे सरकार इसलिए मजबूर हो जाती है क्योंकि मराठा समुदाय महाराष्ट्र की आबादी का 30% से अधिक है. यह एक विशाल, संगठित और राजनीतिक रूप से हावी वोट बैंक है, जो सत्ता पलटने का माद्दा रखता है.

3 साल, 11 अनशन, 2 महामोर्चे: कैसे मनोज जरांगे ने हिलाई महाराष्ट्र की सियासत?
मनोज जरांगे पाटील ने सितंबर 2023 से लेकर अब तक कुल 11 बार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की है.
PTI

महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण का चेहरा बन चुके मनोज जरांगे पाटिल ने अपने आंदोलनों से राज्य सरकार की नींद उड़ा रखी है. आरक्षण के नाम पर जरांगे ने जो जोर दिखाया है, उसने राज्य की सियासत की दिशा लगभग हर बार बदली या झकझोरी है.

आज महाराष्ट्र में आरक्षण की आग फिर सुलग रही है, जिसमें सबसे मजबूत धुरी जरांगे ही बने हुए हैं. मराठा आरक्षण, कुनबी प्रमाणपत्र और जाति सत्यापन की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल का अनशन सोमवार को दसवें दिन में प्रवेश कर गया है. उन्होंने अन्न-जल और उपचार त्याग दिया है. इसके बाद सरकार भारी दबाव में है और समाधान निकालने का प्रयास कर रही है.

ओबीसी नेता मंगेश ससाने को पुलिस ने हिरासत में लिया

दूसरी ओर, इसी बीच जालना के अंतरवाली सराटी में ही अनशन पर बैठे ओबीसी नेता मंगेश ससाने को पुलिस ने बिना समय गंवाए हिरासत में ले लिया है.  इस घटनाक्रम से मराठा और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा फिर से आमने-सामने आ गया है और यह साफ हो गया है कि प्रशासन जरांगे पर हाथ डालने से कतराता है, जबकि अन्य आंदोलनों को पुलिस बल से संभाल लिया जाता है.

आंदोलन को सिर्फ जरांगे के भरोसे न छोड़कर अब पूरा मराठा समाज इसे नई दिशा देने में जुट गया है. आरक्षण के मुद्दे पर पुणे में मराठा क्रांति मोर्चा की भी महत्वपूर्ण बैठकें हुईं. इसमें समाज की प्रमुख मांगों, आरक्षण के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं और आगामी आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा हुई. 

इस अहम बैठक में राजेंद्र कोंढरे, राजेंद्र कुंजीर, अनिल ताडगे, धनंजय जाधव सहित कई प्रमुख समन्वयक उपस्थित रहेंगे, जो सरकार पर चौतरफा दबाव बनाने की रणनीति स्पष्ट कर रहे हैं.

3 साल, 11 अनशन और महामोर्चे 

मनोज जरांगे पाटील ने सितंबर 2023 से लेकर अब तक कुल 11 बार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की है. उनका 11वां आंदोलन वर्तमान में 29 अगस्त 2026 से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में चल रहा है. 

  • पहला आंदोलन (29 अगस्त - 14 सितंबर 2023): जालना के अंतरवाली सराटी में पहला प्रमुख अनशन, जिसने राज्यभर में मराठा आंदोलन को हवा दी. मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद 17वें दिन यह अनशन खत्म हुआ.
  • 1 सितंबर 2023 में जालना के अंतरवाली सराटी में जब आरक्षण समर्थकों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, तब से जरांगे पाटिल एक साधारण कार्यकर्ता से राज्य के सबसे बड़े नेता बन गए! लाठीचार्ज के बाद जरांगे ने जब पहला बड़ा अनशन किया, इसके दबाव में सरकार को कुनबी रिकॉर्ड खोजने के लिए 'शिंदे समिति' बनानी पड़ी.
  • दूसरा आंदोलन (25 अक्टूबर - 2 नवंबर 2023): सरकार द्वारा दी गई समयसीमा खत्म होने के बाद दूसरा अनशन शुरू हुआ.
  • तीसरा आंदोलन (20 - 27 जनवरी 2024): अंतरवाली सराटी से शुरू होकर मुंबई के आजाद मैदान तक बढ़ा. सरकार द्वारा अध्यादेश सगे-सोयरे अधिसूचना का मसौदा जारी होने के बाद नवी मुंबई के वाशी में ही अनशन समाप्त हुआ. इस वक़्त सरकार ने 'सगे-सोयरे' रक्त संबंधी को भी कुनबी प्रमाणपत्र देने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया. फरवरी 2024 में सरकार ने मराठों को शिक्षा और नौकरियों में 10% का अलग आरक्षण दिया.
  • चौथा आंदोलन (10 - 26 फरवरी 2024): अध्यादेश को कानूनी रूप देने और सगे-सोयरे की मांग पर दबाव बनाने के लिए किया गया
  • पांचवां आंदोलन (08 - 13 जून 2024): लोकसभा चुनावों के बाद मराठा आरक्षण की मांग को लेकर फिर से भूख हड़ताल.
  • छठा आंदोलन (20 - 24 जुलाई 2024): सरकार को दी गई डेडलाइन खत्म होने पर दोबारा अनशन.
  • सातवां आंदोलन (16 - 21 सितंबर 2024): विधानसभा चुनाव से पहले कुणबी प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर आंदोलन.
  • 8वां आंदोलन (अक्टूबर/नवंबर 2024): मांगों के क्रियान्वयन में हो रही देरी के विरोध में
  • 9वां आंदोलन (फरवरी/मार्च 2025): बजट सत्र के दौरान सरकार पर दबाव बनाने के लिए
  • 10वां आंदोलन (29 अगस्त - 2 सितंबर 2025): मुंबई के आजाद मैदान में विशाल मार्च और 5 दिनों का आंदोलन चला.

11वां आंदोलन (29 अगस्त 2026 - जारी): जालना के अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर आमरण अनशन पर बैठे हैं, उन्होंने सरकार को 11 सितंबर 2026 तक 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड्स के आधार पर औपचारिक सरकारी आदेश GR जारी करने का अल्टीमेटम दिया है.

मनोज जरांगे पाटील के इन 11 आंदोलनों में से 9 आंदोलन जालना के अंतरवाली सराटी में हुए हैं और 2 बड़े आंदोलन मुंबई/नवी मुंबई जनवरी 2024 और अगस्त 2025 में केंद्रित रहे हैं. 

क्या-क्या मांगें पूरी हुईं और पेंच कहां फंसा है?

मांगें जो मान ली गईं:

  • राज्य सरकार को अब तक 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड मिल चुके हैं
  • अण्णासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं
  • लाखों मराठा युवाओं को कुनबी प्रमाणपत्र बांटे जा चुके हैं.

पेंच यहां फंसा है?

जरांगे की जिद है कि हैदराबाद, बॉम्बे और सतारा गजट के आधार पर सभी मराठों को कुनबी मानकर OBC प्रमाणपत्र दे दिया जाए. असली पेंच सगे-सोयरे के नोटिफिकेशन को कानूनी रूप से पक्के 'सरकारी आदेश' जीआर  में बदलने पर फंसा हुआ है, जिसे सरकार OBC समुदाय की भारी नाराजगी और कानूनी पेचीदगियों के कारण टाल रही है

जरांगे के आंदोलन के आगे सरकार इसलिए मजबूर हो जाती है क्योंकि मराठा समुदाय महाराष्ट्र की आबादी का 30% से अधिक है. यह एक विशाल, संगठित और राजनीतिक रूप से हावी वोट बैंक है, जो सत्ता पलटने का माद्दा रखता है.

इसके विपरीत, OBC और धनगर आंदोलन शुरू तो होते हैं, लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंच पाते, क्यों जातियों में बिखराव है, OBC एक समुदाय नहीं बल्कि सैकड़ों जातियों का समूह है. इसलिए वे मराठों की तरह एकमुश्त वोट बैंक की तरह दबाव नहीं बना पाते. OBC नेता मंगेश ससाने को हिरासत में लिया जाना इसी बात का प्रमाण है कि OBC नेताओं के पीछे वह जनसैलाब नहीं दिखता जो जरांगे के पीछे है.

जरांगे की देखा-देखी अब राज्यभर में धनगर समाज का आंदोलन भी शुरू हो गया है. धनगर समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर मनमाड, इंदापुर, सांगली और कोल्हापुर सहित कई स्थानों पर रैलियां और आंदोलन आयोजित किए गए, लेकिन जरांगे जैसी जमीनी गोलबंदी और अड़ियल रुख का अभाव इन आंदोलनों को इतना मजबूत नहीं दिखाता  

जरांगे अब क्या मांग रहे हैं?

अपने वर्तमान अनशन में जरांगे की मुख्य मांग है कि सरकार सभी पुरानी मांगों का अंतिम और फाइनल जीआर तुरंत जारी करे. उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो वे 12 सितंबर के बाद अपने समर्थकों के साथ पूरी मुंबई को जाम कर देंगे. महाराष्ट्र में अब आरक्षण की लड़ाई सिर्फ मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आरक्षण के शक्ति प्रदर्शन का बड़ा अखाड़ा बन चुकी है.

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