शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
- शिवसेना ने मुखपत्र 'सामना' में मोदी सरकार पर साधा निशाना
- कहा-मोदी जब सीएम थे तब वह जीएसटी के खिलाफ थे
- गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है
मुंबई:
शिवसेना ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र ने गुजरात विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए सामान्य इस्तेमाल की कुछ चीजों पर जीएसटी की दरों में कटौती की है. पार्टी ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब वह इस समान कर व्यवस्था को लागू करने के खिलाफ थे. गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है.
यह भी पढ़ें : जीएसटी की नई दरों से क्या-क्या होगा सस्ता, जानें यहां-
शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है, 'देश की गर्दन पर नोटबंदी की कुल्हाड़ी चलने के बाद से अर्थव्यवस्था कभी उबर नहीं सकी. जीएसटी का हथियार सुस्त अर्थव्यवस्था के खिलाफ इस्तेमाल किया गया और महंगाई बढ़ गई.' इसमें कहा गया है, 'जीएसटी के दरों में कटौती करके सरकार अपने अंहकार को एक तरफ रखकर झुक गई. यह लोगों की जीत है.' संपादकीय में कहा गया है, '(जीएसटी के लागू होने के बाद) लोगों का गुस्सा आग में तब्दील हो गया. जीएसटी की दरों को कम करने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि गुजरात चुनाव में इसकी भारी कीमत नहीं चुकानी पड़े.'
यह भी पढ़ें : 30 वस्तुओं पर कर घटा, एसयूवी, बड़े कारों पर जीएसटी सेस बढ़ा
राजग की सहयोगी ने कहा कि गैर ब्रांडेड 'खाखरा' पर जीएसटी दर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत खासतौर पर गुजरात चुनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. शिवसेना ने कहा, 'सूरत, राजकोट और अहमदाबाद में छोटे व्यापारी जीएसटी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए, जिसने गुजरात में सरकार विरोधी माहौल बना दिया. इस वजह से सरकार को दरों में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ा.'
VIDEO: GST के नए नियमों पर कुछ व्यापारियों ने जताई आशंका
'सामना' में दावा किया गया कि पीएम मोदी का शुरू से मानना था कि अगर जीएसटी लागू किया गया तो मंहगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था सुस्त होगी. गुजरात के मुख्यमंत्री रहते उन्होंने जोरदार तरीके से इस कर व्यवस्था का विरोध किया था. शिवसेना ने कहा, 'लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा ने जीएसटी को लागू कर दिया. इस प्रकार मोदी अपनी बात से पीछे हटे. नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया.'
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शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है, 'देश की गर्दन पर नोटबंदी की कुल्हाड़ी चलने के बाद से अर्थव्यवस्था कभी उबर नहीं सकी. जीएसटी का हथियार सुस्त अर्थव्यवस्था के खिलाफ इस्तेमाल किया गया और महंगाई बढ़ गई.' इसमें कहा गया है, 'जीएसटी के दरों में कटौती करके सरकार अपने अंहकार को एक तरफ रखकर झुक गई. यह लोगों की जीत है.' संपादकीय में कहा गया है, '(जीएसटी के लागू होने के बाद) लोगों का गुस्सा आग में तब्दील हो गया. जीएसटी की दरों को कम करने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि गुजरात चुनाव में इसकी भारी कीमत नहीं चुकानी पड़े.'
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राजग की सहयोगी ने कहा कि गैर ब्रांडेड 'खाखरा' पर जीएसटी दर 12 से घटाकर 5 प्रतिशत खासतौर पर गुजरात चुनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. शिवसेना ने कहा, 'सूरत, राजकोट और अहमदाबाद में छोटे व्यापारी जीएसटी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए, जिसने गुजरात में सरकार विरोधी माहौल बना दिया. इस वजह से सरकार को दरों में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ा.'
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'सामना' में दावा किया गया कि पीएम मोदी का शुरू से मानना था कि अगर जीएसटी लागू किया गया तो मंहगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था सुस्त होगी. गुजरात के मुख्यमंत्री रहते उन्होंने जोरदार तरीके से इस कर व्यवस्था का विरोध किया था. शिवसेना ने कहा, 'लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा ने जीएसटी को लागू कर दिया. इस प्रकार मोदी अपनी बात से पीछे हटे. नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया.'
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