- नासिक में मर्चेंट नेवी कैप्टन से ज्योतिषी बने अशोक खरात के राजनीतिक संबंधों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है
- महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने अशोक खरात और उनकी पत्नी को अपना गुरु माना था
- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके पुत्र श्रीकांत शिंदे की अशोक खरात के साथ तस्वीरें सामने आई हैं
महाराष्ट्र के नासिक में मर्चेंट नेवी कैप्टन से ज्योतिषी बने अशोक खरात का मामला अब सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं रहा, बल्कि उसके राजनीतिक संबंधों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पुलिस हिरासत में भेजे गए खरात की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ उसके संबंध सामने आ रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि आखिर खरात की पहुंच सत्ता और सिस्टम के किन-किन गलियारों तक थी.
रूपाली चाकणकर का ‘गुरु' कनेक्शन
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने खुद स्वीकार किया कि वह और उनका परिवार अशोक खरात और उनकी पत्नी को “गुरु” मानते थे. चाकणकर ने यह बयान मीडिया से बातचीत में दिया, जब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा सौंपा. उन्होंने यह इस्तीफा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को दिया, जिसे आगे मुख्यमंत्री को भेजा गया है. इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.
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एकनाथ शिंदे से नजदीकियां
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे का नाम भी इस मामले में सामने आया है. 2022 में जब शिंदे शिरडी दौरे पर गए थे, तब उन्होंने सिन्नर का खास दौरा किया था, जहां अशोक खरात की मौजूदगी में ईशानेश्वर मंदिर में पूजा की गई थी. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में खरात, शिंदे और उनके बेटे सांसद श्रीकांत शिंदे एक साथ नजर आ रहे हैं, जिससे दोनों के बीच नजदीकी संबंधों की चर्चा और तेज हो गई है.
दीपक केसरकर और ‘कनेक्ट' की भूमिका
पूर्व शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर को वह शख्स माना जा रहा है, जिन्होंने एकनाथ शिंदे और खरात के बीच संपर्क स्थापित कराया. जांच में यह भी सामने आया है कि केसरकर के करीबी दीपक लोंढे से एसआईटी ने पूछताछ की है. लोंढे और खरात के बीच व्यावसायिक संबंध होने का शक है, खासकर सिन्नर इलाके में जमीन के लेन-देन को लेकर.
अन्य नेताओं के साथ तस्वीरें
पिछले कुछ दिनों में कई नेताओं के साथ अशोक खरात की तस्वीरें वायरल हुई हैं. इनमें जयंत पाटिल, नीलेश लंके और चंद्रकांत पाटिल जैसे नेता शामिल हैं. हालांकि, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने कहा कि किसी के साथ फोटो खिंचवाना कोई अपराध नहीं है, क्योंकि सार्वजनिक जीवन में नेताओं की कई लोगों से मुलाकात होती रहती है.
MVA सरकार के दौरान भी था असर?
अशोक खरात का प्रभाव सिर्फ व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित था या सरकारी फैसलों तक भी पहुंचता था, इस पर अब सवाल उठ रहे हैं. 2020 का एक सरकारी आदेश सामने आया है, जिसमें “श्री शिवनिका संस्थान” को पानी आवंटित किया गया था, जो कि अशोक खरात से जुड़ा बताया जा रहा है.
31 जुलाई 2020 को जारी आदेश के मुताबिक, दारणा डैम से 39 लाख लीटर पानी आवंटित किया गया था. यह पानी
सिन्नर जैसे सूखा प्रभावित इलाके को दिया गया था. इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसानों के लिए तय पानी को एक निजी संस्थान की ओर मोड़ा गया था.
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