- महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने अशोक खरात से जुड़े विवाद के बाद पद से इस्तीफा दिया
- नासिक के ज्योतिषाचार्य अशोक खरात पर एक महिला को नशीला पदार्थ देकर यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया गया है
- अशोक खरात ने अपने राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव का उपयोग कर महिलाओं का विश्वास जीतकर उनका कथित रूप से शोषण किया
नासिक के रसूखदार ज्योतिषाचार्य बाबा अशोक खरात का काला चिट्ठा खुलने और उसकी गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर को पद से इस्तीफा देना पड़ा. उन्होंने महिला आयोग और प्रदेशाध्यक्ष, दोनों ही पदों से इस्तीफा दे दिया. महाराष्ट्र की सियासत में ये किसी बड़े धमाके से कम नहीं है. रूपाली ने यह कदम अशोक खरात से जुड़े बलात्कार का गंभीर मामला सामने आने के बाद उठाया गया. दरअसल खरात के साथ रूपाली का लिंक सामने आया था. लेकिन उनका कहना है कि महिला होने की वजह से उनको टारगेट किया गया है.
कौन है अशोक खरात, क्या है आरोप ?
अशोक खरात, नाशिक का एक स्वयंभू ज्योतिषी और अंकशास्त्री है. जिसे पुलिस ने हाल ही में पुलिस ने एक 28 साल की महिला की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने महिला को नशीला पदार्थ देकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया. जांच एजेंसियों के मुताबिक, अशोक खरात ने अपने प्रभाव और राजनीतिक-सामाजिक संपर्कों का इस्तेमाल कर महिलाओं का भरोसा जीता और फिर कथित धार्मिक या आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के नाम पर उनका शोषण किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है.

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रूपाली को लेकर कैसे बढ़ा विवाद?
यह विवाद तब और गहरा हुआ जब सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें रूपाली चाकणकर अशोक खरात के साथ दिखाई दे रही थीं. इन तस्वीरों में उनके कथित तौर पर धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने की बात सामने आई. इससे महिला आयोग जैसी संवेदनशील संस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए और रूपाली के इस्तीफे की मांग तेज हो गई. विपक्ष भी इसे लेकर हमलावर हो गया था.

जिसे गुरु माना, उसकाे कृत्य की कल्पना नहीं की थी
रूपाली का कहना है कि उन्होंने जिसे सामाजिक जीवन में अपना मार्गदर्शक और गुरु माना था, उनके द्वारा ऐसे "भयानक कृत्य" किए जाएंगे, इसकी उन्होंने रत्ती भर भी कल्पना नहीं थी. रूपाली ने कहा कि समाज में रहते हुए हम किसी न किसी को गुरु मानते हैं. मेरे परिवार ने उस पति-पत्नी को गुरु माना था. महाशिवरात्रि या गुरु पूर्णिमा जैसे कार्यक्रमों में हम उपस्थित रहते थे. गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जैसे अन्य लोगों ने पूजा-पाठ किया, वैसे ही मैंने और मेरे पति ने भी की थी.
रूपाली ने आगे कहा कि हम किसी के संपर्क में होते हैं, लेकिन उनका व्यक्तिगत व्यवहार या कृत्य कैसा है, इसकी हमें जानकारी नहीं होती. जब यह घटना घटी, तो मुझे गहरा धक्का लगा और मैंने तुरंत ट्वीट भी किया. रूपाली ने सफाई देते हुए कहा कि अशोक खरात और उनके परिवार के निजी जीवन के बारे में जानने का मेरे पास कोई कारण नहीं था.

सीएम को सौंपा पत्र, मामले की निष्पक्ष जांच हो
रूपाली का कहना है कि उन्होंने पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर उन्हें जांच के लिए पत्र सौंपा. साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर भी पत्र दिया है. मेरी मांग है कि इस घटना की जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए. जिस अखबार में खबर छपी थी, हमने उन्हें स्पष्ट लिखा था कि आपकी खबर अधूरी है, इसे विस्तार से बताएं. इस बारे में पुलिस अधीक्षक (SP) से भी जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्होंने कहा था कि उनके पास कोई सूचना नहीं है.
रूपाली ने कहा कि 5 तारीख को उनके पास जब एक लड़की का ईमेल आया, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को पत्र भेजकर जांच के आदेश दिए. उन्होंने साफ किया कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को संरक्षण नहीं दिया गया है.
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