दिशा सालियान मौत मामले में वकील निलेश ओझा ने कुछ दस्तावेजों के आधार पर गंभीर दावे किए हैं. उनका कहना है कि पोस्टमॉर्टम और मेडिकल रिकॉर्ड में ऐसे उल्लेख मौजूद हैं जो यौन उत्पीड़न की आशंका की ओर संकेत करते हैं. ओझा के इन आरोपों के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है.
पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड का हवाला
निलेश ओझा ने दावा किया कि 11 जून 2020 को हुए पोस्टमॉर्टम से जुड़े दस्तावेजों में स्वैब लिए जाने का उल्लेख दर्ज है. उनके अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र और फॉर्म-2 समेत कुछ रिकॉर्ड में निजी अंगों से नमूने लिए जाने की बात लिखी गई है. ओझा का कहना है कि ये दस्तावेज जांच के लिए महत्वपूर्ण हैं.
फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए थे नमूने
ओझा के मुताबिक 12 जून 2020 को एपीआई अशोक देवढे ने कालिना फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को पत्र लिखकर जांच के लिए सामग्री भेजने का अनुरोध किया था. उन्होंने दावा किया कि इस पत्र में निजी अंगों से लिए गए नमूनों और रक्त के सैंपल का उल्लेख था. उनका कहना है कि पत्र में एक से अधिक लोगों से जुड़े संभावित यौन अपराध के पहलू की जांच की बात भी दर्ज थी.
फॉरेंसिक रिपोर्ट पर उठाए सवाल
वकील ने आरोप लगाया कि 20 अगस्त 2020 की फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामग्री को "स्मीयर स्लाइड" बताया गया, जबकि पहले के रिकॉर्ड में स्वैब का उल्लेख था. ओझा का कहना है कि दोनों दस्तावेजों के विवरण में अंतर दिखाई देता है.
जांच में गड़बड़ी का आरोप
इसी अंतर को आधार बनाते हुए निलेश ओझा ने जांच रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ या गड़बड़ी की आशंका जताई है. उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए. हालांकि इन आरोपों पर संबंधित एजेंसियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है. फिलहाल मामला एक बार फिर बहस और चर्चा का विषय बन गया है.
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