- गोकुल डेयरी के चुनाव में कांग्रेस गठबंधन ने पच्चीस में तेरह सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था.
- महाराष्ट्र सरकार ने चुनाव के बाद नियम बदलकर पांच सरकारी निदेशक बोर्ड में नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर किया.
- चार सरकारी निदेशकों को मतदान का अधिकार दिया गया जिससे चुनावी समीकरण कांग्रेस के खिलाफ हो सकता है.
सालाना चार हजार करोड़ टर्नओवर वाली गोकुल डेयरी के चुनाव में कांग्रेस की मिली जीत से महाराष्ट्र की राजनीति में फिर चर्चाओं का दौर जारी है. गोकुल डेयरी में कांग्रेस की मिली जीत की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि राहुल गांधी ने इस जीत पर पोस्ट लिखा है. लेकिन गोकुल डेयरी में मिली हार के बाद महाराष्ट्र सरकार ने नियम ही बदल दिया. नियम बदलने जाने के बाद अब संख्या बल कुछ इस तरह की हो गई है कि कांग्रेस को जीत के बाद भी विपक्ष में बैठना पड़ सकता है. राहुल गांधी ने इसे 'बहुमत चोरी' का नाम दिया है.
मालूम हो कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ जिसे लोकप्रिय रूप से “गोकुल डेयरी” के नाम से जाना जाता है उसके चुनाव परिणाम और उसके बाद का राजनीतिक विवाद इस समय महाराष्ट्र में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है.
गोकुल डेयरी में कांग्रेस को मिली जीत पर राहुल गांधी ने क्या लिखा?
गोकुल डेयरी में कांग्रेस की मिली जीत पर राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया. तो भाजपा ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए - 4 डायरेक्टर ठूँसो, 12 को 16 बनाओ, बहुमत चुराओ. ये दूध उत्पादकों के वोट की चोरी है - जनादेश में मिलावट. भाजपा इतनी हताश हो चुकी है कि हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है. दूध उत्पादकों का वोट चुराने वाले याद रखें - किसान भूलता नहीं
गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया। तो भाजपा ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए - 4 डायरेक्टर ठूँसो, 12 को 16 बनाओ, बहुमत चुराओ। ये दूध उत्पादकों के वोट की चोरी है - जनादेश में मिलावट। भाजपा इतनी हताश हो चुकी है कि हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। दूध उत्पादकों का वोट चुराने वाले याद रखें - किसान भूलता नहीं।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) November 5, 2026
गोकुल डेयरी चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को मिली 25 में 13 सीटें
हाल ही में हुए चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 25 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया था, जबकि राज्य की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को 12 सीटें मिलीं. लेकिन असली ट्विस्ट अब आया है, जिसके कारण यह रिजल्ट और भी खास हो गया है.
चुनाव में हार के बाद 5 निदेशकों की नियुक्ति का नियम
चुनाव में 13 सीटें जीतकर कांग्रेस समर्थित “राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी अघाड़ी” ने बहुमत तो पा लिया था, लेकिन बुधवार को ही महाराष्ट्र कैबिनेट ने सहकारी समितियों के नियमों में एक बड़ा बदलाव करते हुए गोकुल बोर्ड में 5 सरकारी निदेशकों को नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इनमें से 4 निदेशकों को वोटिंग का अधिकार भी होगा. इस फैसले से 13-12 का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है और बहुमत होने के बाद भी सतेज पाटिल गुट से अध्यक्ष की कुर्सी छीन सकती है.
सालाना 4 हजार करोड़ का टर्नओवर, लाखों किसानों की संस्था
गोकुल डेयरी का सालाना टर्नओवर लगभग ₹4,000 करोड़ का है, जो इसे पश्चिमी महाराष्ट्र की सबसे बड़ी सहकारी संस्थाओं में से एक बनाता है. इस डेयरी से कोल्हापुर और आसपास के लाखों दूध उत्पादक किसान जुड़े हुए हैं. यह संस्था कोल्हापुर की 8,000 ग्रामीण समितियों और 4.41 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को संभालती है, जिसके चलते इसका भारी राजनीतिक प्रभाव है. जो भी गोकुल पर नियंत्रण रखता है, उसका ग्रामीण मतदाताओं और जमीनी स्तर के नेतृत्व पर सीधा प्रभाव होता है.
महायुति सरकार ने झोंक दी थी पूरी ताकत, फिर भी हारे
इस चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति BJP, शिवसेना, NCP ने 3 मंत्रियों, 10 विधायकों और 2 सांसदों के साथ अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद इस चुनाव में समन्वय के लिए हस्तक्षेप किया था. इसके बावजूद अकेले सतेज पाटिल ने महायुति को हराकर 13 सीटें जीत ली थीं. चुनाव में महायुति के कई बड़े चेहरे जैसे हसन मुश्रीफ के बेटे नवीद मुश्रीफ और निवर्तमान अध्यक्ष शौमिका महाडिक चुनाव हार गए थे.
नए नियम के हिसाब से हुए चुनाव तो क्या होगा?
गोकुल के नियमों के मुताबिक, अध्यक्ष चुनने के लिए मीटिंग में कम से कम 14 संचालकों की उपस्थिति जरूरी है. चूंकि सतेज पाटिल के पास 13 सीटें हैं, महायुति के 12 निदेशकों ने बैठकों से दूरी बना ली ताकि कोरम पूरा न हो सके और अध्यक्ष का चुनाव टल जाए.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अब 10 नवंबर को नए सिरे से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कराने का निर्देश दिया है. माना जा रहा है कि सरकार द्वारा नियुक्त “4 नए वोटिंग सदस्यों” के आने के बाद, सत्ताधारी महायुति गठबंधन 10 नवंबर से पहले बोर्ड में 16-13 के बहुमत से आगे निकल सकता है. कुल मिलाकर यह सिर्फ एक डेयरी का चुनाव नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति और सहकारिता क्षेत्र पर वर्चस्व की ज़मीनी लड़ाई है.
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