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पिज्जा- बर्गर से पेट हो रहा खराब तो मिट्टी खाकर कर रहे इलाज... जिब्राल्टर के 'डॉक्टर' बंदरों से मिलिए

जिब्राल्टर में रहने वाले बंदरों ने अपना खराब पेट सही करने का अनोखा तरीका खोज लिया है- वे मिट्टी खा रहे हैं.

पिज्जा- बर्गर से पेट हो रहा खराब तो मिट्टी खाकर कर रहे इलाज... जिब्राल्टर के 'डॉक्टर' बंदरों से मिलिए
जिब्राल्टर के 'डॉक्टर' बंदरों से मिलिए (फाइल फोटो- AFP)
  • जिब्राल्टर के बार्बरी मकाक बंदरों ने जंक फूड के कारण पेट खराब होने पर मिट्टी खाना शुरू किया है
  • वैज्ञानिकों के अनुसार बंदर मिट्टी खाने से अपने पाचन तंत्र के माइक्रोबायोम को सुधारते हैं
  • पर्यटकों से मिलने वाले स्नैक्स जंक फूड के रूप में बंदरों के पेट के बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं
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अगर जानवर भी इंसानों की तरह जंक फूड खाकर पेट खराब कर लें तो क्या करेंगे? जिब्राल्टर में रहने वाले बंदरों ने इसका अनोखा तरीका खोज लिया है. जिब्राल्टर की चट्टान पर रहने वाले बार्बरी मकाक बंदरों के झुंड ने मिट्टी खाना सीख लिया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि वे ऐसा अपने पेट को ठीक करने के लिए करते हैं, क्योंकि उन्हें पर्यटकों से बहुत ज्यादा जंक फूड मिलता है- और कभी-कभी वे खुद भी चुरा लेते हैं.

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार रिसर्चर्स ने इस मिट्टी खाने की आदत को देखा, जिसे “जियोफैगी” कहा जाता है. यह तब सामने आया जब वे उस इलाके में रहने वाले बार्बरी मकाक बंदरों के समूहों का अध्ययन कर रहे थे. उन्होंने पाया कि जो बंदर पर्यटकों के ज्यादा संपर्क में आते हैं, वे सबसे ज्यादा मिट्टी खाते हैं. छुट्टियों के मौसम में यह और बढ़ जाता है.

जिब्राल्टर में लगभग 230 मकाक बंदर रहते हैं, जो 8 अलग-अलग समूहों में बंटे हैं. स्थानीय अधिकारी उन्हें रोज फल, सब्जियां और बीज देते हैं. लेकिन पर्यटक अक्सर उन्हें चिप्स के पैकेट, चॉकलेट, एम एंड एम्स और आइसक्रीम जैसे स्नैक्स भी खिला देते हैं. यह स्टडी साफ तौर पर यह नहीं बताता कि बंदर मिट्टी क्यों खाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर उनके पाचन तंत्र को बचाने में होता है. जिन बंदरों का समूह पर्यटकों से दूर रहता है, उन्हें मिट्टी खाते हुए नहीं देखा गया.

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कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्राइमेट बिहेवियर एक्सपर्स डॉक्टर सिल्वैन लेमोइन ने कहा कि बंदर शायद अपने पेट के माइक्रोबायोम को ठीक करने के लिए मिट्टी खाते हैं. माइक्रोबायोम यानी पेट में रहने वाले छोटे-छोटे जीवाणु, जो जंक फूड की वजह से बिगड़ जाते हैं. उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि जंक फूड माइक्रोबायोम को खराब कर देता है. मिट्टी में मौजूद बैक्टीरिया और खनिज इसे फिर से ठीक करने में मदद कर सकते हैं और नुकसान को कम कर सकते हैं. हमें लगता है कि मिट्टी का असर बचाव करने वाला होता है."

बता दें कि दुनिया में इंसान भी मिट्टी खाते हैं, खासकर अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में गर्भवती महिलाएं. वे ऐसा उल्टी (मितली) कम करने या जरूरी खनिज पाने के लिए करती हैं. लेकिन रिसर्चर्स ने बंदरों में गर्भवती या दूध पिलाने वाली मादाओं में मिट्टी खाने की आदत ज्यादा नहीं देखी, जिससे पता चलता है कि यह सिर्फ पोषण की कमी पूरी करने के लिए नहीं है. इसके बजाय, लेमोइन ने कहा कि बंदर मिट्टी खाकर अपने पाचन तंत्र को “संतुलित” रखते हैं. वे ऐसा हाई-एनर्जी और कम फाइबर वाले जंक फूड के असर से बचने के लिए करते हैं, जो कुछ प्राइमेट्स में पेट खराब कर सकता है.

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