Madhav National Park Shivpuri: मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में वन विभाग पर लगे एक गंभीर आरोप ने हड़कंप मचा दिया है. सुरवाया थाना क्षेत्र के ग्रामीणों ने दावा किया है कि माधव नेशनल पार्क में छोड़े गए टाइगरों के शिकार के लिए वन विभाग के कर्मचारियों ने रात के अंधेरे में उनके गांव से भैंस का बच्चा (पड़वा) चोरी कर लिया. घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने सुरवाया थाने के बाहर प्रदर्शन करते हुए नेशनल हाईवे-27 को जाम कर दिया. ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और बिना जानकारी उनके मवेशी को उठा ले जाना गलत है. वहीं वन विभाग ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है.
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
शिवपुरी जिले के सुरवाया थाना क्षेत्र के ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम पर पशु चोरी का गंभीर आरोप लगाया है. ग्रामीणों का दावा है कि माधव नेशनल पार्क में मौजूद टाइगरों के लिए शिकार के तौर पर उनके गांव से भैंस का बच्चा उठाकर ले जाया गया. इस घटना के बाद गांव में नाराजगी और भय का माहौल बन गया.
“रात में ले गए पड़वा”
ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय कुछ लोग गांव में पहुंचे और भैंस के बच्चे को अपने साथ ले गए. ग्रामीणों को शक है कि इसमें वन विभाग के कर्मचारी शामिल थे और मवेशी को टाइगर रिजर्व क्षेत्र में इस्तेमाल किया गया. गांव वालों का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर खोजबीन की, लेकिन मवेशी का कोई पता नहीं चला.
थाने के बाहर प्रदर्शन, हाईवे जाम
घटना से गुस्साए ग्रामीण बड़ी संख्या में सुरवाया थाने पहुंचे. यहां उन्होंने वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की. प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे-27 पर जाम भी लगा दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा.
“पशुपालन ही हमारी रोजी-रोटी”
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना था कि वे आर्थिक रूप से कमजोर लोग हैं और पशुपालन से ही उनके परिवार का गुजारा चलता है. ऐसे में किसी मवेशी का गायब होना उनके लिए बड़ा नुकसान है. ग्रामीणों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और उनका मवेशी वापस दिलाया जाए.
पुलिस ने दर्ज किया मामला
सुरवाया थाना प्रभारी अरविंद छारी ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मवेशी चोरी का मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और आसपास के क्षेत्रों में पूछताछ की जा रही है. पुलिस के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त किया.
वन विभाग ने आरोपों को बताया झूठा
दूसरी ओर, माधव टाइगर रिजर्व के रेंजर आर.के. दीक्षित ने ग्रामीणों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार और झूठे हैं. रेंजर के मुताबिक, कुछ ग्रामीणों द्वारा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश किया गया था.
“वन अपराध कार्रवाई से बचने का दबाव”
वन विभाग का कहना है कि मंगलवार को तीन ग्रामीण बलारपुर क्षेत्र में बने टाइगर बाड़े के पास घूमते पाए गए थे. इस पर उनके खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया है. रेंजर आर.के. दीक्षित का आरोप है कि कार्रवाई से बचने और रिजर्व क्षेत्र में दबाव बनाने के उद्देश्य से वन विभाग पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं.
टाइगर रिजर्व में पहले भी रहे विवाद
माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने के बाद क्षेत्र में कई नए नियम लागू किए गए हैं. वन विभाग का कहना है कि अब बिना अनुमति रिजर्व क्षेत्र में मवेशी चराना और प्रवेश करना प्रतिबंधित है. इसी को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के बीच कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है.
सवालों के घेरे में पूरा मामला
हालांकि ग्रामीणों के आरोप और वन विभाग की सफाई के बाद मामला अब जांच का विषय बन गया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भैंस का बच्चा कहां गया और क्या वास्तव में किसी ने उसे उठाकर ले जाया.
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