बड़वानी जिले से एक दिल को छू लेने वाला मामला सामने आया है, जहां अंजड थाना क्षेत्र के बांडी हरणगांव गांव में इंसानियत और पशु प्रेम की मिसाल पेश की गर्ग. गांव में एक बकरे की मौत के बाद ग्रामीणों ने उसे परिवार के सदस्य की तरह सम्मान देते विदा किया. ढोल-बाजों के साथ बकरे 'मालण बाबा' की शवयात्रा निकाली और हिंदू रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया. बकरे की इस तरह की अनोखी विदाई की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है.

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मालण बाबा के नाम पर छोड़ा गया था बकरा
बांडी हरणगांव गांव के ग्रामीणों के अनुसार, यह बकरा स्थानीय लोकदेवता मालण बाबा के नाम पर छोड़ा गया था. गांव के लोग उसे स्नेहपूर्वक "मालण बाबा" कहकर ही पुकारते थे. बकरा कई वर्षों से गांव में सभी लोगों के बीच रहता था, उसने कभी किसी बच्चे या बुजुर्ग को नुकसान नहीं पहुंचाया. इसी वजह से उसकी मौत के बाद ग्रामीणों ने उसे पूरे सम्मान के साथ विदाई देने का फैसला किया.

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गांव भर में घूमी शवयात्रा
"मालण बाबा" यानी बकरे की अंतिम यात्रा के दौरान बैलगाड़ी पर उसके शव को सजाकर रखा गया और ढोल-बाजों के साथ गांव भर में शवयात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए. शवयात्रा गांव से निकलकर बाहर स्थित नाले के पास पहुंची, जहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार बकरे का अंतिम संस्कार किया गया.

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नम आंखों से दी विदाई
बकरे की शवयात्रा में बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने प्रिय पशु को अंतिम विदाई दी. ग्रामीणों का यह कदम पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, आस्था और अनूठे प्रेम की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.
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barwani malan baba goat funeral: बकरे की शवयात्रा में उमड़ा गांव.
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