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हम नकल का समर्थन नहीं करते, मगर सिस्टम में बदलाव तो हो; साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे के छात्रों का प्रदर्शन

IIT बॉम्बे के छात्र प्रतिनिधियों ने साहिल वाकोडे की मौत के बाद जारी विरोध प्रदर्शन को लेकर कहा है कि उनका आंदोलन नकल या शैक्षणिक कदाचार का समर्थन नहीं करता. छात्रों ने संस्थागत सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है.

हम नकल का समर्थन नहीं करते, मगर सिस्टम में बदलाव तो हो; साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे के छात्रों का प्रदर्शन
IIT बॉम्बे छात्र की मौत के बाद छात्रों का बड़ा बयान, बोले- विरोध नकल के समर्थन में नहीं, संस्थागत सुधार के लिए है
NDTV
  • साहिल वाकोडे केस : IIT बॉम्बे में छात्र आंदोलन पर आया आधिकारिक बयान
  • छात्रों ने कहा- हम नकल का समर्थन नहीं करते, हमारी लड़ाई सिस्टम में बदलाव के लिए है
  • प्रोफेसर डूला को लेकर छात्रों ने दी सफाई, जांच निष्पक्ष हो
मुंबई:

आईआईटी बॉम्बे में दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद शुरू हुए छात्र आंदोलन पर छात्र प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह की शैक्षणिक अनियमितता या नकल को सही ठहराना नहीं है. छात्रों के अनुसार यह विरोध एक दुखद घटना के बाद संस्थान की व्यवस्थाओं पर गंभीर चिंतन और आवश्यक सुधारों की मांग के लिए किया गया है. प्रतिनिधियों का कहना है कि छात्रों ने अपनी चिंताओं और सुझावों को प्रशासन के सामने रखा है और संस्थान ने उन पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है.

साहिल की मौत के बाद जारी हुआ बयान

आईआईटी बॉम्बे के छात्र प्रतिनिधियों ने 21 सितंबर को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि 18 सितंबर को डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की मौत एक बेहद दुखद घटना है. छात्रों ने कहा कि इस घटना ने उन्हें संस्थान के भीतर मौजूद प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है. उन्होंने साफ कहा कि वे किसी भी तरह की नकल या शैक्षणिक कदाचार (Academic Misconduct) का समर्थन नहीं करते.

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विरोध का मकसद क्या था?

छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य शैक्षणिक अनियमितताओं को उचित ठहराना नहीं था. उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक प्रयास था, जिसमें लंबे समय से मौजूद व्यवस्थागत समस्याओं को सामने लाने और ऐसे सुधारों की मांग करने की कोशिश की गई, जिससे भविष्य में किसी छात्र को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े. छात्रों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में उन्होंने अपनी मांगों का एक विस्तृत दस्तावेज तैयार किया और उसे औपचारिक रूप से संस्थान के निदेशक को सौंपा.

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निदेशक ने मांगे स्वीकार कीं

छात्र प्रतिनिधियों ने बताया कि निदेशक ने छात्रों की मांगों को स्वीकार करते हुए उन पर हस्ताक्षर किए हैं और तय समयसीमा में उनके क्रियान्वयन की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है. उन्होंने कहा कि छात्रों और प्रशासन के बीच एक ओपन हाउस बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें छात्रों को सीधे अपनी बात रखने का अवसर मिला. इस दौरान छात्रों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए और अपनी चिंताएं साझा कीं.

छात्रों के सवालों का दिया गया जवाब

प्रतिनिधियों के मुताबिक, निदेशक ने छात्रों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और सवालों पर विस्तार से जवाब दिया. उन्होंने प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान के भीतर सामने आई समस्याओं की पहचान और समाधान की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है. छात्रों का मानना है कि संवाद की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहनी चाहिए.

प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला पर भी दी सफाई

छात्रों ने प्रोफेसर सूर्यानारायण डूला को लेकर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि उनकी ओर से कभी भी प्रोफेसर को दोषी मानने या जांच पूरी होने से पहले कोई निष्कर्ष निकालने की कोशिश नहीं की गई. छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि वे प्रोफेसर डूला को अपने शिक्षक समुदाय का हिस्सा मानते हैं और चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष तथा स्वतंत्र तरीके से पूरी हो.

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प्रशासनिक जिम्मेदारियों से हटाने की मांग

छात्रों ने बताया कि उनकी मांग सिर्फ इतनी थी कि जांच पूरी होने तक प्रोफेसर डूला को डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के प्रशासनिक पद से अस्थायी रूप से मुक्त किया जाए. उनका कहना था कि इससे जांच की निष्पक्षता और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. छात्रों ने कहा कि अंतिम निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई स्थापित जांच प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए.

बाहरी हस्तक्षेप का विरोध

बयान में छात्रों ने यह भी कहा कि साहिल की मौत को बाहरी राजनीतिक संगठनों, समूहों या किसी अन्य एजेंडे का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों द्वारा उठाई गई मांगें परिसर में पढ़ने वाले छात्रों के अनुभवों और चिंताओं से जुड़ी हैं. इसलिए सुधार की प्रक्रिया भी संस्थान और छात्र समुदाय के भीतर ही केंद्रित रहनी चाहिए.

जवाबदेही और सुधार की मांग जारी रहेगी

छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि वे आगे भी जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत सुधार की मांग उठाते रहेंगे. साथ ही, वे संस्थान के साथ मिलकर एक सुरक्षित, जिम्मेदार और छात्रों के लिए अधिक सहायक शैक्षणिक वातावरण बनाने की दिशा में काम करेंगे. अपने बयान के अंत में छात्रों ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे के छात्र एकजुट हैं और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज छात्रों के बीच से ही उठनी चाहिए.

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