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शिंदे की शिवसेना को मिले 154 करोड़, BJP को महज 3.5 करोड़, ठाणे महापालिका में फंड को लेकर महायुति में कलह

Maharashtra Thane BJP VS Shinde Shivsena: ठाणे में फंड को लेकर महायुति में कलह की खबर है. एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 154 करोड़ मिले तो बीजेपी को महज 3.5 करोड़ मिले हैं.बीजेपी नाराज हुई तो एकनाथ शिंदे ने कहा कि हम मतभेद सुलझा लेंगे.

शिंदे की शिवसेना को मिले 154 करोड़, BJP को महज 3.5 करोड़, ठाणे महापालिका में फंड को लेकर महायुति में कलह
thane mahapalika news
  • ठाणे महानगरपालिका के विकास फंड के बंटवारे को लेकर भाजपा और शिवसेना में विवाद
  • शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षदों को कुल 150 से अधिक रुपये के फंड आवंटित किए गए,भाजपा को सिर्फ 3.5 करोड़
  • उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के छोटे भाई के वार्ड को पांच करोड़ रुपये का विकास फंड आवंटित किया गया है
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ठाणे:

महाराष्ट्र में महायुति सरकार (भाजपा-शिवसेना-NCP) के भीतर ठाणे महानगरपालिका के डेवलपमेंट फंड के बंटवारे को लेकर कलह आपसी कलह देखने को मिल रही है. भाजपा का आरोप है कि ठाणे में फंड के बंटवारे को लेकर गठबंधन में ठन गई है. कहा गया है कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के भाई के वार्ड में खूब धनवर्षा हुई है. शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षदों के लिए जहां फंड की खैरात बांट दी गई है, वहीं उसकी मुख्य सहयोगी पार्टी भाजपा के हाथ केवल बहुत कम रकम लगी है. शिवसेना को 154 करोड़ तो बीजेपी को महज 3.5 करोड़ देने का आरोप है. मामला बढ़ता देख खुद एकनाथ शिंदे सामने आए और कहा कि हम आपस में मतभेद सुलझा लेंगे. 

विवाद बढ़ा तो सामने आए एकनाथ शिंदे, बोले- मतभेद सुलझा लेंगे

दूसरी ओर भेदभाव से नाराज भाजपा ने शिवसेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जबकि शिवसेना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष यानी AIMIM को भी अच्छा फंड मिलने का दावा किया है. इस पूरे विवाद के बीच, राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा, "हम महायुति के रूप में मिलकर काम कर रहे हैं.अगर कुछ छोटे-मोटे मतभेद हैं, तो हम उन्हें भी आपस में बैठकर दूर कर लेंगे."

विवाद की जड़ क्या है?

हाल ही में संपन्न हुए ठाणे महानगरपालिका चुनाव में शिवसेना यहां इस क्षेत्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.इसके बाद पिछले 3 महीनों में नगर विकास विभाग की ओर से जो फंड जारी हुआ है, उसका आंकड़ा विवादों में है. शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षदों के लिए कुल 154.30 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड मंजूर किया गया है.वहीं सहयोगी दल होने के बावजूद भाजपा को सिर्फ 3 करोड़ 50 लाख रुपये दिए गए हैं.

इसके अलावा NCP और एमआईएम को मिलाकर 4 करोड़ 45 लाख रुपये का फंड दिया गया है. इस पूरे आवंटन में सबसे ज्यादा चर्चा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के परिवार से जुड़े एक वार्ड की हो रही है.एकनाथ शिंदे कोपरी-पांचपाखाड़ी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जिस 'किसन नगर' (प्रभाग क्रमांक 17) से की थी, वहां से उनके छोटे भाई प्रकाश शिंदे वर्तमान में पार्षद हैं. इस प्रभाग क्रमांक 17 में विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ रुपये का तगड़ा फंड मंजूर किया गया है.

किस प्रभाग (वार्ड) को कितना मिला फंड?

शिवसेना के पार्षदों वाले प्रभागों में करोड़ों रुपये की बरसात हुई है, जिसका विवरण इस प्रकार है:

➔प्रभाग क्रमांक 15 को सबसे ज्यादा 15.52 करोड़ रुपये का फंड दिया गया है
 ➔प्रभाग क्रमांक 20 को 14.05 करोड़ रुपये मिले हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 22 को 13.33 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 19 को 13.26 करोड़ रुपये दिए गए हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 28 को 12 करोड़ रुपये का फंड मिला है
 ➔प्रभाग क्रमांक 1 को 11 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 16 को 7.39 करोड़ रुपये मिले हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 6 को 6.5 करोड़ रुपये दिए गए हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 12 और प्रभाग क्रमांक 17 (प्रकाश शिंदे का वार्ड) को प्रत्येक के हिसाब से 5-5 करोड़ रुपये का फंड मिला है
 ➔प्रभाग क्रमांक 7 को 4.27 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 24 को 3.57 करोड़ रुपये मिले हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 18 को 2.65 करोड़ रुपये दिए गए हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 9 को 2.5 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है
 ➔प्रभाग क्रमांक 3 को 2 करोड़ रुपये मिले हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 8 को 1.60 करोड़ रुपये का फंड दिया गया है

वहीं कुछ वार्डों को लाखों रुपये के प्रारूप में भी फंड मिला है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है:
➔प्रभाग क्रमांक 27 को 75 लाख रुपये मिले हैं
➔प्रभाग क्रमांक 14, प्रभाग क्रमांक 25 और प्रभाग क्रमांक 29 में से प्रत्येक को 50-50 लाख रुपये आवंटित हुए हैं
 ➔प्रभाग क्रमांक 13 को 11 लाख रुपये का फंड मिला है
 ➔प्रभाग क्रमांक 31 को सबसे कम सिर्फ 3 लाख रुपये दिए गए हैं

राज्य में भले ही महायुति की सरकार हो, लेकिन ठाणे में भाजपा को दरकिनार किए जाने से स्थानीय नेताओं में भारी नाराजगी है.भाजपा का आरोप है कि विपक्ष की एमआईएम और अजीत पवार की NCP को संयुक्त रूप से 4.45 करोड़ रुपये दे दिए गए, लेकिन भाजपा को सिर्फ 3.5 करोड़ रुपये पर समेट दिया गया.यह विवाद आने वाले दिनों में महायुति के भीतर और तूल पकड़ सकता है.

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