सिंधिया राजघराने की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में नया मोड़ आ गया है. ग्वालियर जिला अदालत ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ स्वर्गीय पद्माराजे की बेटी प्रतिमा देवी का आवेदन स्वीकार कर लिया है. इसका मतलब है कि अब प्रतिमा देवी भी इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद में अपना हक अदालत के सामने रख सकेंगी. उनके कोर्ट में आने से न सिर्फ पक्षकारों की संख्या बढ़ी है, बल्कि संपत्ति के बंटवारे का पूरा गणित भी बदल सकता है.
क्या है सिंधिया परिवार की संपत्ति को लेकर विवाद?
यह मामला सिंधिया राजघराने की पैतृक और दूसरी संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा है. कई सालों से चल रही इस कानूनी लड़ाई में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे के बीच संपत्ति के अधिकार को लेकर विवाद चल रहा है. अब तक इस मामले में स्वर्गीय पद्माराजे के परिवार का कोई सदस्य सीधे तौर पर शामिल नहीं था. लेकिन अदालत द्वारा प्रतिमा देवी का आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद यह तस्वीर बदल गई है.
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प्रतिमा देवी का दावा क्या है?
ग्वालियर जिला अदालत ने प्रतिमा देवी के आवेदन को सुनवाई के योग्य मानते हुए स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही संपत्ति पर उनके दावे और आपत्तियों को मुख्य सुनवाई का हिस्सा भी बना दिया गया है.
गुरुवार को उनके दामाद प्रतीक कारकी ग्वालियर पहुंचे और अदालत में उनकी ओर से पक्ष रखा गया. माना जा रहा है कि आने वाली सुनवाई में प्रतिमा देवी की तरफ से अपने दावे से जुड़े दस्तावेज और कानूनी आधार पेश किए जाएंगे
दस्तावेज और नोटिस पर भी उठाए सवाल
प्रतिमा देवी ने पहले भी इस मामले की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि उन्हें केस से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए. उन्होंने नोटिस भेजने के तरीके पर भी आपत्ति जताई थी. प्रतिमा देवी का कहना है कि वह काठमांडू में रहती हैं, जबकि कुछ नोटिस नेपालगंज के पते पर भेजे जाने की बात कही गई. उनका दावा है कि इसी वजह से उन्हें मामले की पूरी जानकारी समय पर नहीं मिल सकी.
दूसरे पक्ष का क्या कहना है?
उधर दूसरे पक्ष ने प्रतिमा देवी की आपत्तियों का विरोध किया है. उनका कहना है कि पहले हुए समझौते में प्रतिमा देवी की सहमति शामिल थी और संबंधित दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी मौजूद हैं. जाहिर है कि अब यह मुद्दा भी अदालत में बहस का विषय बनेगा. आने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और दस्तावेज पेश करेंगे. अदालत ने प्रतिमा देवी का आवेदन तो स्वीकार कर लिया है, लेकिन संपत्ति में उनका वास्तविक हिस्सा कितना बनता है, यह अभी तय होना बाकी है. इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी. उस दिन संपत्ति के बंटवारे, प्रतिमा देवी के दावे और पहले हुए समझौतों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बहस होने की संभावना है. सिंधिया परिवार की संपत्ति से जुड़ा यह मामला पहले से ही देश के सबसे चर्चित पारिवारिक संपत्ति विवादों में गिना जाता है. अब प्रतिमा देवी के आधिकारिक तौर पर जुड़ जाने से मामले में एक नया पक्ष सामने आ गया है. कानूनी जानकारों का मानना है कि इससे संपत्ति बंटवारे के पूरे ढांचे और संभावित फार्मूले पर असर पड़ सकता है.
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