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महाराष्ट्र में अब बंदरों की खैर नहीं ! 'पकड़ो और इनाम पाओ' की राशि ₹300 से बढ़कर हुई ₹600

Maharashtra Monkey Reward Doubled; महाराष्ट्र सरकार ने बंदरों के हमले और फसलों के नुकसान को रोकने के लिए रेस्क्यू मुआवजे को ₹300 से बढ़ाकर ₹600 कर दिया है. रत्नागिरी और रायगढ़ जैसे जिलों में बंदरों के बढ़ते उत्पात को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. जानें क्या हैं नए नियम और पकड़ने की पूरी प्रक्रिया.

महाराष्ट्र में अब बंदरों की खैर नहीं ! 'पकड़ो और इनाम पाओ' की राशि ₹300 से बढ़कर हुई ₹600
  • महाराष्ट्र सरकार बंदरों को पकड़ने वाली रेस्क्यू टीमों को प्रति बंदर 600 रुपये का इनाम देगी
  • रत्नागिरी सहित कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र में बंदरों के हमले और फसलों के नुकसान की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं
  • वन विभाग ने बंदरों को बिना चोट पहुंचाए पांच किलोमीटर से अधिक दूरी पर सुरक्षित छोड़ने के कड़े नियम लागू किए हैं
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Maharashtra Monkey Rescue Reward: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बंदरों के बढ़ते आतंक और उनसे होने वाले फसलों के नुकसान को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. अब बंदरों को पकड़ने वाली रेस्क्यू टीमों को प्रति बंदर 300 रुपये के बजाय 600 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. सरकार ने इस संबंध में नए नियम लागू कर दिए हैं, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी. यह फैसला खासतौर पर उन इलाकों के लिए राहत भरा है जहां बंदरों ने जीना मुहाल कर रखा है.यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गया है. 

बंदरों का 'आतंक' और खाली होता किसानों का पॉकेट

दरअसल कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र के इलाकों में बंदरों ने इस कदर उत्पात मचाया है कि किसानों की रातों की नींद उड़ गई है. आंकड़े बताते हैं कि अकेले रत्नागिरी में बीते दो-तीन सालों में बंदरों के हमले और नुकसान की 5,600 से ज्यादा घटनाएं हुई हैं. कहीं किसी गोदाम में घुसकर लाखों का माल साफ हो रहा है, तो कहीं तैयार फसलें बर्बाद हो रही हैं. स्थानीय लोग और नेता लंबे समय से इसकी शिकायत कर रहे थे कि पुरानी दरों पर कोई इन बंदरों को पकड़ने का जोखिम नहीं लेना चाहता. अब बढ़ी हुई रकम से उम्मीद जगी है कि रेस्क्यू टीमें ज्यादा सक्रियता से मैदान में उतरेंगी.

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खेल नहीं है ये रेस्क्यू, शर्तें भी हैं बड़ी सख्त

सरकार ने भले ही इनाम की राशि बढ़ा दी हो, लेकिन ये पैसा कमाना इतना आसान भी नहीं होगा. वन विभाग ने साफ कर दिया है कि बंदर को खरोंच तक नहीं आनी चाहिए. यानी जाल और पिंजरे का इस्तेमाल तो होगा, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा पर पाबंदी है. पैसा तभी मिलेगा जब बंदर को उसके इलाके से कम से कम 10 किलोमीटर दूर घने जंगल में सुरक्षित छोड़ा जाएगा. इसके लिए बाकायदा फोटो और वीडियो का सबूत देना होगा. इसके अलावा बंदरों को छोड़ते समय वन विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी या कम से कम वनपाल या वन रक्षक स्तर के कर्मचारी की उपस्थिति अनिवार्य है तब जाकर कहीं सरकारी फाइल आगे बढ़ेगी.

बजट की भी है एक लक्ष्मण रेखा

भले ही प्रति बंदर 600 रुपये मिलेंगे, लेकिन सरकार ने एक ऑपरेशन के लिए बजट की एक सीमा भी तय कर दी है. किसी भी एक मामले या लोकेशन पर रेस्क्यू के लिए अधिकतम 10,000 रुपये ही खर्च किए जा सकेंगे. इसमें बंदरों को पकड़ने से लेकर, उनके पिंजरे और ट्रांसपोर्ट का सारा खर्च शामिल होगा. साथ ही, अगर बंदर को पकड़ते समय किसी टीम मेंबर को चोट आती है या बंदर उसे काट लेता है, तो इसकी जिम्मेदारी खुद पकड़ने वाले की होगी. अब देखना यह है कि इनाम की इस 'डबल डोज' के बाद महाराष्ट्र के शहरों और गांवों में बंदरों का उत्पात कितना कम होता है.
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