मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के चक चुरेला गांव में देर रात सशस्त्र बदमाशों ने एक सहायक सचिव के घर को निशाना बनाते हुए बड़े डकैती कांड को अंजाम दिया. रात के लगभग दो बजे बेखौफ बदमाशों ने परिजनों को कमरे में बंद कर बंधक बना लिया और पूरे घर को खंगालते हुए 2 किलो सोना, 1 किलो चांदी, 12 लाख रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल और पूरी तिजोरी ही अपने साथ समेटकर चंपत हो गए. इस बड़ी वारदात के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि शुरुआती जांच में घटना के पीछे खूंखार पारदी गिरोह का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है.
देर रात बोला धावा और परिजनों को कमरे में बनाया बंधक
चक चुरेला गांव में हुई यह घटना बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई. देर रात करीब 2 बजे जब पूरा परिवार गहरी नींद में सो रहा था, तभी हथियारों से लैस बदमाशों ने घर की घेराबंदी कर ली. बदमाशों ने सबसे पहले परिजनों के कमरों के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए ताकि कोई बाहर न आ सके और न ही कोई विरोध दर्ज करा पाए. इसके बाद बेखौफ लुटेरों ने आराम से पूरे घर की तलाशी ली और घर में रखी पूरी जमापूंजी, गहने और दूसरी चीजें लेकर आराम से फरार हो गए.
करोड़ों के गहने और तिजोरी समेटकर हुए रफूचक्कर
बदमाशों की लूट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे घर से कीमती सामान के साथ-साथ भारी-भरकम तिजोरी तक अपने साथ ले गए. पीड़ित परिवार के अनुसार, लुटेरे लगभग 2 किलो सोना, 1 किलो चांदी, 12 लाख रुपये नकद और एक मोटरसाइकिल ले जाने में कामयाब रहे. डकैती की इस बड़ी रकम और सर्राफा की लूट ने स्थानीय ग्रामीणों को स्तब्ध कर दिया है, जिससे पूरे गांव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
एफएसएल और डॉग स्क्वाड के साथ जंगलों में पुलिस की सर्चिंग
घटना की सूचना मिलते ही फतेहगढ़ थाना पुलिस तुरंत एक्शन में आई और आला अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचकर निरीक्षण शुरू किया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फॉरेंसिक (FSL) टीम और डॉग स्क्वाड को मौके पर बुलाया गया है, जो फिंगरप्रिंट्स और अन्य अहम सुराग जुटाने में लगी हैं. इसके साथ ही आसपास के इलाकों और रास्तों पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जबकि संदिग्ध बदमाशों की तलाश में पुलिस की विशेष टीमें आसपास के जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं.
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पारदी गिरोह: अपराध का तरीका और पुलिस के लिए चुनौती
मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय पारदी गिरोह आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के अपने खास और दुस्साहसिक तरीके के लिए जाना जाता है. यह गिरोह आमतौर पर हाईवे किनारे बने अलग-थलग मकानों, खेतों के बीच स्थित घरों या गांवों की बाहरी बस्तियों को अपना निशाना बनाता है. वारदात से पहले गिरोह के सदस्य बाकायदा इलाके की रेकी करते हैं और आधी रात के बाद हथियारों से लैस होकर धावा बोलते हैं. चोरी और डकैती के दौरान विरोध दबाने के लिए परिजनों को बंधक बनाना या उन पर हिंसक हमला करना इनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है. वारदात को अंजाम देने के बाद यह गिरोह तुरंत जंगलों, अस्थायी डेरों या दुर्गम इलाकों में छिप जाता है, जिससे इन्हें पकड़ना पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होता है.
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